8 मार्च 2018 को राजस्थान के झुंझुनू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया पोषण अभियान, एक ऐसा मिशन है, जिसके साथ कई प्रमुख मंत्रालय जुड़े हुए हैं और जिसे भारत के राष्ट्रीय विकास एजेंडे में पोषण को सबसे आगे रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह पहल, जिसका आधिकारिक नाम प्रधानमंत्री की समग्र पोषण योजना (पोषण) है, यह पोषण को समग्र विकास से जोड़ने के प्रधानमंत्री मोदी की विचारधारा को साकार करती है, और एक स्वस्थ, मज़बूत राष्ट्र के निर्माण में इसकी भूमिका पर ज़ोर देती है। छह साल से कम उम्र के बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को लक्षित करते हुए, यह कार्यक्रम तकनीक-संचालित, समुदाय-केंद्रित विचारधारा के ज़रिए कुपोषण की समस्या का समाधान करता है।
इस विषय पर जागरूकता को और बढ़ाने के लिए, हर साल पोषण माह, प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के महीने यानी सितंबर माह में मनाया जाता है, जो राष्ट्रीय प्रगति की आधारशिला के रूप में पोषण के प्रति प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पोषण माह के दौरान, प्रधानमंत्री नागरिकों को मायगॉव और हैशटैग #Local4Poshan जैसे प्लेटफार्मों के ज़रिए स्थानीय पौष्टिक व्यंजनों को साझा करने के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करते हैं, जिससे सामुदायिक भागीदारी और आहार विविधता को बढ़ाने के लिए पारंपरिक, पोषक तत्वों से भरपूर आहार को बढ़ावा मिलता है।
सशक्त नारी और सुपोषित भारत के उनकी विचारधारा के अनुसार, पीएम मोदी ने अपने 75वें जन्मदिन पर स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान (एसएनएसपीए) के साथ 8वां राष्ट्रीय पोषण माह शुरू किया है।
उद्देश्य
पोषण अभियान के प्राथमिक उद्देश्यों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- 0-6 वर्ष की आयु के बच्चों में बौनेपन, कुपोषण और जन्म के वक्त वजन में कमी की समस्या में रोकथाम और कमी,
- बच्चों (6-59 महीने), किशोरियों और महिलाओं (15-49 वर्ष) में एनीमिया के मामलों को कम करना।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5, 2019-21) के अनुसार, पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में बौनापन 38.4% से घटकर 35.5% हो गया, कम वजन के मामले 35.8% से घटकर 32.1%, और दुर्बलता 21.0% से घटकर 19.3% हो गई। वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही में 15.4 करोड़ बच्चों/किशोरों को आयरन और फोलिक एसिड की खुराक मिली।
गर्भधारण से लेकर दो वर्ष की उम्र तक के पहले 1,000 दिनों को प्राथमिकता देते हुए, पोषण अभियान कुपोषण के पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे चक्र को तोड़ने का प्रयास करता है, जो चक्र गरीबी, बाल विवाह और लैंगिक भेदभाव जैसे कारकों से और भी गंभीर हो जाता है।
इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए, पोषण अभियान जन आंदोलन रणनीति के ज़रिए सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देते हुए आहार विविधता, पूरक आहार और विशेषकर स्तनपान को बढ़ावा देता है। यह पहल समग्र पोषण वितरण के मद्देनज़र एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस), राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं को भी एकीकृत करती है। मार्च 2021 में लॉन्च किए गए पोषण ट्रैकर ऐप जैसे उपकरणों के ज़रिए प्रौद्योगिकी भी इसमें एक अहम भूमिका निभाती है, जो आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा विकास के तमाम मेट्रिक्स और सेवा वितरण की वास्तविक समय पर निगरानी को सक्षम बनाता है।
मार्च/अप्रैल में आयोजित पोषण माह और पोषण पखवाड़ा जैसे समुदाय-आधारित कार्यक्रम, स्थानीय स्तर पर उगाए गए पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने के लिए पोषण कार्यशालाओं, रैलियों और पोषण वाटिका (पोषक उद्यान) जैसी गतिविधियों के ज़रिए लाखों लोगों को जोड़ते हैं।
