वर्ल्ड फूड इंडिया 2025 : पीएम मोदी बोले- 10 साल में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर, वैश्विक खाद्य सुरक्षा का केंद्र बना भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुरुवार को देश की राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित विश्व खाद्य भारत 2025 के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत के पास विविधता, मांग और बड़े पैमाने (Diversity, Demand, Scale) की तिहरी ताकत है, जो उसे दुनिया का सबसे आकर्षक निवेश गंतव्य बनाती है। इस कार्यक्रम में किसानों, उद्यमियों, निवेशकों, नवोन्मेषकों और उपभोक्ताओं ने हिस्सा लिया, जिसे प्रधानमंत्री ने “नए संपर्क, नए जुड़ाव और रचनात्मकता का मंच” बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं और अब “नए मध्यम वर्ग” का हिस्सा बने हैं। यह वर्ग सबसे ऊर्जावान और महत्वाकांक्षी है और इसकी आकांक्षाएं भारत के खाद्य उद्योग को नई दिशा दे रही हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है, जिसमें बड़ी संख्या में स्टार्टअप खाद्य और कृषि क्षेत्र में काम कर रहे हैं। एआई, ई-कॉमर्स, ड्रोन और मोबाइल ऐप्स जैसी तकनीकें इस सेक्टर को तेजी से बदल रही हैं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत वैश्विक खाद्य सुरक्षा में लगातार योगदान कर रहा है। देश आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है और वैश्विक आपूर्ति का 25% भारत से आता है। भारत मोटे अनाज (मिलेट्स) का भी सबसे बड़ा उत्पादक है और चावल व गेहूं उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत यह है कि जब भी वैश्विक स्तर पर फसल संकट या सप्लाई चेन में व्यवधान आता है, तब भी भारत अपनी जिम्मेदारी निभाता है।

उन्होंने छोटे किसानों को देश की ताकत बताया। उन्होंने कहा कि भारत के 85% से ज्यादा किसान छोटे और सीमांत हैं और अब वे बाजार में बड़ी ताकत बन रहे हैं। सरकार ने उनकी मदद के लिए 2014 से अब तक 10,000 किसान उत्पादक संगठन (FPOs) बनाए हैं। इन संगठनों के जरिए किसान अपने उत्पाद सीधे बाजार तक पहुंचा रहे हैं और ब्रांडेड प्रोडक्ट बना रहे हैं। आज 15,000 से ज्यादा एफपीओ उत्पाद ऑनलाइन उपलब्ध हैं और 1,100 से अधिक एफपीओ सालाना 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार कर “मिलियनेयर” बन चुके हैं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि माइक्रो फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को सरकार 800 करोड़ रुपये की सब्सिडी दे चुकी है और 26,000 से ज्यादा परियोजनाओं को 2,510 करोड़ रुपये के माइक्रो प्रोजेक्ट्स के तहत 770 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी। साथ ही, पीएलआई योजना, मेगा फूड पार्क और स्टोरेज इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से भारत की प्रोसेसिंग क्षमता 20 गुना बढ़ी है और प्रोसेस्ड फूड का निर्यात दोगुना हुआ है।

उन्होंने सहकारी समितियों (Cooperatives) की ताकत को भी रेखांकित किया और कहा कि इस साल अंतरराष्ट्रीय सहकारी वर्ष मनाया जा रहा है। भारत में सहकारी समितियाँ खासकर डेयरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई शक्ति दे रही हैं। इसके लिए सरकार ने अलग मंत्रालय और टैक्स सुधार किए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मत्स्य क्षेत्र में भी तेजी से विकास हुआ है। पिछले दस वर्षों में समुद्री उत्पादन और निर्यात में वृद्धि हुई है और इस क्षेत्र में लगभग 3 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। सरकार आधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट, कोल्ड चेन और स्मार्ट हार्बर विकसित कर रही है।

प्रधानमंत्री ने कृषि में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल का जिक्र करते हुए कहा कि खाद्य पदार्थों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए फूड इर्रेडिएशन तकनीक अपनाई जा रही है। उन्होंने जीएसटी सुधारों की चर्चा करते हुए बताया कि घी, मक्खन और दूध के डिब्बों पर अब केवल 5% जीएसटी है, जिससे किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ हो रहा है। 90% से अधिक प्रोसेस्ड फूड उत्पादों पर जीएसटी शून्य या 5% है।

उन्होंने बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग को समय की जरूरत बताया और कहा कि सरकार ने इस पर जीएसटी घटाकर 18% से 5% कर दिया है। प्रधानमंत्री ने उद्योग जगत से इसमें निवेश करने की अपील की। इस अवसर पर रूस के उप प्रधानमंत्री दिमित्री पत्रुशेव, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, रवीनीत सिंह और प्रतापराव जाधव सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि विश्व खाद्य भारत 2025 का आयोजन 25 से 28 सितंबर तक भारत मंडपम में हो रहा है, जिसमें 21 देशों और 150 अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया है। इसमें सीईओ राउंडटेबल्स, तकनीकी सत्र, प्रदर्शनी और बी2बी, बी2जी और जी2जी बैठकें होंगी। लगभग 1 लाख लोग इस आयोजन में भाग लेंगे।-(PIB)

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