भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सूचकांक के अनुसार सितंबर 2024 तक पूरे भारत में डिजिटल पेमेंट में साल-दर-साल 11.1 प्रतिशत की दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। यह जानकारी केंद्रीय बैंक के बयान में दी गई।

आरबीआई ने डिजिटल पेमेंट इंडेक्स में वृद्धि का बताया कारण

ज्ञात हो, सितंबर 2024 के लिए आरबीआई का डिजिटल भुगतान सूचकांक (RBI-DPI) मार्च 2024 के 445.5 से बढ़कर 465.33 पर पहुंच गया। आरबीआई ने कहा कि आरबीआई के डिजिटल भुगतान सूचकांक में वृद्धि इस अवधि के दौरान देश भर में भुगतान बुनियादी ढांचे और भुगतान प्रदर्शन में वृद्धि के कारण हुई।

सूचकांक अर्ध-वार्षिक आधार पर किया जाता है प्रकाशित 
आरबीआई 1 जनवरी, 2021 से मार्च 2018 को आधार मानकर देश भर में भुगतान के डिजिटलीकरण की सीमा को मापने के लिए एक समग्र आरबीआई-डिजिटल भुगतान सूचकांक प्रकाशित कर रहा है। सूचकांक अर्ध-वार्षिक आधार पर प्रकाशित किया जाता है।

सूचकांक में पांच पैरामीटर शामिल

सूचकांक में पांच पैरामीटर शामिल हैं जो विभिन्न अवधियों में देश में डिजिटल भुगतान की गहनता और पैठ को मापने में सक्षम बनाते हैं। ये पैरामीटर हैं भुगतान सक्षमकर्ता (भार 25 प्रतिशत); भुगतान अवसंरचना – मांग-पक्ष कारक (10 प्रतिशत); भुगतान अवसंरचना – आपूर्ति-पक्ष कारक (15 प्रतिशत); भुगतान प्रदर्शन (45 प्रतिशत); और उपभोक्ता केंद्रितता (5 प्रतिशत)। 
 
भारत में डिजिटल भुगतान की वृद्धि में सबसे महत्वपूर्ण योगदानकर्ता यूपीआई
 
आरबीआई ने इस सप्ताह की शुरुआत में एक रिपोर्ट में बताया था कि यूपीआई अपनी उपयोगिता और उपयोग में आसानी के कारण भारत में डिजिटल भुगतान की वृद्धि में सबसे महत्वपूर्ण योगदानकर्ता रहा है। 
 
यूपीआई की हिस्सेदारी 2019 में 34 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 83 प्रतिशत हुई
 
रिपोर्ट के अनुसार, देश के डिजिटल भुगतान में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) की हिस्सेदारी 2019 में 34 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 83 प्रतिशत हो गई है, जिसमें पिछले पांच वर्षों में 74 प्रतिशत की उल्लेखनीय सीएजीआर (संचयी औसत वृद्धि दर) है। इसके विपरीत, डिजिटल भुगतान की मात्रा में आरटीजीएस, एनईएफटी, आईएमपीएस, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड आदि जैसी अन्य भुगतान प्रणालियों की हिस्सेदारी इसी अवधि के दौरान 66 प्रतिशत से घटकर 17 प्रतिशत रह गई।

यूपीआई लेनदेन की मात्रा 

वृहद स्तर पर, यूपीआई लेनदेन की मात्रा 2018 में 375 करोड़ से बढ़कर 2024 में 17,221 करोड़ हो गई, जबकि लेनदेन का कुल मूल्य 2018 में ₹5.86 लाख करोड़ से बढ़कर 2024 में ₹246.83 लाख करोड़ हो गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मात्रा और मूल्य के मामले में क्रमशः 89.3 प्रतिशत और 86.5 प्रतिशत की पांच साल की सीएजीआर है। (इनपुट-आईएएनएस)

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