मुख्य विषय और फोकस
आठवां राष्ट्रीय पोषण माह, पोषण साक्षरता और स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देने के लिए जन आंदोलन को आगे बढ़ा रहा है। इस वर्ष के संस्करण में कुपोषण को दूर करने और स्थायी स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए नवीन और समावेशी विचारों पर प्रकाश डाला गया है। मुख्य विषय हैं:
• मोटापे की समस्या का समाधान – चीनी और तेल का इस्तेमाल कम करना: इसका मकसद मोटापे से निपटने के लिए सुलभ वातावरण बनाना और एक स्वस्थ भारत के निर्माण के लिए कम तेल और चीनी के सेवन के बारे में जागरूकता पैदा करना है।
- प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल तथा शिक्षा (ईसीसीई)/पोषण भी पढ़ाई भी (पीबीपीबी): राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, आंगनवाड़ी केंद्रों (एडब्ल्यूसी) में दुनिया का सबसे बड़ा उच्च-गुणवत्ता वाला प्रीस्कूल नेटवर्क विकसित करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए समग्र बाल विकास के लिए पोषण को प्रारंभिक शिक्षा के साथ एकीकृत किया जाएगा।
- एक पेड़ माँ के नाम: पर्यावरणीय स्थिरता को पोषण जागरूकता के साथ एकीकृत करता है, दीर्घकालिक स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए वृक्षारोपण और पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को प्रोत्साहित करता है।
- शिशु एवं छोटे बच्चों के आहार (आईवाईसीएफ) प्रथाएँ: बेहतर पोषण के लिए दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए आहार प्रथाओं को बेहतर बनाने का लक्ष्य, जिसमें सही मात्रा में स्तनपान और पूरक आहार पर ज़ोर देना शामिल हैं।
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पोषण और देखभाल में पुरुषों की भागीदारी: परिवार और सामुदायिक स्वास्थ्य में साझा ज़िम्मेदारी को बढ़ावा देने के लिए पोषण जागरूकता और देखभाल संबंधी भूमिकाओं में पुरुषों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देता है।
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पोषण ट्रैकर ऐप: पोषण का डिजिटलीकरण
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 1 मार्च 2021 को लॉन्च किया गया, पोषण ट्रैकर एक मोबाइल एप्लिकेशन है, जिसे पोषण अभियान के तहत पोषण सेवा वितरण को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह बच्चों में बौनेपन, कमज़ोरी और कम वज़न की व्यापकता की वास्तविक समय में पहचान और निगरानी को सक्षम बनाता है, साथ ही कुशल सेवा वितरण उपकरणों और प्रदर्शन ट्रैकिंग के साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद करता है। यह ऐप अहम और लाभार्थी-केंद्रित सेवाएँ प्रदान करता है और बेहतर नतीज़ों के लिए वास्तविक समय डेटा विश्लेषण को बढ़ावा देता है। वर्तमान में, 14,02,248 आंगनवाड़ी केंद्र और 9,14,75,640 पात्र लाभार्थी इस ऐप के साथ पंजीकृत हैं और यह संख्या हर दिन लगातार बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री पोषण: पोषण के अंतर्गत एक प्रमुख योजना
प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण या प्रधानमंत्री पोषण योजना, एक केंद्र प्रायोजित पहल है, जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (एनएफएसए के अंतर्गत प्रमुख अधिकार-आधारित केंद्र प्रायोजित योजनाओं में से एक है। यह कार्यक्रम पोषण से जुड़े परिणामों में सुधार और छात्रों की स्कूल उपस्थिति बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
प्रधानमंत्री पोषण के कुछ प्रमुख पहलुओं में शामिल हैं:
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने 2021-22 से 2025-26 तक प्रधानमंत्री पोषण (पोषण शक्ति निर्माण) योजना को जारी रखने की मंज़ूरी दी है।
