विश्व शौचालय दिवस के मौके पर केंद्र सरकार ने कहा कि देश के 95 फीसदी से अधिक गांव अब ODF Plus घोषित किए जा चुके हैं। ODF Plus वह स्थिति है जिसमें गांव न केवल खुले में शौच से मुक्त होते हैं, बल्कि ठोस और तरल कचरे के प्रबंधन के साथ दृष्टिगत रूप से स्वच्छ भी रहते हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2022 में ODF Plus गांवों की संख्या करीब 1 लाख थी, जो बढ़कर 19 नवंबर 2025 तक 5.67 लाख हो गई। यह तीन साल में 467 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। इनमें से 4.85 लाख से अधिक गांव ODF Plus मॉडल श्रेणी में आते हैं।
शहरी क्षेत्रों में भी स्वच्छता को लेकर प्रगति जारी है। अब तक 4,692 शहर ODF घोषित हुए हैं, 4,314 शहरों ने ODF+ स्तर हासिल किया है, जबकि 1,973 शहर ODF++ दर्जे तक पहुँच चुके हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत व्यक्तिगत शौचालय निर्माण लक्ष्य से ज्यादा रहा और यह 108.62 प्रतिशत तक पहुंच गया, जिसके तहत 63.74 लाख शौचालय बनाए गए हैं। वहीं सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय निर्माण 125.46 प्रतिशत तक पहुंच गया और कुल 6.38 लाख से ज्यादा यूनिट्स तैयार हुई हैं।
सरकार ने कहा कि शहरी और ग्रामीण स्वच्छता को मजबूत करने के लिए जल जीवन मिशन और AMRUT जैसे कार्यक्रम भी साथ मिलकर काम कर रहे हैं। AMRUT के तहत 34,447 करोड़ रुपये की लागत वाली 890 सीवरेज और सेप्टेज परियोजनाएँ ज़मीन पर उतारी गई हैं, जिसमें 4,622 MLD नई या बढ़ी हुई सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता शामिल है। इनमें 1,437 MLD क्षमता रीसायकल और रीयूज़ के लिए है। इसके अलावा राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा 68,000 करोड़ रुपये से अधिक के 86 प्रोजेक्ट लिए गए हैं, जिनसे कुल 6,964 MLD नई STP क्षमता सृजित होगी।
सरकार ने कहा कि देश अब स्वच्छता को सिर्फ संरचना निर्माण तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि इसके माध्यम से सम्मान, समावेशन और दीर्घकालिक स्वच्छता सुनिश्चित की जा रही है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।
-(इनपुटःएजेंसी)


