विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के यूरोप क्षेत्रीय कार्यालय ने गुरुवार को हीट-हेल्थ एक्शन प्लान्स गाइडेंस का अद्यतन संस्करण जारी किया। इसका उद्देश्य सरकारों को भीषण गर्मी से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों से निपटने और प्रभावी सुरक्षा उपाय लागू करने के लिए वैज्ञानिक ढांचा उपलब्ध कराना है।
डब्ल्यूएचओ-यूरोप के अनुसार, नई गाइडलाइन में आठ प्रमुख तत्वों पर आधारित साक्ष्य-आधारित सिफारिशें शामिल हैं। इनमें स्थानीय स्तर पर हीट वार्निंग सिस्टम को मजबूत करना, संवेदनशील समूहों तक जोखिम संबंधी जानकारी पहुंचाना और गर्मी से बचाव के लिए प्रभावी संचार रणनीतियां विकसित करना शामिल है।
संगठन ने बताया कि 2008 में जारी पहली गाइडलाइन की तुलना में नए संस्करण में शोध और व्यावहारिक अनुभवों से प्राप्त नवीनतम निष्कर्षों को शामिल किया गया है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, अत्यधिक गर्मी के कारण हर वर्ष दुनिया भर में गर्मी से जुड़ी बीमारियों और समय से पहले होने वाली मौतों की संख्या बढ़ रही है। विशेष रूप से हृदय संबंधी रोग गर्मी के प्रभाव में अधिक गंभीर हो जाते हैं। वहीं, तेजी से बढ़ते शहरीकरण और बुजुर्गों तथा पहले से बीमार लोगों की बढ़ती संख्या के कारण लंबे समय तक चलने वाली गर्मी की लहरें सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन रही हैं।
डब्ल्यूएचओ के यूरोप क्षेत्रीय निदेशक हांस हेनरी पी. क्लूगे ने कहा, “यूरोप दुनिया के किसी भी अन्य महाद्वीप की तुलना में अधिक तेजी से गर्म हो रहा है। पिछले चार वर्षों में पूरे यूरोप में 2 लाख से अधिक लोगों की मौत गर्मी के कारण हुई है। सही व्यवस्था होने पर इन मौतों को रोका जा सकता है।”
उन्होंने कहा कि गर्मी एक “मूक हत्यारा” है, लेकिन इससे होने वाली मौतें अपरिहार्य नहीं हैं। नई गाइडलाइन सरकारों और प्रशासन को ऐसी तैयारी प्रणाली विकसित करने का स्पष्ट रोडमैप प्रदान करती है, जो लोगों की जान बचा सके।
क्लूगे ने कहा, “हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—गर्मी से होने वाली मौतों को शून्य तक लाना। हमारे पास ज्ञान है, हमारे पास रोडमैप है और मिलकर हम इसे हासिल कर सकते हैं।”
डब्ल्यूएचओ-यूरोप के आंकड़ों के अनुसार, यूरोप में अत्यधिक गर्मी से होने वाली अधिकांश समयपूर्व मौतें इटली में दर्ज की गई हैं, इसके बाद स्पेन, जर्मनी और ग्रीस का स्थान है। हालांकि प्रति 10 लाख आबादी पर सबसे अधिक मौतें ग्रीस में दर्ज की गईं।
जर्मनी के रॉबर्ट कोच इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में देश में गर्मी से संबंधित लगभग 2,500 मौतें दर्ज की गईं, जिनमें अधिकांश प्रभावित बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग थे।
-(इनपुटःएजेंसी)