इसे पहले स्कूलों में मध्याह्न भोजन के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में जाना जाता था, जिसे लोकप्रिय रूप से मिडडे मील योजना कहा जाता है। यह योजना सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के सभी छात्रों को कवर करती है। इस योजना से देश भर के 11.20 लाख स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 11.80 करोड़ बच्चे लाभान्वित होंगे।
पीएम पोषण योजना के ज़रिए, ‘सामग्री लागत’ के रूप में आवंटित धनराशि का इस्तेमाल, इस भोजन को तैयार करने के लिए ज़रुरी सामग्री की खरीद के लिए किया जाता है।
श्रम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला श्रम ब्यूरो, ग्रामीण श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई-आरएल) का उपयोग करके, पीएम पोषण योजना के लिए मुद्रास्फीति की गणना करने हेतु, 20 राज्यों के 600 गाँवों से मासिक मूल्य आँकड़े एकत्र करता है। इस मुद्रास्फीति सूचकांक के आधार पर, शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 1 मई 2025 से प्रभावी, ‘सामग्री लागत’ में 9.5% की वृद्धि की है। इस समायोजन से वित्तीय वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार पर करीब 954 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
उपर्युक्त के अलावा, पीएम पोषण योजना में निम्नलिखित सुविधाएँ भी शामिल हैं:
- खाद्यान्न: प्राथमिक विद्यालयों के लिए 100 ग्राम/बच्चा/दिन और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए 150 ग्राम/बच्चा/दिन एनएफएसए की दरों पर उपलब्ध कराया जाता है (मोटे अनाज के लिए ₹1/किग्रा, गेहूँ के लिए ₹2/किग्रा, चावल के लिए ₹3/किग्रा)।
- खाना पकाने की लागत: प्राथमिक विद्यालयों के लिए ₹4.97/बच्चा/दिन और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए ₹7.45/बच्चा/दिन (1 अप्रैल, 2020 से प्रभावी) की दर से सामग्री (दालें, सब्ज़ियाँ, तेल, मसाले, ईंधन) शामिल हैं।
- ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान भोजन: पोषण को लगातार बनाए रखने के लिए सूखा/आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भोजन का प्रावधान सुनिश्चित करता है।
- प्रारंभिक कक्षाओं के लिए भोजन: समग्र शिक्षा के तहत राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप, प्राथमिक विद्यालयों में बालवाटिका (प्रथम श्रेणी से पूर्व) तक भोजन का प्रावधान बढ़ाया गया है।
चिल्ड्रन न्यूट्रिशन पार्क: भोजन और मनोरंजन का मेल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों से प्रेरित और गुजरात के एकता नगर में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास स्थित चिल्ड्रन न्यूट्रिशन पार्क, एक अनूठा थीम पार्क है, जिसे “सही पोषण, देश रोशन” थीम के ज़रिए बच्चों को स्वस्थ खान-पान की आदतों के बारे में शिक्षित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
600 मीटर की न्यूट्री ट्रेन की सवारी की सुविधा के साथ, पार्क में इंटरैक्टिव स्टेशन भी हैं, जैसे कि फलशाका गृहम, जहां शुभंकर किसान कुमार फलों और सब्जियों के बारे में सिखाते हैं, पायो नगरी, जहां जनार्दन “गाय को खाना खिलाओ” जैसे खेलों के ज़रिए दूध उत्पादों के बारे में जानकारी देते हैं, अन्नपूर्णा के तहत डिजिटल गेम के ज़रिए घर में पकाए गए भोजन को बढ़ावा दिया जाता है, पोषण पुरम में नट्स, बीज और हाइड्रेशन पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, और स्वस्थ भारतम में योग और खेल के साथ शारीरिक गतिविधि पर जोर दिया जाता है।
इसके अलावा अन्य आकर्षणों में 5D मूवी के साथ एक मिरर भूलभुलैया, भारतीय थाली, जंगल जिम के साथ एक न्यूट्री हंट बिल्डिंग और ज़ोर्ब बॉल व साइकिलिंग गेम्स वाला एक गेम ज़ोन भी शामिल हैं। अत्याधुनिक तकनीक, दिव्यांग बच्चों के लिए सुलभता और स्वस्थ भोजन परोसने वाले न्यूट्री कैफ़े के साथ, यह पार्क मनोरंजन और शिक्षा का संयोजन करके समग्र पोषण को बढ़ावा देता है।
