उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन सेशेल्स रवाना, नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में होंगे शामिल

भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन आज रविवार को सेशेल्स के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए रवाना हुए। यह यात्रा भारत और सेशेल्स के बीच गहरे, ऐतिहासिक और सहयोगपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति हर्मिनी को भारत की ओर से बधाई देंगे और दोनों देशों के बीच पुराने और भरोसेमंद संबंधों को दोहराएंगे। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत-सेशेल्स द्विपक्षीय संबंधों को और आगे बढ़ाते हुए उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन सेशेल्स गणराज्य के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए रवाना हुए हैं।”

विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी अपने बयान में कहा था कि “सेशेल्स भारत के विजन महासागर और ग्लोबल साउथ के प्रति हमारी प्रतिबद्धता के तहत एक प्रमुख साझेदार है। यह यात्रा सेशेल्स के साथ भारत की साझेदारी को और मजबूत और विस्तारित करने की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”

भारत और सेशेल्स के बीच का संबंध वर्षों पुराना है। वर्ष 1770 में जब पांच भारतीय बागान श्रमिकों के रूप में सात अफ्रीकी दासों और 15 फ्रांसीसी उपनिवेशवादियों के साथ सेशेल्स पहुंचे थे, तभी से भारतीय समुदाय का उस देश में योगदान शुरू हुआ। भारत-सेशेल्स के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध वर्ष 1976 में स्थापित हुए। 29 जून 1976 को जब सेशेल्स को स्वतंत्रता मिली थी, उस समय भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस नीलगिरि की टुकड़ी ने सेशेल्स के स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लिया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा और विकास साझेदारी के क्षेत्र में निरंतर सहयोग बढ़ा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च 2015 में सेशेल्स की ऐतिहासिक यात्रा की थी। यह 34 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा थी। इस दौरान दोनों देशों के बीच चार महत्वपूर्ण समझौते हुए थे। इनमें तटीय निगरानी रडार प्रणाली (सीआरएस) परियोजना का उद्घाटन, सेशेल्स को दूसरा डोर्नियर विमान उपहार में देने की घोषणा और सेशेल्स के नागरिकों को भारत यात्रा के लिए तीन महीने का निशुल्क वीजा देने जैसे निर्णय शामिल थे। उपराष्ट्रपति का यह दौरा भारत की “सागर नीति” यानी Security and Growth for All in the Region के तहत हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग और सामरिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।- (IANS)

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