प्रतिक्रिया | Wednesday, May 22, 2024

06/04/24 | 3:16 pm | World health day

दुनियाभर में ‘मेरा स्वास्थ्य, मेरा अधिकार’ थीम के साथ मनाया जा रहा है 74वां विश्व स्वास्थ्य दिवस

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा प्रतिवर्ष 07 अप्रैल को एक खास थीम के साथ ‘विश्व स्वास्थ्य दिवस’ मनाया जाता है। इस दिवस को मनाए जाने का प्रमुख उद्देश्य विश्व में प्रत्येक व्यक्ति को बीमारियों के प्रति और स्वास्थ्य को लेकर जागरूक करना है। पूरी दुनिया इस साल ‘मेरा स्वास्थ्य, मेरा अधिकार’ थीम के साथ 74वां विश्व स्वास्थ्य दिवस मना रही है।
यदि पिछले कुछ वर्षों की स्वास्थ्य दिवस की थीम पर नजर डालें तो 2023 का विषय था ‘सभी के लिए स्वास्थ्य’, 2022 में यह दिवस ‘हमारा ग्रह, हमारा स्वास्थ्य’, 2021 में ‘सभी के लिए एक निष्पक्ष, स्वस्थ दुनिया का निर्माण’, 2020 में ‘नर्सों और दाइयों का समर्थन करें’ तथा 2019 में ‘सार्वभौमिक स्वास्थ्य: हर कोई, हर जगह’ विषय के साथ मनाया गया था।

विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाए जाने की शुरुआत डब्ल्यूएचओ द्वारा 07 अप्रैल 1950 से शुरू किया गया था। डब्ल्यूएचओ की स्थापना के साथ ही 1948 में विश्व स्वास्थ्य दिवस की नींव भी रख दी गई । दरअसल उस समय लोगों की सेहत को बढ़ावा देने और उन्हें गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से दुनिया के कई देशों ने मिलकर दुनियाभर में ठोस कार्य करने की जरूरत पर बल दिया और आखिरकार विश्व स्वास्थ्य दिवस की नींव रखने के दो वर्ष बाद 1950 में पहली बार 07 अप्रैल को यह दिवस मनाया गया।

संयुक्त राष्ट्र का अहम हिस्सा ‘डब्ल्यूएचओ’ दुनिया के तमाम देशों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी सहयोग और मानक विकसित करने वाली संस्था है, जिसका प्रमुख कार्य विश्वभर में स्वास्थ्य समस्याओं पर नजर रखना और उन्हें सुलझाने में सहयोग करना है। इस संस्था के माध्यम से प्रयास किया जाता है कि दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक रूप से पूर्ण रूप से स्वस्थ रहे।

दुनियाभर में बढ़ रही है गैर-संचारी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां

हालांकि चिंता की स्थिति यह है कि पिछले कुछ दशकों में एक ओर जहां स्वास्थ्य क्षेत्र ने काफी प्रगति की है, वहीं कुछ वर्षों के भीतर एड्स, कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों के प्रकोप के साथ हृदय रोग, मधुमेह, क्षय रोग, मोटापा, तनाव जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी तेजी से बढ़ी हैं। ऐसे में स्वास्थ्य क्षेत्र की चुनौतियां निरन्तर बढ़ रही हैं। वैसे तो दुनिया के तमाम देश बीते कुछ दशकों से स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहे हैं लेकिन कोरोना काल के दौरान जब अमेरिका जैसे विकसित देश को भी बेबस अवस्था में देखा गया और वहां भी स्वास्थ्य कर्मियों के लिए जरूरी सामान की भारी कमी नजर आई, तब पूरी दुनिया को अहसास हुआ कि अभी भी जन-जन तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन स्वयं मानता है कि दुनिया की कम से कम आधी आबादी को आज भी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। विश्वभर में अरबों लोगों को स्वास्थ्य देखभाल हासिल नहीं होती। करोड़ों लोग ऐसे हैं, जिन्हें रोटी, कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत आवश्यकताओं तथा स्वास्थ्य देखभाल में से किसी एक को चुनने पर विवश होना पड़ता है।

दुनिया के 30 प्रतिशत आबादी के पास नहीं है बुनियादी स्वास्थ्य उपचार

यह बेहद चिंता का विषय है कि दुनिया की करीब 30 प्रतिशत आबादी के पास बुनियादी स्वास्थ्य उपचार तक पहुंच नहीं है और करीब 200 करोड़ लोग विनाशकारी अथवा खराब स्वास्थ्य देखभाल लागत का सामना कर रहे हैं, जिसमें काफी असमानताएं हैं, जो सबसे वंचित परिस्थितियों में लोगों को प्रभावित कर रही हैं। हालांकि स्वास्थ्य का अधिकार एक ऐसा मौलिक मानवाधिकार है, जिसके तहत प्रत्येक व्यक्ति को बगैर किसी वित्तीय बोझ के, जब भी जरूरत हो, स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच मिलनी चाहिए।

इनपुट – हिंदुस्थान समाचार

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आखरी अपडेट: 22nd May 2024