विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि संतुलित आहार लेना, नियमित रूप से सक्रिय रहना और तनाव को नियंत्रित करना स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।
विश्व स्ट्रोक दिवस हर साल 29 अक्टूबर को मनाया जाता है, ताकि लोगों में इस बीमारी की रोकथाम, उपचार और स्ट्रोक से बचे लोगों के लिए बेहतर देखभाल और सहयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके। इस वर्ष की थीम है — “Every Minute Counts” यानी “हर मिनट मायने रखता है।”
नड्डा ने कहा कि स्ट्रोक भले ही अचानक हो सकता है, लेकिन यह जीवनशैली में सुधार से रोका जा सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर कहा, “आज विश्व स्ट्रोक दिवस पर हम सभी को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और स्ट्रोक से बचाव के महत्व के बारे में जागरूक होने का संकल्प लेना चाहिए। सही खानपान, नियमित व्यायाम और तनाव से दूर रहकर हम न केवल अपने स्ट्रोक के खतरे को कम कर सकते हैं, बल्कि स्वस्थ जीवन भी जी सकते हैं।”
स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क तक रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। इस दौरान हर सेकंड मस्तिष्क की कोशिकाएँ मरने लगती हैं। इसलिए “गोल्डन ऑवर” यानी पहले 4.5 घंटे के भीतर चिकित्सा सहायता प्राप्त करना जीवन बचाने के लिए बेहद आवश्यक है। यदि समय पर इलाज न मिले, तो यह स्थायी मस्तिष्क क्षति या विकलांगता का कारण बन सकता है।
आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने भी स्वस्थ जीवनशैली को स्ट्रोक से बचाव का सबसे अच्छा उपाय बताया। उन्होंने कहा, “विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर मेरा संदेश है — स्वस्थ जीवनशैली ही स्ट्रोक से बचाव का सबसे अच्छा उपाय है। अच्छा खाएं, सक्रिय रहें और तनाव से बचें। अपने स्वास्थ्य की ज़िम्मेदारी स्वयं लें।”
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी स्ट्रोक से बचाव के लिए धूम्रपान और शराब छोड़ने, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने, मधुमेह प्रबंधन, स्वस्थ वजन बनाए रखने और रोज़ाना 30 मिनट व्यायाम करने की सलाह दी है।
हर साल विश्वभर में लगभग 1.2 करोड़ लोग स्ट्रोक से प्रभावित होते हैं और 70 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, करीब 90% स्ट्रोक के मामले जीवनशैली में सुधार, धूम्रपान छोड़ने और नियमित व्यायाम से रोके जा सकते हैं।


