आयुष मंत्रालय 10 अप्रैल को ‘विश्व होम्योपैथी दिवस 2026’ के अवसर पर विज्ञान भवन में दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित करेगा। इस कार्यक्रम में होम्योपैथी से जुड़े शोध, स्वास्थ्य योजनाएं और नीतिगत पहल प्रस्तुत की जाएंगी।
Ministry of AYUSH के अनुसार, इस कार्यक्रम का आयोजन सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन होम्योपैथी द्वारा किया जा रहा है। इसमें वैज्ञानिक प्रमाण, नैतिक मानकों और होम्योपैथी को मुख्यधारा की स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल करने पर चर्चा होगी।
इस मंच पर नीति निर्माता, शोधकर्ता और डॉक्टर मिलकर होम्योपैथी की बदलती भूमिका पर विचार करेंगे। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि यह पद्धति कैसे टिकाऊ (sustainable) स्वास्थ्य व्यवस्था बनाने में मदद कर सकती है।
कार्यक्रम में यह भी चर्चा होगी कि होम्योपैथी कैसे जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों और पुरानी बीमारियों के इलाज में उपयोगी हो सकती है, और कैसे इससे दवाओं पर निर्भरता कम की जा सकती है।
इसके साथ ही पर्यावरण के अनुकूल दवा निर्माण, जैव विविधता संरक्षण और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने पर भी फोकस रहेगा।
मंत्रालय का कहना है कि बढ़ते इलाज खर्च, पुरानी बीमारियों के बढ़ते मामलों और एंटीबायोटिक प्रतिरोध जैसी चुनौतियों के बीच होम्योपैथी एक सस्ती और टिकाऊ विकल्प के रूप में उभर सकती है।
इस वर्ष का विषय “सस्टेनेबल हेल्थ के लिए होम्योपैथी” रखा गया है, जो समग्र, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल इलाज को बढ़ावा देता है।
भारत में होम्योपैथी की पहुंच काफी व्यापक है। देश में लगभग 3.45 लाख पंजीकृत होम्योपैथी डॉक्टर, 8,593 डिस्पेंसरी, 277 शैक्षणिक संस्थान और 34 शोध केंद्र मौजूद हैं।
सरकार का मानना है कि इस कार्यक्रम से भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर और मजबूती मिलेगी।
-(इनपुटःएजेंसी)


