मुंबई में आयोजित WAVES 2025 ने भारत को वैश्विक रचनात्मक अर्थव्यवस्था के केंद्र में मजबूत रूप से स्थापित किया। चार दिनों तक चले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों, रचनाकारों, स्टार्टअप्स, उद्योग जगत के अग्रणी विशेषज्ञों और निवेशकों ने भाग लिया। जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर और जियो वर्ल्ड गार्डन इस दौरान वैश्विक रचनात्मक ऊर्जा के संगम स्थल बने रहे।
यह आयोजन पारंपरिक सम्मेलन से आगे बढ़कर एक सक्रिय सहयोग मंच के रूप में सामने आया, जहां विचारों का आदान-प्रदान ही नहीं, बल्कि ठोस व्यावसायिक और नीतिगत परिणाम भी सामने आए। सम्मेलन के दौरान 800 करोड़ रुपये से अधिक के व्यावसायिक समझौते हुए। हजारों बी2बी बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें फिल्म, टेलीविजन, डिजिटल मीडिया, एनीमेशन, गेमिंग और एवीजीसी-एक्सआर जैसे क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाएं तलाश की गईं।
‘Create in India Challenge’ के माध्यम से देश-विदेश की नई प्रतिभाओं को वैश्विक मंच मिला। बड़ी संख्या में युवाओं ने अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए और चयनित प्रतिभागियों को अंतरराष्ट्रीय स्टूडियो, प्लेटफॉर्म और निवेशकों से सीधे संवाद का अवसर मिला। इससे भारत को एक उभरते वैश्विक कंटेंट हब के रूप में नई पहचान मिली।
सम्मेलन के दौरान ‘WAVES Declaration’ को 77 देशों का समर्थन मिला। इस घोषणा में नैतिक मीडिया व्यवस्था, डिजिटल समावेशन, सांस्कृतिक विविधता, बौद्धिक संपदा संरक्षण और नई तकनीकों, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, के जिम्मेदार उपयोग पर सहमति व्यक्त की गई। इससे यह संकेत मिला कि वैश्विक मीडिया परिदृश्य में भारत की भूमिका केवल मेजबान की नहीं, बल्कि नीति निर्माण में सक्रिय भागीदार की है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन समझौतों और पहलों को प्रभावी रूप से लागू किया गया, तो भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है। स्टार्टअप्स को निवेश और मेंटरशिप के अवसर मिलेंगे, सह-निर्माण परियोजनाओं से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुंच बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।
स्कूलों और कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित करने की दिशा में उठाए गए कदम आने वाले वर्षों में कुशल मानव संसाधन तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी वैश्विक मंच से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
WAVES 2025 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र अब केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक विकास और वैश्विक सहयोग का प्रमुख आधार बन चुका है। यह आयोजन भारत की रचनात्मक शक्ति, तकनीकी क्षमता और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हुआ है।


