उपराष्ट्रपति ने जीकेएनएम कॉलेज ऑफ नर्सिंग का किया उद्घाटन, ‘विकसित भारत 2047’ के लिए मजबूत हेल्थकेयर कार्यबल पर दिया जोर

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को तमिलनाडु के कोयंबटूर में जीकेएनएम ग्रुप कॉलेज ऑफ नर्सिंग का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कुशल, संवेदनशील और सेवा-भाव से प्रेरित हेल्थकेयर कार्यबल तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा एक विकसित एवं स्वस्थ राष्ट्र की आधारशिला हैं।

हेल्थकेयर और शिक्षा को बताया विकास की नींव

सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि देश को विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने, प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को प्रोत्साहित करने और समर्पित स्वास्थ्यकर्मियों को तैयार करने की दिशा में सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने जी. कुप्पुस्वामी नायडू चैरिटेबल ट्रस्ट के स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से किए जा रहे योगदान की सराहना की।

नर्सों की करुणा भी उपचार का अहम हिस्सा

नर्सिंग पेशे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि नर्सें केवल मरीजों की देखभाल करने वाली नहीं होतीं, बल्कि वे उन्हें सुरक्षा और भरोसे का एहसास भी कराती हैं। उन्होंने कहा, “दवाओं के साथ-साथ करुणा और संवेदनशीलता भी मरीज के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।” उन्होंने नर्सिंग छात्रों से अपने दायित्वों का निर्वहन समर्पण, संवेदना और पेशेवर गरिमा के साथ करने का आह्वान किया।

आयुष्मान भारत की सराहना

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना ने देश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच को व्यापक रूप से बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत लगभग 44 करोड़ लोगों को पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवरेज उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण और वरिष्ठ नागरिकों के लिए चलाई जा रही पहलों का भी उल्लेख किया।

प्रिवेंटिव हेल्थकेयर और पोषण पर जोर

उन्होंने महिलाओं और बच्चों में एनीमिया समाप्त करने, सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने तथा बचपन से किशोरावस्था तक बेहतर पोषण उपलब्ध कराने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बीमारी के इलाज से अधिक महत्वपूर्ण उसकी रोकथाम है।

अंग और नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील

उपराष्ट्रपति ने लोगों से अंगदान और नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील करते हुए इसे मानवता की सेवा का श्रेष्ठ कार्य बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास कई लोगों को नया जीवन और नई उम्मीद दे सकते हैं।

जीकेएनएम समूह के योगदान की सराहना

सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि वर्ष 1952 में 50 बिस्तरों वाले अस्पताल से शुरू हुई जीकेएनएम समूह की यात्रा आज 750 बिस्तरों वाले मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंच चुकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि नया नर्सिंग कॉलेज भविष्य में देश को कुशल और संवेदनशील स्वास्थ्य पेशेवर उपलब्ध कराएगा।

मेडिकल कॉलेज शुरू करने की जताई उम्मीद

उपराष्ट्रपति ने जी. कुप्पुस्वामी नायडू चैरिटेबल ट्रस्ट से भविष्य में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की भी उम्मीद जताई, ताकि समाज की सेवा के लिए समर्पित डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ तैयार किए जा सकें। इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, कुप्पुस्वामी नायडू चैरिटी ट्रस्ट फॉर एजुकेशन एंड मेडिकल रिलीफ के अध्यक्ष आर. गोपीनाथ तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। (इनपुट: पीआईबी)