उत्तर प्रदेश का सुरहाताल बना भारत का 100वां रामसर स्थल, पीएम मोदी ने जताई खुशी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने रामसर स्थलों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उत्तर प्रदेश के बलिया स्थित जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहाताल) को देश के 100वें रामसर स्थल के रूप में मान्यता मिली है।

यह आर्द्रभूमि पक्षी जैव विविधता से समृद्ध

सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आर्द्रभूमि पक्षी जैव विविधता से समृद्ध है और यहां बड़ी संख्या में प्रवासी तथा स्थानीय पक्षी प्रजातियां आती हैं।

उन्होंने कहा, “रामसर स्थलों के मामले में यह एक शतकीय उपलब्धि है। मुझे खुशी है कि उत्तर प्रदेश के बलिया स्थित जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार (सुरहा ताल) को भारत का 100वां रामसर स्थल घोषित किया गया है। यह आर्द्रभूमि पक्षी जैव विविधता से भरपूर है और अनेक प्रवासी तथा स्थानीय पक्षियों का प्रमुख आवास है।”

आर्द्रभूमियों के संरक्षण के प्रति भारत प्रतिबद्ध

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि प्राकृतिक पर्यावरण और विशेष रूप से आर्द्रभूमियों के संरक्षण के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में समुदायों की भागीदारी, विज्ञान, नवाचार और जन-जागरूकता के माध्यम से आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के प्रयासों को और मजबूत किया गया है। ये प्रयास जैव विविधता के संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य सुनिश्चित करने में मदद कर रहे हैं।

“एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” पर्यावरण संरक्षण का आधार

इससे पहले विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने स्वच्छ, हरित और सतत भविष्य के निर्माण के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” के सिद्धांत और मिशन लाइफ (LiFE) की भावना को पर्यावरण संरक्षण का आधार बताया।

हर वर्ष 5 जून को मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और पृथ्वी की सुरक्षा के लिए सामूहिक कार्रवाई को प्रोत्साहित करने का वैश्विक अभियान है। इसका नेतृत्व संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम  (यूएनईपी) करता है।

विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत 1972 में यूनाइटेड नेशंस कॉन्फ्रेंस ऑन द ह्यूमन पर्यावरण के बाद हुई थी। संयुक्त राष्ट्र ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में घोषित किया और इसका पहला आयोजन 1973 में किया गया।

यह दिवस जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जैव विविधता में कमी और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण जैसी चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करता है तथा लोगों, समुदायों, व्यवसायों और सरकारों को सतत जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है। (इनपुट-आईएएनएस)