मिशन पोषण 2.0 के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने, पोषण जागरूकता बढ़ाने, स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने और समुदायों को सशक्त बनाने के लिए 8 अप्रैल से 22 अप्रैल तक पोषण पखवाड़ा 2025 मनाया।
इस सातवें संस्करण का मुख्य फोकस बच्चे के जीवन के पहले 1,000 दिन, गर्भाधान से लेकर दो साल तक, पर था, जिसमें इस अवधि के दौरान पोषण की अहम भूमिका पर रोशनी डाली गई, जो आजीवन स्वास्थ्य, विकास और बेहतर परिणामों जैसे कि वयस्कता में उत्पादकता और उच्च आय में वृद्धि की नींव रखने के साथ-साथ सामुदायिक जुड़ाव और सशक्तिकरण को भी मजबूत करता है।
इस वर्ष के विषय निम्नलिखित पर केंद्रित थे:
- मातृ पोषण के मुद्दे पर परिवारों को शिक्षित करना
- प्रभावी स्तनपान की पद्धतियाँ
- बचपन में बौनेपन और एनीमिया से निपटने के लिए संतुलित आहार का महत्व
इसके अलावा, इसने पारंपरिक और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों के उपयोग को प्रोत्साहित करके, स्थानीय समाधानों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया, खासकर आदिवासी क्षेत्रों में, जहाँ स्वदेशी आहार, स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
पोषण माह में कैसे भाग लें
पोषण माह, पोषण और स्वस्थ जीवन को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रव्यापी पहल है, और इसे सफल बनाने में हर कोई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है! यहाँ कुछ सार्थक तरीके दिए गए हैं, जिनसे आप इसमें शामिल हो सकते हैं और एक स्वस्थ भारत में योगदान दे सकते हैं:
समुदाय को शिक्षित करना
संतुलित आहार, स्तनपान और कुपोषण से निपटने के मुद्दे पर ज़ोर देते हुए आस-पड़ोस, स्कूलों या कार्यस्थलों में जागरूकता अभियानों का आयोजन और उनमें भागीदारी, पोषण माह को एक सफल आयोजन बनाने की दिशा में सामुदायिक भागीदारी को सुगम बनाने का एक अहम तरीका है।
उदाहरण के लिए, पोषण माह 2024 में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को पोषण-टोकरियों का वितरण, साथ ही शिशुओं के लिए अन्नप्राशन या अन्न दीक्षा समारोह शामिल थे।
पोषण उद्यान लगाएँ और किचन गार्डन को बढ़ावा दें
सामुदायिक स्थानों, स्कूलों या घरों के पिछवाड़े में फलों के पेड़, सब्ज़ियाँ या जड़ी-बूटियाँ उगाने के लिए वृक्षारोपण अभियानों में भागीदारी। ये पोषण वाटिकाएँ ताज़ी, पौष्टिक उपज तक पहुँच सुनिश्चित करने में मदद करती हैं। इसी क्रम में, पोषण माह 2022 के दौरान, देश भर में बड़े पैमाने पर पोषण-उद्यान स्थापित करने या घर के पिछवाड़े में मुर्गी पालन/मत्स्य पालन इकाइयों के साथ पोषण वाटिकाओं को फिर से स्थापित करने के 1.5 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
आंगनवाड़ी केंद्रों और आशा कार्यकर्ताओं का समर्थन
स्थानीय आंगनवाड़ी केंद्रों में स्वयंसेवा करके कोई भी व्यक्ति पोषण माह में सक्रिय रूप से योगदान दे सकता है, जहाँ वे पौष्टिक भोजन वितरित करने, स्वास्थ्य जाँच में सहायता करने या बच्चों और माताओं के लिए आकर्षक गतिविधियाँ आयोजित करने में मदद कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए, 2024 में रांची में आयोजित 7वें राष्ट्रीय पोषण माह के समापन समारोह के दौरान, 20 राज्यों में 11,000 से अधिक सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों का वर्चुअल उद्घाटन किया गया। इसके अलावा, पोषण माह की प्रतिबद्धता के साथ-साथ, पोषण अभियान एक सुपोषित भारत की ओर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 781 जिलों में 13,99,484 आंगनवाड़ी केंद्र (एडब्ल्यूसी) संचालित किए जा रहे हैं, जिन्हें 13,33,561 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रयासों से बल मिला है।


