WPI महंगाई मार्च में बढ़कर 3.88%: कच्चे तेल और गैस ने बढ़ाया दबाव

भारत में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर मार्च महीने में बढ़कर 3.88 प्रतिशत हो गई है, जो फरवरी में 2.13 प्रतिशत थी। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की कीमतों में इजाफे के कारण हुई है।

आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में WPI खाद्य महंगाई स्थिर रही और यह 1.85 प्रतिशत पर बनी रही। ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई में तेज उछाल देखा गया। मार्च में इस सेक्टर में महंगाई 4.13 प्रतिशत बढ़ी, जिसकी बड़ी वजह कच्चे तेल और गैस की कीमतों में 36.16 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही। हालांकि, बिजली की कीमतों में 5.07 प्रतिशत की गिरावट ने इस बढ़ोतरी को कुछ हद तक संतुलित किया।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस श्रेणी में महंगाई 0.88 प्रतिशत बढ़ी, जहां 22 में से 16 उत्पादों के दाम बढ़े, जबकि 6 में गिरावट आई। वहीं, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई भी मार्च में बढ़कर 3.4 प्रतिशत पर पहुंच गई।

खाद्य महंगाई की बात करें तो यह 3.87 प्रतिशत रही, जिसमें टमाटर और फूलगोभी जैसी सब्जियों के दाम बढ़ने का बड़ा योगदान रहा। हालांकि, प्याज, आलू और लहसुन की कीमतों में दो अंकों की गिरावट देखी गई। दालों के दाम भी घटे, जिसमें अरहर और चना प्रमुख रहे।

रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में सबसे ज्यादा महंगाई चांदी के आभूषण (148.61%) और सोने के आभूषण (45.92%) में दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसका सीधा असर महंगाई पर पड़ रहा है।

(इनपुट-आईएएनएस)