उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को तंजावुर स्थित शास्त्र डीम्ड विश्वविद्यालय के रूबी और रजत जयंती समापन समारोह में भाग लिया और विश्वविद्यालय को शैक्षणिक उत्कृष्टता तथा राष्ट्रीय विकास में योगदान के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की 40वीं और 25वीं वर्षगांठ उसकी पिछली उपलब्धियों, वर्तमान प्रभाव और भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने की आकांक्षा को दर्शाती है।
शास्त्र विश्वविद्यालय के योगदान की सराहना
राधाकृष्णन ने शास्त्र विश्वविद्यालय को तमिलनाडु के अग्रणी उच्च शिक्षा संस्थानों में से एक बताते हुए राष्ट्रीय विकास में उसके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
एनईपी 2020 को बताया मार्गदर्शक स्तंभ
उपराष्ट्रपति ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों को परिवर्तनकारी और प्रगतिशील बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 केजी कक्षा से लेकर पीएचडी तक सभी स्तरों पर शैक्षिक प्रगति का मार्गदर्शक स्तंभ है। उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ), प्रधानमंत्री रिसर्च फैलोशिप (पीएमआरएफ), पीएम-विद्यालक्ष्मी और बहु-प्रवेश एवं बहु-निकास जैसी पहल उच्च शिक्षा के ढांचे को मजबूत कर रही हैं।
निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली सरकार की प्राथमिकता
राधाकृष्णन ने हाल में पारित लोक परीक्षा (अनुचित साधन रोकथाम) संशोधन विधेयक का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षा प्रणालियों को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि यह भारत के युवाओं के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
2035 तक उच्च शिक्षा में 50% जीईआर का भरोसा
उपराष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि देश में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) मौजूदा 30% से बढ़कर वर्ष 2035 तक 50% के लक्ष्य तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार विभिन्न उपायों के माध्यम से ऐसा आत्मनिर्भर पारितंत्र तैयार कर रही है, जो विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के जरिए सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने के साथ देश की तकनीकी क्षमताओं को भी मजबूत करेगा।
विद्यार्थियों से सोशल मीडिया सीमित करने की अपील
राधाकृष्णन ने विद्यार्थियों को समय के महत्व का संदेश देते हुए कहा कि युवाओं के लिए समय बेहद मूल्यवान है। उन्होंने विद्यार्थियों से सोशल मीडिया का उपयोग सीमित करने और नवाचार तथा निरंतर कौशल उन्नयन पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों से मादक पदार्थों से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की।
छह नई योजनाओं का शुभारंभ
उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर शास्त्र विश्वविद्यालय की छह नई योजनाओं का शुभारंभ किया। इनमें लचीली और एकीकृत सुरक्षित प्रौद्योगिकियों के लिए टाटा कम्युनिकेशंस केंद्र, एकीकृत एआई ढांचा, अनुसंधान और अंतर्राष्ट्रीयकरण के माध्यम से शैक्षणिक पहल ‘गतिशीलता-शास्त्र मैत्री’, संकाय एवं शोधार्थियों के क्षमता विकास के लिए ‘शास्त्र शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार विकास संवर्धन कोष’, उच्च शिक्षा में प्रौद्योगिकी एवं नवाचार आधारित शिक्षण प्रणालियों के लिए डिजिटल संसाधन ‘दृष्टि’ और प्रोत्साहन, निष्ठा एवं सहभागिता के लिए ‘शास्त्र-क्लब सदस्यता-स्माइल’ शामिल हैं।
भविष्य की प्रगति का आधार बनेंगी योजनाएं
राधाकृष्णन ने कहा कि विश्वविद्यालय के रूबी और रजत जयंती समारोह के अवसर पर शुरू की गई छह नई योजनाएं शास्त्र विश्वविद्यालय की भविष्य की प्रगति का आधार बनेंगी। उन्होंने विश्वविद्यालय को इन योजनाओं के उद्देश्यपूर्ण लक्ष्यों को हासिल करने में सफलता की शुभकामनाएं दीं।
साइबर सुरक्षा में टाटा कम्युनिकेशंस के साथ साझेदारी
उपराष्ट्रपति ने साइबर सुरक्षा और नेटवर्किंग के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शास्त्र विश्वविद्यालय और टाटा कम्युनिकेशंस के बीच हुए समझौते की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी भारत के संप्रभु विकास के लिए मजबूत और भरोसेमंद सुरक्षा ढांचा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
विकसित भारत-2047 की दिशा से जुड़ी पहल
राधाकृष्णन ने कहा कि विश्वविद्यालय की ये पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। इनमें बुनियादी ढांचा विकास, शिक्षकों और विद्यार्थियों की क्षमता निर्माण, अनुसंधान, नवाचार एवं उद्यमिता, सामाजिक जुड़ाव तथा उद्योग संगठनों के साथ सहयोग जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
2047 तक ज्ञान और उत्कृष्टता का केंद्र बनने की उम्मीद
उपराष्ट्रपति ने शास्त्र विश्वविद्यालय के सभी प्रयासों में निरंतर सफलता की कामना की। उन्होंने विश्वास जताया कि विश्वविद्यालय ज्ञान और उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में और अधिक विकसित होगा तथा 2047 में विकसित भारत के लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
राज्यपाल समेत कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में तमिलनाडु और केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, शास्त्र विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. आर. सेथुरमन, कुलपति प्रो. एस. वैद्यसुब्रमण्यम, डीन प्रो. एस. स्वामीनाथन और रजिस्ट्रार प्रो. आर. चंद्रमौली समेत संकाय सदस्य, अभिभावक और विद्यार्थी मौजूद रहे। (इनपुट: पीआईबी)


