अनुसंधान एवं विकास के लिए 24 हजार करोड़ रुपए की नई प्रतिबद्धता, पीएम मोदी ने बताई भारत की तकनीकी प्रगति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव 2026’ का उद्घाटन करते हुए कहा कि 21वीं सदी का भारत नई सोच और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत का लक्ष्य केवल नई तकनीकों को अपनाना नहीं, बल्कि देश और दुनिया की समस्याओं के समाधान के लिए नई तकनीक विकसित करना, उनकी दिशा तय करना और वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करना है। उन्होंने वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, स्टार्टअप संस्थापकों और युवाओं से अगले तीन वर्षों के लिए ठोस लक्ष्य निर्धारित करने तथा ऐसे नवाचार विकसित करने का आह्वान किया, जो विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें।

नई तकनीकों में नेतृत्व करने की दिशा में आगे बढ़ रहा भारत

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दुनिया की उपलब्धियों के बाद आगे बढ़ता था। दुनिया में कोई नया नवाचार होने के कुछ साल बाद वह तकनीक भारत पहुंचती थी और देश उसे अपनाता था या उसमें छोटे-मोटे सुधार करता था। लेकिन अब भारत की सोच बदल रही है। देश का लक्ष्य ऐसी तकनीक विकसित करना है, जो वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के साथ वैश्विक समस्याओं के समाधान में भी मदद करे। उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान भारत की वैक्सीन विकसित करने और बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाने की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने दूसरे देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई। मंगलयान मिशन और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र तक पहुंचने की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में नई तकनीकों के विकास और उनके नेतृत्व की क्षमता है।

परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में बढ़ रही आत्मनिर्भरता

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए देश को बड़ी मात्रा में परमाणु ऊर्जा की जरूरत होगी। परमाणु ईंधन के आयात पर निर्भरता ऊर्जा सुरक्षा के सामने चुनौती है। इसे देखते हुए भारत फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है।।उन्होंने बताया कि देश का 500 मेगावाट क्षमता वाला प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कुछ महीने पहले फर्स्ट क्रिटिकलिटी के चरण तक पहुंच चुका है। यह उपलब्धि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की दीर्घकालिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप और स्वदेशी तकनीक की उपलब्धियां

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। एक भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप ने स्वदेशी रॉकेट से अपने पहले ही प्रयास में उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया। भारत ने उपग्रहों की डॉकिंग की क्षमता भी हासिल की है। उन्होंने कहा कि देश के कई स्टार्टअप अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नए समाधान विकसित कर रहे हैं। इस क्षेत्र में युवा वैज्ञानिकों और उद्यमियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। भारत का लक्ष्य महत्वपूर्ण तकनीकों में अपनी क्षमता का विस्तार करना और आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है।

एआई, सेमीकंडक्टर और बैटरी स्टोरेज पर विशेष जोर

पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने इसी वर्ष एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन किया और अपना मॉडल भी लॉन्च किया। भारत में तैयार चिप की पहली खेप भी दुनिया तक पहुंचनी शुरू हो गई है। इसके साथ ही देश बैटरी स्टोरेज के क्षेत्र में ऐसी क्षमता विकसित करने पर काम कर रहा है, जो भारत में उपलब्ध कच्चे माल पर आधारित हो। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा से लेकर अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सेमीकंडक्टर तक अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतें भले ही अलग हों, लेकिन इन सभी में भारत अपनी क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ा रहा है।

बड़े स्तर पर समाधान विकसित करने की भारत में क्षमता

प्रधानमंत्री ने भारत की ‘सॉल्यूशन एट स्केल’ क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में कोई समाधान सफल होता है, तो उससे दुनिया के अनेक देशों की समस्याओं को हल करने का रास्ता खुल सकता है। भारत का डिजिटल स्टैक और 5जी तकनीक इसके उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि भारत ऐसे सुरक्षित तकनीकी समाधान विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिन्हें बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जा सके। विज्ञान और प्रौद्योगिकी को मानवता की सेवा का माध्यम बताते हुए उन्होंने कहा कि किसी तकनीक की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होती कि वह कितनी उन्नत है, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि वह कितनी बड़ी समस्या का समाधान करती है और कितने लोगों के जीवन में बदलाव लाती है।

स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा में तकनीक की अहम भूमिका

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि उभरती विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, कृषि क्षेत्र में बदलाव लाना, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर पैदा करना तथा आपदाओं से बचाव में मदद करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के स्टार्टअप इन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए समाधान विकसित कर रहे हैं। उन्होंने ब्रेन एक्टिविटी को समझने में मदद करने वाली वियरेबल ईईजी तकनीक, स्वदेशी वायरलेस और सैटेलाइट संचार समाधानों, विशेष पोषण संबंधी जरूरतों के लिए तैयार उत्पादों तथा सेमीकंडक्टर तकनीकों का उल्लेख किया। उन्होंने औद्योगिक कचरे के रूप में निकलने वाले स्टील स्लैग के उपयोग के लिए विकसित किए जा रहे समाधानों को भी महत्वपूर्ण बताया।

आईआईटी मद्रास के ब्रेन सेंटर का किया उल्लेख

प्रधानमंत्री ने चेन्नई स्थित आईआईटी मद्रास में आधुनिक ब्रेन सेंटर के उद्घाटन का अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस केंद्र ने ब्रेन इमेजिंग तकनीक का एक ऐसा प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जो दुनिया के लिए मिसाल बन सकता है। यह केंद्र मानव मस्तिष्क की उच्च-रिजॉल्यूशन वाली डिजिटल 3डी तस्वीरें विकसित करने पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस पहल से मस्तिष्क से जुड़ी कई बीमारियों की जटिलताओं को समझने और उनके समाधान खोजने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि विज्ञान का सामाजिक हित में उपयोग और परिवर्तन के लिए तकनीक का विकास ही वैज्ञानिक प्रगति की कसौटी होनी चाहिए।

