Year Ender 2025: देश को एकता के सूत्र में पिरोने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रयासों के लिए जाना जाएगा यह साल

भारत प्राचीन काल से ही एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र रहा है, जहां सभ्यता, आस्था और परंपराएं निरंतर एक-दूसरे से जुड़ी रही हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में पूरे वर्ष सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत से जुड़े कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। ऐसे में 2025 का साल भी इस मामले में काफी अहम रहा। इस साल न सिर्फ भव्य और दिव्य महाकुंभ का सफल आयोजन हुआ बल्कि  राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में पूरे देश में उत्सव का आयोजन किया गया। 

वर्ष 2025 के दौरान संस्कृति मंत्रालय की मुख्य पहल और उपलब्धियां इस प्रकार हैं:

वंदे मातरम’ के 150 वर्ष का राष्ट्रीय उत्सव

संस्कृति मंत्रालय ने 7 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” के 150 साल पूरे होने के उत्सव के उद्घाटन समारोह का आयोजन किया। माननीय प्रधानमंत्री ने मुख्य अतिथि के तौर पर इस अवसर की शोभा बढ़ाई। यह कार्यक्रम समूचे देश में 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक एक साल तक चलने वाले कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत रहा, जिसके तहत भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को प्रेरित करने वाली और आज भी राष्ट्रीय गौरव और एकता की भावना को जागृत करने वाली इस सदाबहार रचना के 150 साल पूरे होने का उत्सव मनाया जाएगा। मंत्रालय ने वेबसाइट https://vandemataram150.in/ पर एक खास मुहिम शुरु की है, जिसमें 1.60+ करोड़ भारतीय पहले ही वंदे मातरम का अपना गान रिकॉर्ड कर चुके हैं।

तिरंगे के प्रति भावनात्मक जुड़ाव को और प्रगाढ़ करते हुए हर घर तिरंगा 2025 अभियान का आयोजन

भारत का 79वां स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त, 2025 को “नया भारत” थीम के साथ मनाया गया, जिसमें विविध क्षेत्रों  में हुई प्रगति पर ज़ोर दिया गया और स्वतंत्रता सेनानियों की कोशिशों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर, पूरे देश में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान चलाया गया। संरक्षित स्मारकों पर निम्नलिखित गतिविधियाँ भी की गईं-

चरण I (2–8 अगस्त, 2025): तिरंगा रंगोली

चरण II (9– 12 अगस्त, 2025): सेल्फी बूथ बनाए गए, बैनरों का प्रदर्शन और तिरंगा यात्रा

चरण III (13–15 अगस्त, 2025): संरक्षित स्मारकों पर तिरंगा रोशनी और प्रोजेक्शन

संस्कृति मंत्रालय द्वारा इस वर्ष आयोजित हर घर तिरंगा अभियान अनूठा रहा। मंत्रालय ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के साथ साझेदारी कर स्वच्छता पर भी संयुक्त अभियान चलाया । इस वर्ष के अभियान में अर्थव्यवस्था के उपाय भी अपनाए गए, जिसके परिणामस्वरूप परिव्ययय 15% कम हुआ, जबकि कवरेज और सेल्फी अपलोड पिछले वर्ष के अभियान की तुलना में 50% अधिक रहे। यह सफलता पूरी सरकारी का समन्वित दृष्टिकोण अपनाने तथा राज्यों और राज्यों की संस्थाओं को भागीदारी के लिए प्रेरित करने के माध्यम से हासिल की गई। हर घर तिरंगा अभियान के अंतर्गत 12 अगस्त 2025 को भारत के स्वतंत्रता दिवस समारोह की शुरुआत के प्रतीक के तौर पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में बाइक रैली का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय ध्वज फहराते हजारों बाइकर्स की इस रैली में केंद्रीय मंत्री, दिल्ली सरकार के मंत्री तथा संसद सदस्य भी शामिल हुए।

गणतंत्र दिवस परेड में ‘जयति जय मम भारतम’

