वीज़ा-ऑन-अराइवल प्रावधान से भारत में मेडिकल ट्रैवल को मिलेगा बढ़ावा: पीयूष गोयल

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि भारत में वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा लागू होने से मेडिकल ट्रैवल को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने कहा कि ‘हील इन इंडिया’ पहल को सफल बनाने के लिए आधुनिक चिकित्सा को आयुर्वेद और समग्र वेलनेस की परंपराओं के साथ जोड़ना आवश्यक है, जिससे भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा। गोयल सीआईआई के 22वें वार्षिक हेल्थ समिट को संबोधित कर रहे थे।

मंत्री ने कहा कि भारत आज विश्वस्तरीय गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं का वैश्विक मानक बनने की दहलीज़ पर खड़ा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार और उद्योग जगत को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने बताया कि बीते दशक में मेडिकल कॉलेजों की संख्या दोगुनी हुई है और आने वाले पांच वर्षों में मेडिकल सीटों में बड़े पैमाने पर वृद्धि की योजना है।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी के लिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करना है। “स्वच्छता पैड जैसी बुनियादी सुविधाएँ नाममात्र कीमत पर उपलब्ध कराना हमारी समावेशी स्वास्थ्य नीति का हिस्सा है,” उन्होंने जोड़ा।

गोयल ने अस्पतालों से आग्रह किया कि वे उच्च गुणवत्ता वाले नर्सिंग प्रोफेशनल्स की संख्या में कम से कम एक लाख की वृद्धि के लिए मिलकर प्रयास करें, जिससे घरेलू जरूरतों के साथ-साथ मेडिकल टूरिज़्म की मांग भी पूरी हो सके।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि आयुर्वेद भारत की समग्र चिकित्सा व्यवस्था का मुख्य स्तंभ है, और अस्पतालों को पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक उपचार पद्धतियों के साथ जोड़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि “वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद, डिटॉक्सिफिकेशन, योग और वेलनेस कार्यक्रमों की मांग तेजी से बढ़ रही है।”

सीआईआई हेल्थकेयर काउंसिल के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहन ने कहा कि भारत के पास मेडिकल ट्रैवल का विश्वस्तरीय केंद्र बनने की पूरी क्षमता है। अपोलो हॉस्पिटल्स की प्रबंध निदेशक सुनीता रेड्डी ने कहा कि यह न केवल मेडिकल टूरिज़्म को बढ़ावा देगा, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में नए रोजगार और अवसर भी सृजित करेगा।

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