भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि “आंतरिक शांति ही बाहरी सौहार्द का वास्तविक आधार है।” उपराष्ट्रपति आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के 45वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। बेंगलुरु में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु, स्वयंसेवक और आध्यात्मिक साधकों ने भाग लिया।
उपराष्ट्रपति का मुख्य संदेश
समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया तनाव, संघर्ष और मानसिक अस्थिरता से जूझ रही है। ऐसे में आध्यात्मिक मूल्यों, योग, ध्यान और आत्मिक संतुलन का महत्व और बढ़ गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज में स्थायी शांति और भाईचारा तभी संभव है, जब हर व्यक्ति भीतर से शांत और संतुलित और सकारात्मक हो।
उपराष्ट्रपति ने आर्ट ऑफ लिविंग की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र “वसुधैव कुटुंबकम्” को वैश्विक पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता और प्राचीन भारतीय परंपराएं एक-दूसरे की विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।
विशेष आयोजन
समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में विशेष स्मारक डाक टिकट जारी किया। इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर, संस्था के वरिष्ठ सदस्य और देश-विदेश से आए गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विश्व शांति, मानसिक स्वास्थ्य, युवा जागरूकता और सामाजिक सेवा जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। समारोह का समापन सामूहिक ध्यान, भजन और विश्व शांति प्रार्थना के साथ हुआ, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया। आर्ट ऑफ लिविंग संस्था योग, ध्यान, प्राणायाम और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से विश्वभर में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य कर रही है। (इनपुट-एजेंसी)


