विश्व मधुमेह दिवस: क्या है डायबिटीज, क्यों युवाओं में बढ़ रहे इसके मामले

मधुमेह यानी डायबिटीज ऐसी समस्या है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक को प्रभावित कर रही है और साल दर साल डायबिटीज के मामले बढ़ते जाते रहे हैं।

मधुमेह के प्रसार को रोकने और उसके निदान के लिए हर साल 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस पूरी दुनिया में मनाया जाता है। मधुमेह को लेकर जागरूकता शहरी से लेकर ग्रामीण इलाकों में दी जाती है क्योंकि कुछ लोग इस समस्या को बीमारी नहीं मानते और कुछ लोगों को पता ही नहीं है कि वे इस बीमारी से पीड़ित हैं।

सबसे पहले विश्व मधुमेह दिवस साल 1991 में मनाया गया था। इसे अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह महासंघ और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मिलकर लोगों में मधुमेह के प्रति जागरूकता और निदान के लिए शुरू किया था। हर साल देश में मधुमेह के आंकड़े बढ़ रहे हैं, और साल 2025 तक विश्व भर में हर 3 में से 1 व्यक्ति को मधुमेह है और 4 में से 1 व्यक्ति को पता ही नहीं है कि वो प्रीडायबिटीज का शिकार है।

अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह महासंघ और विश्व स्वास्थ्य संगठन के डेटा की मानें तो वयस्क आबादी इस बीमारी से ज्यादा प्रभावित हो रही है। ज्यादा तनाव और खराब जीवनशैली की वजह से दुनिया भर में हर 9 में से 1 वयस्क इस बीमारी का शिकार है और 40 फीसदी युवाओं को पता ही नहीं कि वे इस बीमारी से जूझ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो 2025 तक दुनिया भर में लगभग 830 मिलियन लोगों को मधुमेह है और आगे भी ये आंकड़ा बढ़ने वाला है।

विश्व मधुमेह दिवस पर सबसे पहले ये जानते हैं कि मधुमेह क्या है। खाना खाने के बाद हमारा शरीर ग्लूकोज बनाता है, जो शरीर को ऊर्जा देने का काम करता है, लेकिन ग्लूकोज को ऊर्जा के लिए रक्त और कोशिकाओं तक पहुंचाने के लिए इंसुलिन हार्मोन की जरूरत पड़ती है। पैंक्रियाज इंसुलिन बनाने का काम करता है, और अगर ये ठीक तरीके से इंसुलिन नहीं बनाता है, तो ग्लूकोज की खपत कोशिकाओं तक अच्छे से नहीं पहुंच पाती है और रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। इस स्थिति को मधुमेह कहते हैं।

मधुमेह में टाइप 1 डायबिटीज और दूसरी टाइप 2 डायबिटीज सबसे ज्यादा देखी जाती है। गर्भावस्था के समय भी मधुमेह की समस्या हो सकती है। टाइप 2 डायबिटीज और गर्भवती होने के समय होने वाले मधुमेह को समय रहते काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन टाइप 1 डायबिटीज एक खतरनाक स्टेज है, जिसमें पैंक्रियाज इंसुलिन बनाना बिल्कुल बंद कर देता है। इस स्थिति में किडनी, आंखों और दिल पर दबाव बना रहता है। (इनपुट-आईएएनएस)

 

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