वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज सोमवार को कहा कि भारत में हर वैश्विक चुनौती का सामना करने की ताकत है। इसके लिए देशवासियों को स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत पर भरोसा करना होगा। उन्होंने व्यवसायियों से अपील की कि वे ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को प्राथमिकता दें और आयात पर निर्भरता कम करें।
गोयल नई दिल्ली में आयोजित 56वें ईईपीसी इंडिया नेशनल अवार्ड्स कार्यक्रम के दौरान यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि कई देश निर्यात पर पाबंदियां लगा रहे हैं, जिससे भारत की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। ऐसे में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सभी को कदम बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि भारत का इंजीनियरिंग निर्यात 1955 में 10 मिलियन डॉलर था, जो अब बढ़कर 116 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है और भविष्य में इसमें और तेजी की संभावना है। गोयल ने एमएसएमई सेक्टर को व्यापार और व्यवसाय की रीढ़ बताते हुए कहा कि देश का आत्मविश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने सरकार की “जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट” नीति पर जोर दिया और कहा कि भारत गुणवत्ता और स्थिरता के मामले में प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत स्थिरता प्रयासों में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है और COP21 प्रतिबद्धताओं के तहत लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पांच नाजुक (Fragile Five) देशों की सूची से निकलकर आज दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों से भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और हाल की तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रही, जिसे उन्होंने विश्व रिकॉर्ड बताया।
गोयल ने कहा कि जीएसटी दरों में कटौती और सुधारों से घरेलू मांग में वृद्धि हुई है और इससे रोजगार व आय के नए अवसर बने हैं। उन्होंने यह भी जोर दिया कि कम जीएसटी दरों का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए ताकि समावेशी विकास संभव हो सके। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भी मौजूद रहीं। उन्होंने भारत के इंजीनियरिंग निर्यात की उपलब्धियों की सराहना की और सभी हितधारकों से अपील की कि वे वैश्विक व्यापार में भारत की भूमिका को और मजबूत करें।


