81% भारतीय उद्योग जगत ने प्रधानमंत्री की इंटर्नशिप योजना का किया समर्थन: रिपोर्ट

80 प्रतिशत से अधिक भारतीय उद्योग जगत प्रधानमंत्री की इंटर्नशिप योजना 2024 का समर्थन कर रहा है और अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) पहलों को इस योजना के साथ जोड़ने के लिए काफी प्रयास कर रहा है। गुरुवार को आई एक रिपोर्ट से यह जानकारी प्राप्त हुई है।  

कौशल अंतर पाटने और रोजगार क्षमता बढ़ाने में इंटर्नशिप की बढ़ती भूमिका पर दिया जोर

जी हां, 932 कंपनियों से मिली जानकारी के आधार पर टीमलीज एडटेक की रिपोर्ट में भारत में युवाओं के लिए कौशल अंतर को पाटने और रोजगार क्षमता को बढ़ाने में इंटर्नशिप की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया गया है।

76% से अधिक कंपनियां इंटर्नशिप प्रोग्राम में प्रौद्योगिकी भूमिकाओं को दे रही हैं प्राथमिकता

रिपोर्ट में बताया गया है कि 76 प्रतिशत से अधिक कंपनियां अपने इंटर्नशिप कार्यक्रमों में प्रौद्योगिकी भूमिकाओं को प्राथमिकता दे रही हैं, जो उभरती मांगों को पूरा करने के लिए डिजिटल रूप से कुशल प्रतिभाओं पर उद्योग के फोकस को प्रदर्शित करता है। इसके अलावा, 73 प्रतिशत कंपनियां इंटर्नशिप कार्यक्रमों के पूरा होने पर अपने कम से कम 10 प्रतिशत इंटर्न को पूर्णकालिक कर्मचारी के रूप में नियुक्त करने का इरादा रखती हैं।

81% कंपनियों ने सभी निगमों तक इसके विस्तार की वकालत की

रिपोर्ट में इस योजना के विस्तार के लिए व्यापक समर्थन की भी पहचान की गई है, जिसमें 81 प्रतिशत कंपनियों ने सभी निगमों तक इसके विस्तार की वकालत की है। 

अधिकांश उत्तरदाताओं (73 प्रतिशत) ने 1-6 महीने तक चलने वाली लघु-से-मध्यम अवधि की इंटर्नशिप को भी कार्यक्रम दक्षता के साथ सार्थक कौशल विकास को संतुलित करने के लिए इष्टतम माना है। यह योजना भारत इंक की वित्तीय प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है, जिसमें 34.43 प्रतिशत कंपनियां अपने सीएसआर बजट का 20 प्रतिशत तक इंटर्नशिप कार्यक्रमों के लिए आवंटित करने की योजना बना रही हैं।

रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 83.18 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने रोजगार क्षमता और कार्यबल की तैयारी को बढ़ाने के भारत के राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ पीएम इंटर्नशिप योजना के संरेखण को मान्यता दी।

योजना कार्यबल चुनौतियों का समाधान करने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी प्रभाव को दर्शाती है

इस संबंध में टीमलीज एडटेक के संस्थापक और सीईओ शांतनु रूज ने कहा, “पीएम इंटर्नशिप योजना कार्यबल चुनौतियों का समाधान करने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के प्रभाव को दर्शाती है। अधिकांश कंपनियों द्वारा तकनीकी भूमिकाओं पर ध्यान केंद्रित करने और सार्थक अवशोषण दरों के लिए प्रतिबद्ध होने के साथ, हम एक रणनीतिक परिवर्तन देख रहे हैं जो पारंपरिक सीएसआर से परे है।” रूज ने कहा, “यह पहल भारत की महत्वपूर्ण रोजगार चुनौतियों का समाधान करते हुए प्रभावी रूप से एक स्थायी प्रतिभा पाइपलाइन तैयार कर रही है।”

इसके अलावा रिपोर्ट में दिखाया गया है कि 32.43 प्रतिशत कंपनियों ने विश्वविद्यालयों और अन्य कॉरपोरेट्स दोनों के साथ साझेदारी के लिए मजबूत प्राथमिकता व्यक्त की है।

इसके अलावा, 54.05 प्रतिशत कंपनियों को 1-2 वर्षों के भीतर CSR-संचालित इंटर्नशिप से निवेश पर एक मापनीय सामाजिक प्रतिफल (SROI) की उम्मीद है, जो इन कार्यक्रमों के मूर्त लाभों के बारे में आशावादी होने का संकेत देता है।
गौरतलब हो, इस योजना की घोषणा 2024 के केंद्रीय बजट में की गई थी, जिसका मकसद अगले पांच वर्षों में शीर्ष-500 कंपनियों में एक करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करना है। इसके तहत प्रत्येक इंटर्न को 5,000 रुपये का मासिक वजीफा मिलता है, जिसमें कंपनियों को इस वजीफे और संबंधित प्रशिक्षण लागतों के एक हिस्से को कवर करने के लिए CSR फंड का उपयोग करने की अनुमति होती है। मुख्य रूप से बड़ी कंपनियों को लक्ष्य करते हुए, इस योजना ने छोटी कंपनियों को शामिल करने के लिए इसके संभावित विस्तार पर व्यापक चर्चाओं को जन्म दिया है, जिससे युवाओं की रोजगार क्षमता और कार्यबल विकास के लिए अधिक समावेशी और प्रभावशाली दृष्टिकोण का मार्ग प्रशस्त हुआ है। 

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