अल्पसंख्यकों के समावेशी विकास की नई इबारत,11 सालों में बदली तस्वीर

भारत सरकार ने पिछले 11 सालों में छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों- मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन के समावेशी विकास के लिए शिक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण, सांस्कृतिक संरक्षण जैसे अनेक क्षेत्रों में सुधार की है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप आज अल्पसंख्यक वर्गों के लाखों लोग समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं और उनके जीवन में भी सुधार आया है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास और वित्त निगम (NMDFC) ने 10 मार्च 2025 तक 1,74,148 लाभार्थियों को 752.23 करोड़ रुपये की राशि वितरित की है, जबकि 2014-15 में यह आंकड़ा 431.20 करोड़ रुपये था। इसके अलावा, पारसी समुदाय की घटती जनसंख्या को रोकने के लिए चलाई गई ‘जियो पारसी’ योजना के तहत वर्ष 2023-24 में 3 करोड़ रुपये खर्च किए गए और अब तक 400 से अधिक बच्चों का जन्म हुआ है। वर्ष 2024-25 में इस योजना के लिए 6 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।

इसके अलावा प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) के अंतर्गत वर्ष 2014-15 से 2024-25 के बीच 18,416.24 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न विकास परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इनमें- शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, स्वच्छता, महिला और बाल विकास, तथा नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। यह योजना देश के 32 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 308 जिलों में पहचाने गए 1300 अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्र लागू है, जिनमें 870 अल्पसंख्यक बाहुल्य ब्लॉक (एमसीबी) और 321 अल्पसंख्यक शहर (एमसीटी) और 109 अल्पसंख्यक बाहुल्य जिला मुख्यालयों में चलाई जा रही है। वर्ष 2023-24 से इस योजना को पूरी तरह डिजिटलीकृत कर दिया गया है। प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (PM VIKAS) योजना में पांच योजनाएं-सीखो और कमाओ, नई मंजिल, नई रोशनी, हमारी धरोहर, और उस्ताद को मिलाकर एकीकृत किया गया है। इस योजना का उद्देश्य अल्पसंख्यक युवाओं और महिलाओं को कौशल, नेतृत्व और शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाना है। ‘सीखो और कमाओ’ के तहत युवाओं को परम्परागत और आधुनिक ट्रेंड आधारित कौशल, ‘नई मंजिल’ के तहत मदरसे या स्कूल छोड़ चुके छात्रों को औपचारिक शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण, ‘नई रोशनी’ के माध्यम से महिलाओं को जीवन कौशल और वित्तीय साक्षरता में प्रशिक्षित किया गया। ‘हमारी धरोहर’ ने सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किया, जबकि ‘उस्ताद’ योजना के माध्यम से परंपरागत हस्तशिल्प और कारीगरी को प्रोत्साहन मिला।

वहीं वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के लिए 8 अप्रैल 2025 को ‘वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025’ अधिसूचित किया गया, जो वक्फ की संपत्तियों में पारदर्शिता, जवाबदेही और डिजिटलीकरण को बढ़ावा देता है। इसके अंतर्गत 6 जून 2025 को ‘UMEED पोर्टल’ लॉन्च किया गया है, जो वक्फ संपत्तियों की वास्तविक समय में निगरानी और प्रबंधन की सुविधा देगा। इसके अलावा वक्फ बोर्डों के आधुनिकीकरण के लिए QWBTS और SWSVY योजनाओं के तहत वर्ष 2019-20 से 2023-24 तक क्रमशः 23.87 करोड़ रुपये और 7.16 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इन योजनाओं से राज्य वक्फ बोर्डों में रिकॉर्ड डिजिटलीकरण और संपत्ति विकास को बढ़ावा मिला है। वहीं हज यात्रा प्रबंधन वर्ष 2016 से अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत आ गया है। वर्ष 2023-24 में हज यात्रा पर 83.51 करोड़ रुपये खर्च किए गए। ‘हज सुविधा ऐप’ की मदद से यात्रियों को प्रशिक्षण, आवास, उड़ान, सामान, हेल्पलाइन, और शिकायत निवारण की सुविधा मिल रही है। अप्रैल 2025 में 620 हज अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया और दिल्ली में एक हज वॉकाथन भी आयोजित किया गया।

बौद्ध समुदाय के लिए ‘बौद्ध विकास योजना’ के तहत लद्दाख से सिक्किम और दिल्ली तक के क्षेत्रों में 300.17 करोड़ रुपये की लागत से शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और पर्यटन से जुड़ी परियोजनाएं लागू की जा रही हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय, CIHCS और CIBS जैसे संस्थान इन परियोजनाओं को कार्यान्वित कर रहे हैं। वहीं ‘लोक संवर्धन पर्व’ के माध्यम से देशभर के अल्पसंख्यक कारीगरों को दिल्ली और श्रीनगर जैसे स्थानों पर अपनी पारंपरिक कला और उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर दिया गया। जुलाई 2024, जनवरी 2025 और अप्रैल 2025 में ये आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुए। इस दौरान कारीगरों के लिए डिजाइन, मार्केटिंग, जीएसटी, बिक्री और ऑनलाइन व्यापार जैसे विषयों पर प्रशिक्षण भी आयोजित किया गया। अल्पसंख्यक समुदायों की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए मंत्रालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय में गुरुमुखी लिपि केंद्र के लिए 25 करोड़ रुपये, मुंबई विश्वविद्यालय में अवेस्ता पहलवी अध्ययन केंद्र के लिए 11.17 करोड़ रुपये और CIHCS के साथ 40 करोड़ रुपये के ढांचागत विकास हेतु समझौता किया है। जैन समुदाय के लिए DAVV इंदौर और गुजरात विश्वविद्यालय में 65 करोड़ रुपये की लागत से दो अध्ययन केंद्रों की स्थापना को भी स्वीकृति मिली है।

गौरतलब है कि इन 11 वर्षों में अल्पसंख्यकों के सशक्तिकरण और समावेशी विकास के लिए सरकार द्वारा चलाए गए योजनाओं ने शिक्षा, आर्थिक अवसर, सांस्कृतिक पहचान और डिजिटल पारदर्शिता को नया आयाम दिया है। वक्फ अधिनियम में संशोधन, ‘UMEED’ पोर्टल का शुभारंभ, और विविध योजनाओं का एकीकृत रूप में संचालन दर्शाता है कि भारत सरकार अल्पसंख्यकों को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।-(PIB)