पिछले आठ वर्षों में भारत की स्वास्थ्य सेवा यात्रा में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति दृष्टिकोण अब केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वित्तीय सुरक्षा, सुलभ प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा, डिजिटल स्वास्थ्य ढांचा और भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने की बेहतर तैयारी भी शामिल हो गई है। इस बदलाव के केंद्र में आयुष्मान भारत है, जिसे भारत सरकार ने 2018 में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया था। इस प्रमुख स्वास्थ्य योजना ने अब आठ वर्ष पूरे कर लिए हैं और इसके क्रियान्वयन का पैमाना सरकार के उन प्रयासों को दर्शाता है, जिनका उद्देश्य विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और किफायती बनाना है।
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) पात्र लाभार्थियों को प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का कैशलेस अस्पताल में भर्ती होने का कवर प्रदान करती है। 21 सितंबर 2026 तक 48.51 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके थे। वहीं, इस योजना के तहत करीब 13.25 करोड़ अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में सहायता दी गई, जिनमें 2.03 लाख करोड़ रुपये के उपचार को कवर किया गया। इसके लिए 38,000 से अधिक सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों का नेटवर्क उपलब्ध है।
ये आंकड़े सार्वजनिक रूप से समर्थित स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच के बड़े विस्तार को दर्शाते हैं। इसके साथ ही, सरकार ने परिवारों को गंभीर बीमारी के साथ आने वाले वित्तीय झटके से बचाने पर भी जोर दिया है। यह योजना 27 चिकित्सा विशेषज्ञताओं के तहत 1,961 प्रक्रियाओं को कवर करती है, जिससे पात्र लाभार्थी सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार प्राप्त कर सकते हैं।
समावेशन पर अधिक जोर के साथ स्वास्थ्य सेवा
सरकार के दृष्टिकोण की एक प्रमुख विशेषता उन समूहों के लिए कवरेज का विस्तार करना रहा है, जिन्हें विशेष ध्यान की आवश्यकता है। 2024 में AB PM-JAY का विस्तार करीब 37 लाख आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सहायिकाओं के परिवारों तक किया गया। योजना का विस्तार 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को भी कवर करने के लिए किया गया, चाहे उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कुछ भी हो। इससे अनुमानित छह करोड़ बुजुर्ग नागरिकों को लाभ मिलने की उम्मीद है। 21 सितंबर 2026 तक वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1.36 करोड़ से अधिक आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनाए जा चुके थे। वहीं, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सहायिकाओं के लिए 44.81 लाख से अधिक कार्ड बनाए जा चुके थे।
यह विस्तार स्वास्थ्य नीति के एक महत्वपूर्ण पहलू को दर्शाता है—ऐसे वर्गों तक वित्तीय सुरक्षा पहुंचाना, जो समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं या उम्र अथवा काम की परिस्थितियों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं की अधिक आवश्यकता का सामना कर सकते हैं। योजना की पोर्टेबिलिटी ने पहुंच को और मजबूत किया है। AB PM-JAY के तहत लाभार्थी अपने गृह राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की परवाह किए बिना देशभर के सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार प्राप्त कर सकते हैं। 30 जून 2026 तक 29.05 लाख से अधिक अंतरराज्यीय पोर्टेबिलिटी के तहत अस्पताल में भर्ती के मामलों को मंजूरी दी जा चुकी थी, जिनकी कीमत 8,383 करोड़ रुपये से अधिक थी। यह सुविधा विशेष रूप से प्रवासी श्रमिकों और रोजगार या उपचार के लिए अपने गृह राज्य से बाहर जाने वाले परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है।
प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को नागरिकों के और करीब लाना
आयुष्मान भारत केवल अस्पताल में भर्ती होने तक सीमित नहीं है। इसके व्यापक ढांचे में आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी शामिल हैं, जिनका उद्देश्य समुदायों के करीब व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इन केंद्रों पर पारंपरिक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं से आगे बढ़कर बीमारियों की जांच और प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं, मुंह, आंख और कान-नाक-गला (ENT) से जुड़ी देखभाल, शुरुआती स्तर की आपातकालीन और ट्रॉमा देखभाल, आवश्यक दवाएं और जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ये केंद्र ई-संजीवनी के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य पहुंच और टेलीमेडिसिन सेवाओं के लिए भी मंच प्रदान करते हैं।
इस प्राथमिक स्वास्थ्य नेटवर्क का पैमाना काफी बड़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 14 सितंबर 2026 तक 1.87 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर काम कर रहे थे। इस मॉडल का महत्व लोगों के घरों के करीब स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने और नागरिकों तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के बीच संपर्क के पहले स्तर को मजबूत करने में है।