2025 की शुरुआत के बाद सबसे पहले गणतंत्र दिवस परेड 2025 में संस्कृति मंत्रालय द्वारा भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति ‘जयति जय मम भारतम’ (जेजेएमबी) पेश की गई, जिसमें भारत की समृद्ध जनजातीय और लोक विरासत का शानदार प्रदर्शन किया गया। 5,000 से अधिक कलाकारों ने ‘विकसित भारत’, ‘विरासत भी विकास भी’, ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ जैसी थीम को अंगीकार करते हुए युवा शक्ति, कलात्मक विरासत और महिला सशक्तिकरण को दर्शाने वाले 50 से अधिक लोक और जनजातीय नृत्य रूपों का प्रदर्शन किया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में ‘सबसे बड़े भारतीय लोक विविधता नृत्य’ के रूप में दर्ज इस प्रस्तुति ने भारत की अनेकता में एकता की भावना को शानदार वेशभूषा और सिंक्रोनाइज्ड कोरियोग्राफी के जरिए दिखाया

महाकुंभ 2025: कलाग्राम में 15,000 कलाकारों की सहभागिता

संस्कृति मंत्रालय ने प्रयागराज में महाकुंभ, सेक्टर-7 में 10.24 एकड़ क्षेत्र में (13 जनवरी से 26 फरवरी, 2025 तक) कलाग्राम स्थापित किया, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु भाग ले रहे थे। केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने 12 जनवरी 2025 को कलाग्राम का उद्घाटन किया। कलाग्राम ने देशभर के लगभग 15,000 प्रतिभागी कलाकारों और कारीगरों को 45 से अधिक दिनों तक नृत्य, संगीत, व्यंजन, कला और शिल्प आदि से संबंधित  भारत की विविध परंपराओं के प्रदर्शन का प्रभावी मंच प्रदान किया। इसने केवल आगंतुकों को ही इस आयोजन को देखने और इसमें सक्रिय भाग लेने का अनूठा अवसर प्रदान नहीं किया, बल्कि महाकुंभ में आने वाले लोगों को आर्थिक और सतत विकास को बढ़ावा देते हुए सामुदायिक संबंधों को मजबूत करने का भी अवसर प्रदान किया। इसके अलावा, इसने  हमारी ‘अनेकता में एकता’ की सुंदरता को सामने रखते हुए और “एक भारत श्रेष्ठ भारत” को संजोकर विभिन्न समुदायों के बीच सांस्कृतिक परंपराओं और प्रथाओं की सराहना के लिए अनुकूल वातावरण का भी निर्माण किया। महाकुंभ लोगो, 2025 की प्रोजेक्शन मैपिंग: केंद्र द्वारा संरक्षित विभिन्न  स्मारकों पर महाकुंभ का लोगो प्रस्तुत किया गया।

कलाग्राम की प्रमुख विशेषताएं

प्रवेश द्वार: 635 फीट चौड़ा और 54 फीट ऊंचा, जिसमें 12 ज्योतिर्लिंगों और भगवान शिव के हलाहल पान की कथा का चित्रण

  • अनुभूत मंडपम: गंगा के स्वर्ग से धरती पर अवतरण का 360° इमर्सिव अनुभव

  • अविरल शाश्वत कुंभ: ASI, NAI और IGNCA द्वारा डिजिटल प्रस्तुति

  • फूड जोन: प्रयागराज के स्थानीय व्यंजनों के साथ सभी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों के सात्विक व्यंजन

  • संस्कृति आंगन: पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री

काशी तमिल संगमम 3.0

तमिलनाडु और काशी के सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों का कीर्तिगान करते हुए काशी तमिल संगमम 3.0 का आयोजन वाराणसी में 15 से 24 फरवरी 2025 तक किया गया। 869 से ज़्यादा कलाकारों और 190 स्थानीय लोक और शास्त्रीय समूहों की प्रस्तुतियों के साथ, केटीएस 3.0 में लगभग 2 लाख लोगों ने भाग लिया, जिससे सांस्कृतिक और बौद्धिक रिश्ते मज़बूत हुए तथा एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को बढ़ावा मिला।

लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती

संस्कृति मंत्रालय ने 31 मई 2025 को मध्य प्रदेश सरकार के साथ मिलकर भोपाल के जंबूरी मैदान में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती भव्य रूप से मनाई। इस अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र  मोदी ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन को संबोधित किया और अहिल्याबाई की अमिट विरासत के प्रति सम्माान व्‍यक्त किया। प्रधानमंत्री ने उनके सम्मान में एक स्मादर  डाक टिकट और एक विशेष सिक्का भी जारी किया। इस उत्सव के तहत, माननीय प्रधानमंत्री ने विख्यासत कलाकार डॉ. जयमती कश्यप को जनजातीय, लोक और पारंपरिक कलाओं में उनके योगदान के लिए देवी अहिल्याबाई अवॉर्ड से सम्मानित किया। अपनी इस यात्रा के दौरान माननीय प्रधानमंत्री ने संस्कृति मंत्रालय द्वारा अहिल्याबाई होल्कर के जीवन और विरासत पर खास तौर पर आयोजित की गई एक प्रदर्शनी का भी अवलोकन  किया, और भारत की सांस्कृतिक विरासत को आकार देने में उनकी शानदार भूमिका को दर्शाने वाली एक लघु फिल्म देखी।

आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर ‘संविधान हत्या दिवस’

1975 में भारत में आपातकाल लागू होने के 50 साल पूरे होने पर संस्कृति मंत्रालय ने दिल्ली सरकार के साथ मिलकर 25 जून, 2025 को नई दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाया। यह दिन यह दिन लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के महत्व की याद दिलाता है।

चोल समुद्री अभियान की 1,000वीं वर्षगांठ

मंत्रालय ने चोल सम्राट राजेंद्र चोल प्रथम की जयंती के अवसर पर तमिलनाडु के गंगईकोंडा चोलपुरम में 23 से 27 जुलाई 2025 तक आदि तिरुवधिरई उत्सव का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में चोल के समुद्री अभियान की 1,000वीं सालगिरह भी मनाई गई, जो भारतीय नौसेना के इतिहास का एक उल्लेखनीय पड़ाव है। यह उत्सव तमिल आध्यात्मिक परंपराओं और शैव सिद्धांत के पहलुओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह 5 दिन का उत्सव यूनेस्को से मान्यता प्राप्त स्मारक गंगईकोंडा चोलीश्वरम मंदिर में आयोजित किया गया, जिसमें स्थानीय कलाकारों और स्थानीय लोगों ने बड़ी तादाद में भाग लिया। इस आयोजन के अवसर पर एक स्मारक सिक्का भी जारी किया गया। पीएम मोदी ने आयोजन के आखिरी दिन इसमें शिरकत की।

श्रील प्रभुपाद के 150वें आविर्भाव दिवस का स्मतरणोत्स व मनाया

गौड़ीय मिशन के संस्थाजपक श्रील प्रभुपाद के 150वें आविर्भाव दिवस के स्मिरणोत्स का समापन समारोह 28 फरवरी, 2025 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता की साइंस सिटी में आयोजित किया गया। माननीय उपराष्ट्रपति इस समापन समारोह में मुख्य अतिथि रहे। इस कार्यक्रम में श्रील प्रभुपाद के जीवन पर एक प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसमें उनके जीवन से जुड़ी वस्तुएँ और कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गईं।

तमिलनाडु में कंभ रामायण महोत्सव के शुभारंभ के साथ कंभ रामायण परंपरा फिर से शुरू

एक अन्यु महत्व पूर्ण घटनाक्रम, केंद्रीय संस्कृति मंत्री द्वारा 18 मार्च, 2025 को श्रीरंगम मंदिर में कंभ रामायण उत्सनव का उद्घाटन कर तमिलनाडु में कंभ रामायण की परंपरा को फिर से शुरू किया जाना रहा। इसके बाद 20 मंदिरों में कंभ रामायण की प्रस्तुति हुई, जिसका समापन 6 अप्रैल, 2025 को रामनवमी के दिन कंबन मेदु में ग्रैंड फिनाले के साथ हुआ। एक महीने का यह उत्सव अब हर साल मार्च में तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम मंदिर से शुरू होकर हर साल अप्रैल में कंबन मेदु में राम नवमी के उत्ससव और प्रस्तुीति के साथ सम्पन्न होगा।

मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में देश की 44वीं प्रविष्टि के रूप में शामिल

यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 47वें सत्र में वर्ष 2024-25 में भारत के आधिकारिक नामांकन, ‘देश के मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स’ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया। विशेषज्ञ समिति आईसीओएमओएस ने नकारात्मक रिपोर्ट दी थी। मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय के सहयोग से प्रभावी हस्तक्षेप किया और सदस्य देशों को भारत का समर्थन करने के लिए राज़ी किया। इसके साथ ही यह इस सम्माीन को प्राप्त करने वाली देश की 44वीं संपत्ति बन गई है। विश्व धरोहर स्थलों की सर्वाधिक संख्या के मामले में भारत विश्व स्तर पर छठे स्थान पर तथा एशिया प्रशांत क्षेत्र में दूसरे स्थान पर है।

प्राचीन पांडुलिपि धरोहर के संरक्षण, डिजिटलीकरण और प्रसार के प्रति समर्पित ‘ज्ञान भारतम’ नामक राष्ट्रव्यापी पहल शुरू

मंत्रालय ने ‘ज्ञान भारतम’ के तहत भारत की पांडुलिपि धरोहर के संरक्षण, डिजिटलीकरण और प्रसार के लिए एक अहम राष्ट्रीय पहल की है। 11-13 सितंबर, 2025 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में इसके शुभारंभ के अवसर पर “पांडुलिपि धरोहर के ज़रिए भारत की ज्ञान विरासत को वापस पाना” विषय पर पहली बार ज्ञान भारतम अंतरराष्ट्री य सम्मेालन में देश – विदेश से 1,100 से ज़्यादा लोग शामिल हुए। माननीय प्रधानमंत्री ने 12 सितंबर, 2025 को औपचारिक रूप से ज्ञान भारतम वेब पोर्टल लॉन्च किया, जिसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया कि भारत की ज्ञान परंपरा तीन स्तंभों – संरक्षण, नवाचार और संवर्धन एवं अनुकूलन पर आधारित है। सम्मेलन का समापन 13 सितंबर 2025 को दिल्ली घोषणा-पत्र के साथ हुआ, जिसमें ‘विकसित भारत 2047’ की भावना में भारत की पांडुलिपि धरोहर के संरक्षण और पुनरुत्थान के प्रति देश की प्रतिबद्धता की पुन: पुष्टि की गई।

सरदार पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक कार्यक्रम

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर, 2025) के अवसर पर सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में सिलसिलेवार शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। इस अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री मुख्य अतिथि रहे । माननीय प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक स्माएरक सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया। इस कार्यक्रम की खास बात “लोह पुरुष नमस्तुभ्यम” नाम की शानदार नृत्य  प्रस्तुति रही, जिसे संगीत नाटक अकादमी और संस्कृति मंत्रालय के तहत पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र ने क्यूरेट किया था,  इस प्रस्तुति में देश भर के 800 से ज्यादा कलाकारों ने हिस्सा लिया।

जनजातीय विरासत और उद्यमिता का संगम बना जनजातीय व्यापार कॉन्क्लेव 2025

साल 2025 में जनजातीय समुदायों की कला, संस्कृति और उद्यमिता को राष्ट्रीय मंच देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में जनजातीय व्यापार कॉन्क्लेव 2025 आयोजित किया गया। 12 नवंबर 2025 को यशोभूमि, द्वारका (नई दिल्ली) में हुए इस कॉन्क्लेव के सफल आयोजन में संस्कृति मंत्रालय की अहम भूमिका रही।

यह आयोजन जनजातीय गौरव वर्ष की भावना और विकसित भारत@2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप रहा, जिसमें देश के जनजातीय समुदायों की कलात्मक उत्कृष्टता, साहित्यिक विविधता और रचनात्मक उद्यमिता को सम्मान और पहचान दी गई। कॉन्क्लेव ने जनजातीय परंपराओं को आधुनिक बाजार और उद्यम के साथ जोड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान किया।

जनजातीय कार्य मंत्रालय, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से आयोजित यह कार्यक्रम भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर मनाए जा रहे जनजातीय गौरव वर्ष के दौरान एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ।

कॉन्क्लेव का एक प्रमुख आकर्षण संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित पैनल चर्चा रही, जिसका विषय था —
“जनजातीय विरासत से उद्यम: सतत उद्यमिता को बढ़ावा देना”
इस चर्चा में जनजातीय ज्ञान, पारंपरिक कौशल और सांस्कृतिक विरासत को रोजगार, आत्मनिर्भरता और सतत विकास से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।

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