“भारत में महिला और पुरुष 2025” रिपोर्ट जारी, लिंग समानता में सुधार के संकेत

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने 29 अप्रैल 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित “विकास के लिए डेटा” राष्ट्रीय विचार-विमर्श शिखर सम्मेलन के दौरान “भारत में महिला और पुरुष 2025: चयनित संकेतक और आंकड़े” शीर्षक से अपने प्रकाशन का 27वां संस्करण जारी किया।

व्यापक डेटा के साथ सामाजिक स्थिति का आकलन

इस प्रकाशन में जनसंख्या, शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक भागीदारी, निर्णय लेने की क्षमता और महिलाओं के विरुद्ध हिंसा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में महिला और पुरुषों की स्थिति का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। विभिन्न मंत्रालयों और संगठनों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में 50 प्रमुख संकेतकों का मेटाडेटा भी शामिल किया गया है, जिससे आंकड़ों की समझ और स्पष्टता बढ़ती है।

लिंग-विभाजित डेटा से नीतिगत सहायता

रिपोर्ट का उद्देश्य लिंग-विभाजित आंकड़ों के माध्यम से ग्रामीण-शहरी, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर विकास के रुझानों को समझना है। इससे नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं को लिंग-संवेदनशील नीतियां तैयार करने में मदद मिलेगी।

जन्म के समय लिंग अनुपात में सुधार

रिपोर्ट के अनुसार, जन्म के समय लिंग अनुपात 2017-19 में 904 से बढ़कर 2021-23 में 917 हो गया है। यह महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य और जीवित रहने की दर में सुधार का संकेत है।

शिशु मृत्यु दर में लगातार गिरावट

2008 से 2023 के बीच शिशु मृत्यु दर में लड़कों और लड़कियों दोनों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है, जो स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को दर्शाती है।

शिक्षा में लैंगिक समानता हासिल

प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक शिक्षा में महिला-पुरुष समानता प्राप्त हो चुकी है। वहीं उच्च शिक्षा में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात 2021-22 के 28.5 से बढ़कर 2022-23 में 30.2 हो गया, जबकि पुरुषों का यह आंकड़ा 28.3 से बढ़कर 28.9 पहुंचा।

रोजगार में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) में वृद्धि दर्ज की गई है। खासकर ग्रामीण महिलाओं में यह दर 2022 के 37.5% से बढ़कर 2025 में 45.9% हो गई, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है।

प्रबंधकीय पदों पर महिलाओं की तेज़ बढ़ोतरी

2017 से 2025 के बीच प्रबंधकीय पदों पर कार्यरत पुरुषों की संख्या में 73.80% वृद्धि हुई, जबकि महिलाओं की संख्या में 102.54% की वृद्धि दर्ज की गई, जो नेतृत्व भूमिकाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।

समावेशी विकास के लिए अहम दस्तावेज

यह रिपोर्ट समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसमें प्रस्तुत आंकड़े लिंग असमानताओं को समझने और उन्हें दूर करने के लिए ठोस आधार प्रदान करते हैं। (इनपुट: पीआईबी)