मानव पैपिलोमावायरस (एचपीवी) के खिलाफ टीकाकरण और डीएनए आधारित स्क्रीनिंग तक पहुंच को मजबूत करना भारत में सर्वाइकल कैंसर के उन्मूलन के लिए बेहद जरूरी है। यह बात स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने शनिवार को कही। ये विशेषज्ञ एम्स द्वारा आयोजित भारत के पहले राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में बोल रहे थे, जिसका उद्देश्य सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के एजेंडे को तेज करना है।
अराधना पटनायक ने कहा सरकार रोकथाम, स्क्रीनिंग और उपचार के जरिए सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अतिरिक्त सचिव और प्रबंध निदेशक अराधना पटनायक ने सर्वाइकल कैंसर को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने के लिए सरकार की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा, “भारत के लिए सर्वाइकल कैंसर का उन्मूलन एक हासिल किया जा सकने वाला लक्ष्य है और हम रोकथाम, स्क्रीनिंग और उपचार- तीनों स्तरों पर तेजी से कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”
एचपीवी टीकाकरण विस्तार, डीएनए जांच सुदृढ़ीकरण और साझेदारी से समय पर उपचार देकर सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन लक्ष्य प्राप्त निश्चित होगा
पटनायक ने आगे कहा, “हमारा फोकस एचपीवी टीकाकरण के तेजी से विस्तार और सभी स्तरों पर स्क्रीनिंग को मजबूत करने पर है, खासकर एचपीवी डीएनए टेस्टिंग जैसी उच्च प्रदर्शन वाली विधियों के जरिए, ताकि हर महिला को समय पर जांच और इलाज मिल सके। मजबूत प्रणालियों, स्पष्ट संचालन प्रोटोकॉल और राज्यों व अन्य हितधारकों के साथ सतत साझेदारी के जरिए हम सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन को वास्तविकता बना सकते हैं और देशभर की लाखों महिलाओं के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं।”
वीके पॉल ने साक्ष्य-आधारित HPV डीएनए स्क्रीनिंग राष्ट्रीय मॉडल से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं द्वारा हर महिला तक समय पर जांच उपचार पहुंचाने पर जोर दिया
नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) प्रो. डॉ. वीके. पॉल ने कहा, “भारत के पास सर्वाइकल कैंसर को समाप्त करने का ऐतिहासिक अवसर है, लेकिन इसके लिए तेजी, व्यापक स्तर पर कार्यान्वयन और पूरे सिस्टम का समन्वय जरूरी है।” उन्होंने साक्ष्य-आधारित कार्यान्वयन मॉडल की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, “हमें ऐसे पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने होंगे, जो यह दिखाएं कि एचपीवी डीएनए आधारित स्क्रीनिंग और सेल्फ-सैंपलिंग को बड़े पैमाने पर, खासकर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से, कैसे लागू किया जा सकता है। इससे भारत को एक राष्ट्रीय मॉडल विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे हर महिला को समय पर स्क्रीनिंग, सटीक जांच और प्रभावी फॉलो-अप का लाभ मिल सके।”
शिखर सम्मेलन का फोकस HPV टीकाकरण विस्तार, डीएनए स्क्रीनिंग सुदृढ़ीकरण, सेल्फ-सैंपलिंग और प्रभावी कैंसर उपचार के प्रणालीगत समन्वय पर रहा
एम्स के डॉ. बीआर. अंबेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और ऑनको-एनेस्थीसिया एवं पैलिएटिव मेडिसिन विभागों द्वारा आयोजित इस शिखर सम्मेलन का फोकस तीन प्रमुख स्तंभों पर रहा। इनमें एचपीवी टीकाकरण के विस्तार से लेकर उच्च प्रदर्शन वाली एचपीवी डीएनए टेस्टिंग के जरिए स्क्रीनिंग को मजबूत करना, सेल्फ-सैंपलिंग विधियों को बढ़ावा देना और प्रभावी कैंसर उपचार के साथ पूरी प्रक्रिया को जोड़ना शामिल था।
सम्मेलन में राष्ट्रीय एसओपी, हब-स्पोक मॉडल और साझा मंच से सर्वाइकल कैंसर रोकथाम, पहचान व इलाज तेज करने पर जोर
सम्मेलन में एकरूप राष्ट्रीय मानक संचालन प्रक्रियाएं तैयार करने, हब-एंड-स्पोक केयर मॉडल लागू करने और इलाज व फॉलो-अप की प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर भी चर्चा हुई, ताकि देशभर में समान और उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल सुनिश्चित की जा सके। एम्स के डॉ. बीआर. अंबेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अभिषेक शंकर ने कहा, “सर्वाइकल कैंसर से अब अलग-थलग तरीके से नहीं निपटा जा सकता। सरकार, चिकित्सकों, नवोन्मेषकों और मरीज प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाना रोकथाम, शुरुआती पहचान और प्रभावी इलाज को तेज करने के लिए जरूरी गति और जवाबदेही पैदा करता है।”
शिखर सम्मेलन में 500 से अधिक प्रतिभागियों ने सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन हेतु व्यावहारिक सिफारिशें और राष्ट्रीय कॉल टू एक्शन तय किया
उन्होंने कहा, “इस पहल के जरिए हमारा लक्ष्य स्पष्ट और व्यावहारिक सिफारिशें तय करना है, जो भारत के सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन रोडमैप को दिशा देंगी।” इस शिखर सम्मेलन में देशभर के एम्स संस्थानों, राज्य स्वास्थ्य विभागों, कैंसर संस्थानों, डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ, आईसीएमआर, सिविल सोसायटी संगठनों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों सहित 500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का समापन एक राष्ट्रीय ‘कॉल टू एक्शन’ के साथ हुआ, जिसमें भारत में सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन को तेज करने के लिए प्राथमिक कदमों की रूपरेखा तय की गई।(इनपुट-आईएएनएस)


