केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को जयपुर में वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) की ग्लोबल कंजर्वेशन कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया। 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों और संरक्षण नेताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने दुनिया भर के लोगों से मिल-जुलकर रहने और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी के जरिए संरक्षण को बढ़ावा देने का आग्रह किया।

भारत की वन्यजीव उपलब्धियां: संरक्षित क्षेत्रों में बड़ा विस्तार

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लगातार राजनीतिक इच्छाशक्ति और वैज्ञानिक निगरानी से महत्वपूर्ण नतीजे मिले हैं। भूपेंद्र यादव ने बताया कि पिछले एक दशक में देश में संरक्षित क्षेत्रों की संख्या लगभग 750 से बढ़कर 1,000 से अधिक हो गई है। टाइगर रिजर्व की संख्या 47 से 58, हाथी रिजर्व 30 से 33 और रामसर साइट्स (अंतरराष्ट्रीय महत्व वाले आर्द्रभूमि) 24 से 101 हो गई हैं। 

उन्होंने कहा, “प्रजातियों के संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता संवैधानिक और सांस्कृतिक दोनों है। यह एक ऐसी सोच पर आधारित है जो आधुनिक संरक्षित-क्षेत्र कानूनों से बहुत पहले से चली आ रही है। भारत ने अपने संविधान में एक मजबूत ढांचा तैयार किया है जो वन्यजीवों की सुरक्षा को राज्य का निर्देश और नागरिक का कर्तव्य दोनों बनाता है।”

चीता पुनर्वास और अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन

भूपेंद्र यादव ने भारत में चीता पुनर्वास परियोजना की सफलता और CITES, CMS, CBD तथा रामसर कन्वेंशन जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों के पालन पर जोर दिया। इन प्रयासों ने बाघों, हाथियों, एक सींग वाले गैंडों और एशियाई शेरों की आबादी को सुरक्षित रखने में मदद की है। 

उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान की अहम भूमिका का भी जिक्र किया और बाघों, हाथियों, डॉल्फिन, शेरों तथा हिम तेंदुओं जैसी प्रजातियों की आबादी के अनुमानों का उल्लेख किया। इन आकलनों से बड़े पैमाने पर संरक्षण, जैविक गलियारों को सुरक्षित करने और आवास बहाली के काम में मदद मिली है।

राजस्थान का मॉडल और घास के मैदानों का महत्व

क्षेत्रीय संरक्षण मॉडलों की ओर ध्यान दिलाते हुए मंत्री ने गंभीर रूप से लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) के संरक्षण प्रजनन में राजस्थान की सफलता और ‘ओरान’ (पारंपरिक पवित्र उपवन) के समुदाय-आधारित संरक्षण पर प्रकाश डाला। ये ओरान भूमि की गुणवत्ता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पर्यावरण संतुलन की बात करते हुए यादव ने जंगलों और वेटलैंड्स के साथ-साथ घास के मैदानों को बचाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने घास के मैदानों पर निर्भर बड़े शाकाहारी जानवरों जैसे एक सींग वाले गैंडे और जंगली भैंसे के संरक्षण के लिए भारत की विशेष पहलों का भी उल्लेख किया।

वैश्विक समुदाय से ठोस कार्रवाई की अपील

अपने भाषण के अंत में केंद्रीय मंत्री ने दुनिया भर के संरक्षण समुदाय से अपील की कि वे सिर्फ सोचने-विचारने से आगे बढ़ें और सफल मॉडलों को ठोस वैश्विक कार्रवाई में बदलें। उद्घाटन कार्यक्रम में MoEFCC के एडिशनल डायरेक्टर जनरल (वाइल्डलाइफ) रमेश पांडे, राजस्थान के प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट अरिजीत बनर्जी, WWF-इंटरनेशनल के चीफ कंजर्वेशन ऑफिसर दाउदी सांबा और WWF-इंडिया के CEO रवि सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि मौजूद रहे। (इनपुट-एजेंसी)