नदी जोड़ो परियोजनाओं में धन नहीं, सोच सबसे बड़ी चुनौती: उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को कहा कि देश में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नदियों को जोड़ने की परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन परियोजनाओं में धन की कमी सबसे बड़ी बाधा नहीं है, बल्कि लोगों की सोच और राजनीतिक कारण सबसे बड़ी चुनौती हैं।

उपराष्ट्रपति भवन में जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान राधाकृष्णन ने कहा, “नदी जोड़ो परियोजनाओं को लागू करने में धन की कमी बड़ी समस्या नहीं है, बल्कि सोच और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी अधिक चुनौतीपूर्ण है।”

मुख्य बातें

– राष्ट्रीय हित में पानी के बेहतर प्रबंधन के लिए दूरदर्शी और सहयोगपूर्ण दृष्टिकोण की जरूरत पर जोर।
– ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान की सराहना की। अभियान के दूसरे चरण में 1.55 करोड़ से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाई या दर्ज की गई हैं, जो लक्ष्य से कहीं अधिक हैं।
– केन-बेतवा लिंक, पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक और गोदावरी-कावेरी लिंक जैसी प्रमुख नदी जोड़ो परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि नदियों को जोड़ने से जल संकट कम होगा, सूखे से निपटने में मदद मिलेगी, सिंचाई क्षेत्र बढ़ेगा और देश के विभिन्न हिस्सों में संतुलित विकास संभव होगा।

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सुझाव और पुरानी प्रतिबद्धता

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने केन-बेतवा जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर वृत्तचित्र और स्थायी रिकॉर्ड तैयार करने का सुझाव दिया, ताकि आने वाली पीढ़ियां इन राष्ट्र निर्माण के कार्यों पर गर्व कर सकें। उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने पहले भी नदी जोड़ो अभियान के समर्थन में पदयात्रा की थी।

बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल और राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी भी उपस्थित रहे। दोनों ने उपराष्ट्रपति को सितंबर 2026 में होने वाले ‘इंडिया इंटरनेशनल वॉटर वीक’ में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया। यह बैठक जल संरक्षण, नदी जोड़ो परियोजनाओं और भूजल संवर्धन को राष्ट्रीय प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। (इनपुट-एजेंसी)

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