विद्यांजलि ने देश भर में लगभग 8.5 लाख स्कूलों और 5 लाख से अधिक स्वयंसेवकों को अपने साथ जोड़ा : जयंत चौधरी

कौशल विकास और शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने संसद को बताया कि विद्यांजलि ने सितंबर 2021 में शुरू होने के बाद से देश भर में लगभग 8.5 लाख स्कूलों और 5 लाख से अधिक स्वयंसेवकों को अपने साथ जोड़ा है। इस पहल का उद्देश्य सामुदायिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से सरकारी विद्यालयों को सशक्त बनाना है, ताकि विद्यार्थियों के समग्र विकास व बेहतर शिक्षण परिणामों के लिए अतिरिक्त सहयोग सुनिश्चित किया जा सके।

कल गुरुवार को राज्यसभा में जयंत चौधरी ने विद्यांजलि कार्यक्रम के कार्यान्वयन से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर दिया। उन्होंने सदन को इस पहल के तहत हासिल की गई प्रगति के बारे में जानकारी दी। चौधरी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य सामुदायिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से सरकारी विद्यालयों को सशक्त बनाना है, ताकि विद्यार्थियों के समग्र विकास व बेहतर शिक्षण परिणामों के लिए अतिरिक्त सहयोग सुनिश्चित किया जा सके।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप सितंबर 2021 में शुरू की गई विद्यांजलि पहल का उद्देश्य संरचित सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सरकारी और सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालयों को सशक्त बनाना है। यह मंच स्वयंसेवकों, पूर्व विद्यार्थियों, संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों और सीएसआर भागीदारों को उनकी पहचान की गई आवश्यकताओं के आधार पर सीधे विद्यालयों से जोड़ता है।

उन्होंने बताया कि यह मंच विषयगत मार्गदर्शन, करियर परामर्श, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कोडिंग जैसे उभरते क्षेत्रों पर कार्यशालाएं आयोजित करने के साथ ही विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए सहायता प्रदान करता है। यह खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के अलावा शिक्षण सामग्री, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी सुविधाएं, प्रयोगशालाएं, स्वच्छता अवसंरचना व नवीकरणीय ऊर्जा समाधान उपलब्ध कराने जैसे विभिन्न सेवाओं, गतिविधियों तथा संसाधनों के रूप में योगदान को सक्षम बनाता है। अब तक 56,734 से अधिक सेवा गतिविधियां और 35,695 संपत्ति योगदान पूरे किए जा चुके हैं, जिनसे देश भर में 2 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को लाभ हुआ है।

शिक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि विद्यांजलि ने समग्र शिक्षा के तहत सरकार के प्रयासों को पूरक बनाते हुए शिक्षण वातावरण को बेहतर बनाने और विद्यालयी संसाधनों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

जयंत चौधरी ने बताया कि यह पहल एक संरचित डिजिटल ढांचे के माध्यम से संचालित होती है, जो अनुमोदन, निगरानी और प्रतिक्रिया तंत्र को सुनिश्चित करता है। राज्य डैशबोर्ड के माध्यम से प्रगति की नियमित समीक्षा करते हैं और विद्यालय स्वयंसेवी योगदानों का सत्यापन करते हैं, जिससे पारदर्शिता एवं जवाबदेही को बढ़ावा मिलता है। 

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