देश में मौसमी इन्फ्लूएंजा और श्वसन संबंधी बीमारियों की स्थिति पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की गहन निगरानी

सर्दियों में फैलने वाले इन्फ्लूएंजा को रोकने के लिए की गई तैयारियों की समीक्षा के उद्देश्य से केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। यह बैठक कर्तव्य भवन-1 में संपन्न हुई। बैठक के दौरान सचिव (स्वास्थ्य) ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि भारत में आमतौर पर इन्फ्लूएंजा के दो मौसमी चरम होते हैं- अगस्त से अक्टूबर (मानसून चरम) और जनवरी से मार्च (शीतकालीन चरम)। वर्ष 2014-15 में मौसमी इन्फ्लूएंजा के मामलों में हुई उल्लेखनीय वृद्धि का उल्लेख करते हुए नड्डा ने वर्तमान स्थिति पर विस्तृत अपडेट लिया और पूछा कि क्या मौजूदा वायरस स्ट्रेन में पूर्व के रुझानों से कोई अंतर देखा जा रहा है।

भारत में भी इन्फ्लूएंजा की गतिविधि कम बनी हुई है और किसी प्रकार की असामान्य वृद्धि के संकेत नहीं मिले हैं

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) और एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि वैश्विक स्तर पर और भारत में भी इन्फ्लूएंजा की गतिविधि कम बनी हुई है। निगरानी से यह पुष्टि होती है कि परिसंचारी प्रमुख स्ट्रेन सामान्य मौसमी प्रकार- H3N2 और इन्फ्लूएंजा-बी (विक्टोरिया)- ही हैं, जबकि H1N1 का अनुपात बेहद कम है। अधिकारियों ने मंत्री को लगभग वास्तविक समय में काम करने वाले निगरानी तंत्रों के बारे में भी जानकारी दी, जिनमें आईएलआई (इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी) और एसएआरआई (गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण) का आईडीएसपी नेटवर्क, मीडिया स्कैनिंग के माध्यम से एआई आधारित घटना-आधारित निगरानी तथा श्वसन रोगजनकों के लिए आईसीएमआर की प्रहरी निगरानी शामिल हैं। सभी प्रणालियों के अनुसार इन्फ्लूएंजा मामलों में किसी प्रकार की असामान्य वृद्धि के संकेत नहीं मिले हैं।

केंद्र इस महीने के अंत में इन्फ्लूएंजा पर दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर का आयोजन करेगा

एनसीडीसी के निदेशक प्रो. (डॉ.) रंजन दास ने बताया कि केंद्र इस महीने के अंत में इन्फ्लूएंजा पर दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर का आयोजन करेगा, जिसमें केंद्रीय मंत्रालयों, विभिन्न विभागों और राज्य सरकारों को शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य इन्फ्लूएंजा संबंधी तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करना और आगे की रणनीति तैयार करना है।

स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित रूप से मॉक-ड्रिल आयोजित करने के निर्देश

मंत्री नड्डा ने अब तक की तैयारियों की सराहना की और निर्देश दिया कि सभी राज्यों के नोडल अधिकारियों के साथ इन्फ्लूएंजा तैयारियों की समीक्षा की जाए तथा केंद्र द्वारा संचालित सभी अस्पतालों में पूर्ण तैयारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सभी जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में तैयारियों की समीक्षा अगले एक पखवाड़े के भीतर पूरी कर ली जाए। इसके अलावा, नड्डा ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को परामर्श जारी करने तथा स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित रूप से मॉक-ड्रिल आयोजित करने के निर्देश दिए। बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) डॉ. सुनीता शर्मा, संयुक्त सचिव (लोक स्वास्थ्य) वंदना जैन, एनसीडीसी के निदेशक प्रो. (डॉ.) रंजन दास तथा आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ और आईडीएसपी के विशेषज्ञ उपस्थित रहे। (इनपुट-आईएएनएस)