नई दिल्ली में 22 सितंबर 2026 को ओपेक-भारत ऊर्जा संवाद की सातवीं उच्च स्तरीय बैठक आयोजित हुई। बैठक की सह-अध्यक्षता पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और ओपेक के महासचिव हैथम अल घैस ने की। बैठक में तेल बाजार की स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और तेल उद्योग में पर्याप्त एवं समय पर निवेश की जरूरत पर चर्चा हुई।
तेल बाजार की स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर
बैठक में अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक ऊर्जा परिदृश्यों की समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने वैश्विक आर्थिक विस्तार और ऊर्जा मांग में वृद्धि में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी जोर दिया। इस दौरान उत्पादक और उपभोक्ता देशों के बीच निरंतर संवाद को वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता के लिए जरूरी बताया गया।
भारत-ओपेक संबंधों को बताया पारस्परिक रूप से लाभकारी
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत और ओपेक के बीच स्वाभाविक रूप से पूरक और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध हैं। उन्होंने भारत और ओपेक के बीच साझेदारी को मजबूत करने में ओपेक महासचिव के योगदान के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत ओपेक और उसके सदस्य देशों के साथ अपने दीर्घकालिक जुड़ाव को महत्व देता है, जिसने प्रमुख ऊर्जा मुद्दों पर आपसी समझ और सहयोग को मजबूत करने में योगदान दिया है।
वैश्विक ऊर्जा मांग में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण
पुरी ने कहा कि विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के कारण भारत आने वाले दशकों में वैश्विक ऊर्जा मांग का महत्वपूर्ण चालक बना रहेगा। उन्होंने कहा कि निवेश को बढ़ावा देने, ऊर्जा स्थिरता मजबूत करने और वैश्विक विकास के लिए विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच निरंतर संवाद जरूरी है।
स्थिर और पूर्वानुमानित ऊर्जा बाजार का आह्वान
पेट्रोलियम मंत्री ने भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और बाजार में अस्थिरता के दौर में वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए ओपेक के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने भारत और ओपेक से संतुलित, स्थिर और पूर्वानुमानित वैश्विक ऊर्जा बाजार को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।
भारत के साथ संवाद ओपेक की प्राथमिकता
ओपेक महासचिव हैथम अल घैस ने कहा कि भारत के साथ संवाद ओपेक की प्राथमिकता है, क्योंकि वर्तमान वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में भारत का महत्व लगातार बढ़ रहा है और आने वाले दशकों में यह और बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि ओपेक-भारत ऊर्जा संवाद 11 वर्षों से मजबूत है और इसकी शुरुआत 2015 में नई दिल्ली में हुई थी।
भारत के व्यावहारिक दृष्टिकोण की सराहना
अल घैस ने ऊर्जा चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के संतुलित, यथार्थवादी और व्यावहारिक दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की कई ऊर्जा प्राथमिकताएं ओपेक की प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और संवाद के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता की भी प्रशंसा की।
कूटनीति और संवाद पर दिया जोर
ओपेक महासचिव ने कहा कि संवाद की सबसे उत्साहजनक बात यह है कि भारत सरकार ने मौजूदा दौर की बड़ी चुनौतियों के समाधान के साधन के रूप में कूटनीति और संवाद की निरंतर वकालत की है। उन्होंने बैठक में शामिल सभी प्रतिभागियों को उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया और ओपेक प्रतिनिधिमंडल की मेहमाननवाजी के लिए हरदीप सिंह पुरी के प्रति आभार व्यक्त किया।
ऊर्जा सहयोग को और गहरा करने पर सहमति
बैठक में ओपेक-भारत ऊर्जा संवाद के तहत अब तक हुई प्रगति की सराहना की गई। इसमें तकनीकी स्तर पर हुई प्रगति भी शामिल रही। दोनों पक्षों ने भारत और ओपेक के बीच ऊर्जा सहयोग को और गहरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वियना में होगी आठवीं उच्च स्तरीय बैठक
बैठक में सहमति बनी कि ओपेक-भारत ऊर्जा संवाद की आठवीं उच्च स्तरीय बैठक ऑस्ट्रिया के वियना में आपसी सहमति से तय तारीख पर आयोजित की जाएगी। (इनपुट: पीआईबी)


