देश की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर अक्टूबर माह में बढ़कर 2.36% हो गई जो पिछले साल के इसी महीने में तुलना में अधिक है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने आज गुरुवार को यह जानकारी दी। थोक मंहगाई दर में वृद्धि का मुख्य वजहों में खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों काे बताया जा रहा है, विशेषकर सब्जियां जिनकी कीमतें मानसून वापसी में हुई देरी से फसलें प्रभावित हुईं हैं।
सितंबर में महंगाई दर 1.84% थी जबकि अक्टूबर में यह बढ़कर 2.36% हो गई। खाद्य पदार्थों की कीमतों में 13.57% की बढ़ोतरी ने इस महंगाई में मुख्य योगदान दिया। आलू और प्याज जैसी सब्जियों की कीमतों में भी भारी वृद्धि हुई, क्योंकि प्रतिकूल मौसम के कारण आपूर्ति में कमी आई। वहीं, विनिर्मित वस्तुओं की महंगाई दर 1.5% पर पहुंच गई, जो WPI का 64% से अधिक हिस्सा बनती है। दूसरी ओर, ईंधन और बिजली की कीमतों में गिरावट आई, और इस श्रेणी में महंगाई दर -5.79% रही।
इसी बीच, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर भी अक्टूबर में 6.21% पर पहुंच गई। यह पहली बार है जब खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ऊपरी सीमा 6% से अधिक हो गई है। यह वृद्धि मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल के कारण हुई, जहां सब्जियों की कीमतों में 42.18% की वृद्धि दर्ज की गई। इसका कारण फसल क्षति है जो मानसून की देरी से हुई और जिसने थोक मूल्य को भी प्रभावित किया।
RBI द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम
RBI के लक्ष्य से खुदरा महंगाई के पार हो जाने के बाद अब इस बात पर ध्यान केंद्रित हो गया है कि क्या केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीति में कोई बदलाव करेगा। RBI ने अपनी पिछले 10 बैठकों में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन हाल ही में अपनी नीति को ‘तटस्थ’ कर दिया है, जो पहले ‘वापसी की स्थिति’ में थी। इसने ब्याज दरों में कटौती की अटकलों को जन्म दिया है, हालांकि RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने चेतावनी दी कि अभी ब्याज दरों में कटौती करना बहुत जोखिम भरा होगा। RBI का लक्ष्य है कि खुदरा महंगाई दर को 4% तक लाया जाए इसके बाद ही आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती पर विचार किया जाएगा।