अनुसंधान के लिए 24 हजार करोड़ रुपए की नई प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसी देश की तकनीकी क्षमता उसके अनुसंधान पर निर्भर करती है। अनुसंधान ही देश को अपनी समस्याओं के समाधान खोजने और महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भर बनने की ताकत देता है। इसी उद्देश्य से अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन को गति दी जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष अनुसंधान, विकास और नवाचार के लिए एक लाख करोड़ रुपए की व्यवस्था करने का संकल्प लिया गया था। इसके तहत पिछले एक वर्ष में ऐसी तकनीकों के लिए करीब 12 हजार करोड़ रुपए की प्रतिबद्धता जताई गई, जो प्रयोगशालाओं से निकलकर बाजार में पहुंचने के लिए तैयार हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, सरकार की ओर से 12 हजार करोड़ रुपए की प्रतिबद्धता के साथ निजी क्षेत्र भी 12 हजार करोड़ रुपए का निवेश कर रहा है। इस तरह अनुसंधान एवं विकास के लिए एक वर्ष में कुल 24 हजार करोड़ रुपए की नई प्रतिबद्धता बनी है।

पेटेंट आवेदनों में भी हुई उल्लेखनीय वृद्धि

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत के अनुसंधान तंत्र का लगातार विस्तार हो रहा है। पिछले एक दशक में पेटेंट आवेदनों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दस वर्ष पहले देश में एक साल में 50 हजार से कम पेटेंट आवेदन दाखिल होते थे, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या करीब डेढ़ लाख तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े केवल संख्या में वृद्धि नहीं दर्शाते, बल्कि इस बात का संकेत हैं कि भारत में अनुसंधान और नवाचार एक मजबूत संस्कृति के रूप में विकसित हो रहे हैं।

एआई के दौर में वैज्ञानिक सोच और स्वतंत्र निर्णय जरूरी

प्रधानमंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में वैज्ञानिक निर्णय क्षमता विकसित करना महत्वपूर्ण हो गया है। वैज्ञानिक वर्षों के अनुभव, प्रयोगों, छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान और असफलताओं से सीखकर अपनी समझ विकसित करते हैं। वैज्ञानिक केवल उपलब्ध जानकारी को दोहराते नहीं, बल्कि स्थापित मान्यताओं पर सवाल उठाते हैं और समस्याओं को नए दृष्टिकोण से देखते हैं। उन्होंने कहा कि एआई नियमित कार्यों को तेजी से पूरा कर अनुसंधान की उत्पादकता बढ़ा सकता है। हालांकि, यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि एआई वैज्ञानिकों की स्वतंत्र सोच को सीमित करने के बजाय उसे और समृद्ध बनाए। एआई से बचने वाले समय का इस्तेमाल चुनौतीपूर्ण समस्याओं पर काम करने, नए प्रयोग करने और विचारों को परखने में किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई तेजी से जवाब दे सकता है, लेकिन उन जवाबों की सत्यता परखने की जिम्मेदारी वैज्ञानिकों की ही रहेगी।

क्वांटम तकनीक, रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा पर जोर

पीएम मोदी ने कहा कि सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा और अगली पीढ़ी के संचार जैसे क्षेत्र भविष्य को आकार देंगे। भारत इन क्षेत्रों में मजबूत वैज्ञानिक आधार तैयार कर रहा है और इसके लिए विभिन्न राष्ट्रीय मिशन शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि नवाचार के साथ सुरक्षा और संरक्षा को भी प्राथमिकता देनी होगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सिंथेटिक बायोलॉजी और स्वायत्त प्रणालियों के क्षेत्र में नए अवसरों के साथ जोखिम भी हैं। एआई के दौर में साइबर सुरक्षा की चुनौतियां बढ़ रही हैं, जिनका असर वित्तीय नेटवर्क से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा तक पड़ सकता है। उन्होंने एआई आधारित और क्वांटम सुरक्षा समाधानों के विकास पर जोर दिया, ताकि देश की व्यवस्थाओं को उभरते साइबर खतरों से सुरक्षित किया जा सके।

अगले तीन वर्षों के लिए ठोस लक्ष्य तय करें युवा

प्रधानमंत्री ने कॉन्क्लेव में मौजूद शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, स्टार्टअप संस्थापकों और युवा विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने लिए स्पष्ट लक्ष्य तय करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रतिभागी को विचार करना चाहिए कि वह अगले तीन वर्षों में कौन-सी तकनीक, प्रोटोटाइप, पायलट परियोजना या उत्पाद विकसित करने में योगदान देगा। उन्होंने कहा कि कॉन्क्लेव केवल विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे ऐसे मंच के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जहां मापने योग्य परिणाम सामने आएं। भारत को ऐसा नवाचार केंद्र बनाना होगा, जो विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के साथ दुनिया की समस्याओं के समाधान में भी योगदान दे।

उभरती तकनीकों में नेतृत्व करे भारत की युवा पीढ़ी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है और उसके पास प्रतिभा तथा कुछ नया करने का संकल्प है। देश को ऐसी पीढ़ी तैयार करनी होगी, जो उभरती विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में केवल भागीदार न बने, बल्कि नेतृत्व भी करे। उन्होंने विश्वास जताया कि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों और युवाओं के सामूहिक प्रयासों से भारत तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में अपनी भूमिका और मजबूत करेगा। उन्होंने कॉन्क्लेव की सफलता की कामना करते हुए युवाओं से आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। (इनपुट: पीआईबी)