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बिजली की मांग को पूरा करने के लिए केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने ताप विद्युत संयंत्रों की बिजली क्षमता की स्थिति की समीक्षा की

गर्मी के मौसम के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने उत्तर-पश्चिम, पूर्वोत्तर, मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के कुछ अलग-अलग इलाकों को छोड़कर, देश भर में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक होने का अनुमान लगाया है। इसलिए बिजली की मांग भी पिछले वर्षों की तुलना में अधिक होगी। सरकार आगामी गर्मी के मौसम में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है। केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह ने इसे सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण बैठकें की हैं, जिसमें गर्मी के मौसम के दौरान शून्य लोड शेडिंग सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

विद्युत मंत्रालय ने बताया कि इस वर्ष मार्च के तीसरे सप्ताह में मंत्रालय में हुई एक बैठक में इस बात पर बल दिया गया कि सभी स्टेकहोल्डरों द्वारा पर्याप्त अग्रिम योजना बनाई जानी चाहिए, ताकि ऐसी स्थिति को रोका जा सके जिसमें एक राज्य के पास अधिशेष बिजली हो जबकि दूसरे राज्य को बिजली की कमी का सामना करना पड़े।

इस क्रम में 2 अप्रैल को एक और बैठक आयोजित की गई, जिसमें केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर.के सिंह ने बार-बार तापीय क्षमता की अधिकतम उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आंशिक कटौती का सामना करने वाले सभी ताप विद्युत संयंत्रों की बिजली क्षमता की स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान यह बताया गया कि आंशिक कटौती के तहत क्षमता की मात्रा में कमी आई है और उन्हें और कम करने के लिए उपाय सुझाए गए हैं।

केंद्रीय विद्युत मंत्री महोदय ने निर्देश दिया है कि गर्मी के मौसम के दौरान गैस आधारित क्षमता के संचालन की समीक्षा के लिए गैस आधारित बिजली परियोजनाओं के सभी डेवलपर्स के साथ भी एक बैठक आयोजित की जाए। मंत्रालय इस बात की जांच करेगा कि क्या बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 11 के तहत निर्देश, जिसके अंतर्गत उपयुक्त सरकार निर्दिष्ट कर सकती है कि एक उत्पादन कंपनी, असाधारण परिस्थितियों में, उस सरकार के निर्देशों के अनुसार किसी भी उत्पादन केंद्र का संचालन और रखरखाव करेगी।

आर.के. सिंह ने अप्रैल महीने में 1.7 गीगावॉट और जून महीने में 6 गीगावॉट – 9 गीगावॉट विद्युत संयंत्रों के नियोजित रखरखाव के उपक्रम की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। यह निर्णय लिया गया है कि तापीय इकाइयों के नियोजित आउटेज को मानसून के मौसम में शेड्यूल/शिफ्ट करने का प्रयास किया जाएगा। इनके अलावा, कोयला, पनबिजली, परमाणु, सौर और पवन ऊर्जा में क्षमता वृद्धि की निगरानी की जाएगी, ताकि उनकी कमीशनिंग में तेजी लाई जा सके। कैप्टिव उत्पादन केन्द्रों के पास उपलब्ध किसी भी अतिरिक्त बिजली के उपयोग की संभावना का पता लगाने का भी निर्णय लिया गया है।

इसके अतिरिक्त यह भी बताया गया कि सभी तापीय उत्पादन केन्द्रों को हाल ही में अधिसूचित नियमों के अनुसार, बिजली विनिमय में अपनी गैर-माँगी गई / अधिशेष बिजली की पेशकश करनी होगी। निर्देश दिया गया है कि अनुपालन की नियमित रूप से निगरानी की जाए और निर्देशों का उल्लंघन करने पर नोटिस जारी किया जाए।

गौरतलब है इस दौरान कि यह भी निर्णय लिया गया है कि, आयातित कोयला आधारित बिजली संयंत्रों द्वारा प्रदान की जाने वाली ऊर्जा को ध्यान में रखते हुए, धारा 11 के तहत निर्देशों को 30 सितंबर, 2024 तक बढ़ाया जा सकता है।

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