स्वास्थ्य सेवा के लिए डिजिटल आधार तैयार करना
सरकार की स्वास्थ्य सेवा रणनीति की एक अन्य प्रमुख विशेषता तकनीक का एकीकरण है। 2021 में शुरू किया गया आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) एक एकीकृत और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम तैयार करने के लिए बनाया गया है। इसके केंद्र में आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) हैं, जो लोगों को डिजिटल स्वास्थ्य पहचान प्रदान करते हैं और स्वास्थ्य रिकॉर्ड को उनसे जोड़ने की सुविधा देते हैं।
17 सितंबर 2026 तक 97.61 करोड़ से अधिक ABHA ID सक्रिय थीं और इनके साथ 119.95 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड जोड़े जा चुके थे। इस डिजिटल इकोसिस्टम में 5.78 लाख से अधिक सत्यापित स्वास्थ्य सेवा केंद्र और 11 लाख से अधिक पंजीकृत स्वास्थ्य पेशेवर भी शामिल थे।
यह डिजिटल ढांचा सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। इससे स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को अधिक आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना संभव हो सकता है और मरीजों, स्वास्थ्य पेशेवरों तथा स्वास्थ्य संस्थानों के बीच समन्वय बेहतर हो सकता है।
भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए भारत को तैयार करना
सरकार के दृष्टिकोण में स्वास्थ्य ढांचे और तैयारियों पर भी जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) को 2021 में 2021-26 के लिए 64,180 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान के साथ शुरू किया गया था।
इस मिशन में ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों, ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट्स, एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं और क्रिटिकल केयर अस्पताल ब्लॉक्स के लिए सहायता शामिल है। सरकार ने निर्धारित श्रेणियों और स्थानों पर 23,224 ग्रामीण स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों, 13,736 शहरी स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों, 3,389 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट्स, 744 एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं और 631 क्रिटिकल केयर अस्पताल ब्लॉक्स के लिए सहायता का प्रावधान किया है।
यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य सेवा रणनीति केवल बीमा कवरेज उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य बीमारी के प्रकोप और अन्य स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक भौतिक और संस्थागत क्षमता को भी मजबूत करना है।
वित्तीय सुरक्षा से स्वस्थ भारत की ओर
आयुष्मान भारत का महत्व अंततः इस बात में है कि इसके विभिन्न घटक एक-दूसरे के पूरक के रूप में काम करते हैं। AB PM-JAY द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है, आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करते हैं, ABDM डिजिटल स्वास्थ्य का आधार तैयार करता है और PM-ABHIM बुनियादी ढांचे, निगरानी और तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करता है। ये सभी पहल मिलकर स्वास्थ्य सेवा के प्रति एक व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती हैं, जिसमें देखभाल की पूरी श्रृंखला में नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया गया है।
आठ वर्षों के बाद दर्ज किए गए आंकड़े इन सरकारी कार्यक्रमों के बड़े पैमाने को दर्शाते हैं। AB PM-JAY के तहत 13 करोड़ से अधिक अस्पताल में भर्ती के मामले, हजारों सूचीबद्ध अस्पताल, आरोग्य मंदिरों में करोड़ों लोगों की यात्राएं और करीब 100 करोड़ ABHA ID इस बात की ओर संकेत करते हैं कि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सार्वजनिक वित्तपोषण, प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे और डिजिटल तकनीक का बढ़ता समर्थन मिल रहा है।
भारत के लिए चुनौती केवल स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि आम नागरिक गंभीर वित्तीय बोझ का सामना किए बिना इन सेवाओं तक पहुंच सकें। इस दृष्टि से स्वास्थ्य सेवा में यह बदलाव महत्वपूर्ण प्रभाव रखता है।
इसलिए आयुष्मान भारत का निरंतर विकास भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र की यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। पहुंच, किफायती स्वास्थ्य सेवा, समावेशन, डिजिटल नवाचार और स्वास्थ्य प्रणाली की तैयारी पर जोर एक ऐसा ढांचा तैयार करता है, जिसके माध्यम से भारत सरकार सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के व्यापक लक्ष्य को आगे बढ़ा रही है।
शुरुआत के आठ वर्ष बाद आयुष्मान भारत देशभर में स्वास्थ्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा वितरण के विस्तार के लिए सरकार के सबसे व्यापक प्रयासों में से एक के रूप में सामने आया है। अस्पताल बीमा से लेकर पड़ोस के स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा और देशव्यापी डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम तक इसका लगातार विस्तार भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में चल रहे बदलाव के पैमाने और व्यापकता को दर्शाता है।


