माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की “सहकार से समृद्धि” की परिकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से 6 जुलाई 2021 को गठित सहकारिता मंत्रालय ने बीते चार वर्षों में सहकारी क्षेत्र को सशक्त, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए हैं। देश के पहले सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में मंत्रालय ने अब तक 114 प्रमुख पहलों को लागू किया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों, महिलाओं, युवाओं और सहकारी संस्थाओं को नया बल मिला है।
पैक्स का कायाकल्प, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
सहकारिता मंत्रालय ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को बहु-उद्देशीय बनाकर उन्हें ग्रामीण विकास का केंद्र बनाया है। इसके लिए आदर्श उपविधियाँ लागू की गईं, जिन्हें 32 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने अपनाया। इससे पैक्स को डेयरी, मत्स्य, भंडारण, जन औषधि केंद्र, पेट्रोल पंप, LPG वितरण जैसे 25 से अधिक नए व्यवसायों से जोड़ा गया।
पैक्स के कम्प्यूटरीकरण की महत्वाकांक्षी योजना के तहत अब तक 59,000 से अधिक पैक्स डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ चुकी हैं। ई-पैक्स के माध्यम से करोड़ों लेन-देन, ऑनलाइन ऑडिट और पारदर्शी लेखा-जोखा संभव हुआ है, जिससे सहकारी व्यवस्था में जनता का भरोसा बढ़ा है।
हर पंचायत में सहकारिता की मौजूदगी
सरकार ने हर पंचायत/गांव में बहुउद्देशीय पैक्स, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों के गठन का लक्ष्य तय किया है। अब तक देशभर में 32,000 से अधिक नई सहकारी समितियाँ पंजीकृत की जा चुकी हैं, जिससे स्थानीय रोजगार और आय के नए अवसर बने हैं।
विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अन्न भंडारण योजना
खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सहकारिता क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना शुरू की गई। अब तक 112 पैक्स में गोदाम बनकर तैयार हो चुके हैं, जिनसे 68,000 मीट्रिक टन से अधिक भंडारण क्षमता सृजित हुई है। इससे किसानों को उपज का बेहतर मूल्य और भंडारण की सुविधा मिली है।
राष्ट्रीय स्तर की तीन नई सहकारी संस्थाएँ
निर्यात, बीज और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने तीन नई बहु-राज्य सहकारी समितियाँ गठित कीं—
- नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड (NCEL): अब तक 13.77 लाख मीट्रिक टन कृषि उत्पादों का निर्यात।
- भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL): ‘भारत बीज’ ब्रांड के तहत प्रमाणित बीज।
- नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL): ‘भारत ऑर्गेनिक्स’ ब्रांड से जैविक उत्पादों की देशव्यापी पहचान।
कर सुधार और सहकारी बैंकों को राहत
सरकार ने सहकारी समितियों को कर-प्रणाली में बड़ी राहत दी है—MAT और सरचार्ज में कमी, नकद लेन-देन की सीमा बढ़ाना और नई सहकारी इकाइयों के लिए कम कर दर जैसे कदम उठाए गए। सहकारी बैंकों को नई शाखाएँ खोलने, आवास ऋण बढ़ाने और आधुनिक बैंकिंग सेवाएँ देने की अनुमति दी गई है।
डिजिटल, पारदर्शी और आधुनिक सहकारिता
राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (NCD) में 8.4 लाख से अधिक सहकारी समितियों का डेटा शामिल किया गया है। सहकारी रैंकिंग प्रणाली से पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। साथ ही सहकारी शिक्षा और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए सहकारी विश्वविद्यालय की योजना भी आगे बढ़ रही है।
बीते चार वर्षों में सहकारिता मंत्रालय ने सहकारी आंदोलन को नई ऊर्जा दी है। “सहकार से समृद्धि” अब केवल नारा नहीं, बल्कि गांव-गांव तक पहुंचता विकास मॉडल बन चुका है, जो आने वाले वर्षों में आत्मनिर्भर भारत की नींव को और मजबूत करेगा।
(इनपुट- PIB)


