केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि भारत और कनाडा की अर्थव्यवस्थाओं में मौजूद पूरकताएं दोनों देशों को वित्तीय क्षेत्र में मजबूत और दीर्घकालिक साझेदारी बनाने का बड़ा अवसर प्रदान करती हैं। टोरंटो में आयोजित उच्च-स्तरीय भारत-कनाडा बिजनेस राउंडटेबल को संबोधित करते हुए उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापक और भविष्योन्मुखी आर्थिक संबंध स्थापित करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में कनाडा के वित्त एवं राष्ट्रीय राजस्व मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन भी मौजूद थे। इस दौरान सीतारमण ने कहा कि भारत अपनी विशाल बाजार क्षमता, तेज आर्थिक वृद्धि और निवेश के अवसर उपलब्ध कराता है, जबकि कनाडा के पास दीर्घकालिक पूंजी, मजबूत संस्थागत ढांचा और वित्तीय विशेषज्ञता है।

वित्तीय सहयोग और डिजिटल साझेदारी पर जोर

वित्त मंत्रालय के अनुसार, निर्मला सीतारमण ने कहा कि दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में हाल के समय में नई गति आई है। अब इस सकारात्मक माहौल को वित्तीय क्षेत्र में गहरे सहयोग और मजबूत निवेश साझेदारियों में बदलने की जरूरत है। उन्होंने डिजिटल प्रौद्योगिकियों के जरिए वित्तीय सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं का भी जिक्र किया। इसमें आसान भुगतान व्यवस्था, सीमा-पार धन हस्तांतरण और नागरिकों के लिए ज्यादा डिजिटल भुगतान विकल्प शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल दोनों देशों के बीच जन-केंद्रित और गहरी साझेदारी की मजबूत नींव रख सकती है।

भारतीय बैंकिंग व्यवस्था की मजबूती का जिक्र

वित्त मंत्री ने पिछले एक दशक में भारत में हुए आर्थिक और वित्तीय सुधारों का उल्लेख किया। एसेट क्वालिटी रिव्यू, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 4आर रणनीति और ईएएसई सुधारों जैसे कदमों ने बैंकिंग प्रणाली को पहले से ज्यादा मजबूत बनाया है। उन्होंने बताया कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात मार्च 2018 के 11.18 प्रतिशत से घटकर मार्च 2025 में 2.31 प्रतिशत रह गया है, जो पिछले दो दशकों का सबसे निचला स्तर है। पूंजी बाजारों की गहराई बढ़ी है, बीमा क्षेत्र का विस्तार हुआ है, फिनटेक नवाचार तेज हुए हैं और जैम, यूपीआई, अकाउंट एग्रीगेटर तथा इंडिया स्टैक जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म ने वित्तीय समावेशन को नई दिशा दी है।

गिफ्ट सिटी में निवेश का आमंत्रण

निर्मला सीतारमण ने कनाडाई वित्तीय संस्थानों को गिफ्ट इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (गिफ्ट आईएफएससी) में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का आमंत्रण दिया। उन्होंने बैंकिंग, फंड प्रबंधन, पुनर्बीमा, सतत वित्त, वैश्विक क्षमता केंद्र, विमान और जहाज लीजिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं बताईं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की चर्चाओं का फोकस वैश्विक और घरेलू व्यापक आर्थिक स्थिति, नीति प्राथमिकताओं तथा निवेश सहयोग को गहरा करने पर रहा। भारत ने चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों में भी उल्लेखनीय आर्थिक मजबूती दिखाई है और दोनों अर्थव्यवस्थाएं कई क्षेत्रों में एक-दूसरे की पूरक हैं। यह साझेदारी दीर्घकालिक आर्थिक विकास, वित्तीय नवाचार और निवेश विस्तार का आधार बन सकती है। (इनपुट-एजेंसी)

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