आतंक पर चोट के बाद पाक के सुर में सुर मिलाने वालों पर भारत की ‘आर्थिक स्ट्राइक’

‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना’, इस कहावत को आज के हालातों पर लागू करें तो इसमें अब्दुल्ला की जगह तुर्किए, चीन, अजबरबैजान और बांग्लादेश पढ़ सकते हैं। लड़ाई हुई भारत और पाकिस्तान के बीच और बिना बात के बीच में कूद पड़े ये देश और नतीजा यह हुआ कि खुद ही बड़ी कीमत चुका रहे हैं। भारत ने जो कहा वो एक बार फिर करके दिखा दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान को करारा जवाब देने के बाद अब उसका साथ देने वाले देशों को भी सबक सिखाया जा रहा है।

अहसान फरामोश तुर्किए

2023 में जब तुर्किए भयंकर भूकंप से कांप उठा था तब सबसे पहले मदद के हाथ भारत ने बढ़ाए। ‘ऑपरेशन दोस्त’ के तहत भारतीय राहत दल, फील्ड हॉस्पिटल, दवाएं और रेस्क्यू टीमें तुर्किए पहुंची थीं। यह भारत के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना का जीवंत प्रमाण था। लेकिन जब भारत को समर्थन की अपेक्षा थी, तब तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने पाकिस्तान का खुलकर समर्थन कर दिया और ‘पाक-तुर्क दोस्ती जिंदाबाद’ का नारा देते हुए परोक्ष रूप से आतंकवाद को समर्थन करने लगे। यही नहीं, भारत पर जिन ड्रोन हमलों की खबरें सामने आईं, उनमें अधिकतर ड्रोन तुर्किए निर्मित थे।

जनता ने लिया संकल्प

इस हरकत के बाद भारतीय नागरिकों ने तुर्किए और अजरबैजान को करारा जवाब दिया है। सोशल मीडिया पर #BoycottTurkey ट्रेंड करने लगा और हजारों भारतीय पर्यटकों ने तुर्किए और अजरबैजान की यात्रा रद्द कर दी। मात्र 6 दिनों में ही 50% से अधिक बुकिंग कैंसिल हो गई। आंकड़े बताते हैं कि 2023 में 3.3 लाख भारतीयों ने तुर्किए की यात्रा की थी -जो 2014 के मुकाबले लगभग तीन गुना है। अजरबैजान में 2024 में 13% पर्यटक भारतीय थे, जो पिछले साल की तुलना में 108% की वृद्धि दर्शाता है। दोनों देशों को मिलाकर भारतीयों ने लगभग 4,000 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा वहां की अर्थव्यवस्था में डाली थी।

दिन में तारे नजर आए

जनता ही नहीं भारत के कई उद्योगपति भी खुलकर बोल रहे हैं कि इन देशों की अर्थव्यवस्था को हमारे पर्यटन से बल मिला और बदले में हमें मिली उपेक्षा। इसके बाद सरकारी और कारोबारी फैसलों का तुर्किए को गहरा झटका लगा है। सरकार और उद्योग जगत भी इस जनभावना के साथ खड़े हो गए। भारत सरकार ने Turkish कंपनी Celebi की सुरक्षा मंजूरी रद्द कर दी, जो भारत के कई एयरपोर्ट्स पर ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएं देती थी। इसके बाद मुंबई और अहमदाबाद एयरपोर्ट्स से इसके कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिए गए। दिल्ली एयरपोर्ट पर GMR ने भी Celebi से हाथ खींच लिए। इन फैसलों से तुर्किए को दिन में तारे नजर आ रहे हैं।

व्यापार बंद होने की कगार पर

दिल्ली की आजादपुर मंडी, जो एशिया की सबसे बड़ी फल मंडी है, वहां के व्यापारियों ने भी तुर्की से सेब का आयात रोक दिया है। 2024 में तुर्किए से भारत में 1.16 लाख टन सेब आया था अब यह व्यापार बंद होने की कगार पर है। मार्बल कारोबार भी प्रभावित हुआ है। भारत हर साल 14 लाख मीट्रिक टन मार्बल आयात करता है, जिसमें से 10 लाख मीट्रिक टन अकेले तुर्किए से आता था। यह लगभग 2,500 करोड़ रुपए का व्यापार है, जिसे अब भारतीय व्यापारियों ने बंद करने की घोषणा कर दी है। वहीं दिल्ली के दो प्रमुख विश्वविद्यालय JNU और जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने तुर्किए के साथ सभी शैक्षणिक सहयोग रद्द कर दिए हैं। इसके साथ ही भारतीय एयरलाइंस भी तुर्किए की एयरलाइंस के साथ कोड-शेयरिंग समझौते खत्म कर सकती है।

बांग्लादेश पर भी आर्थिक स्ट्राइक

तुर्किए के अलावा बांग्लादेश भी इस गलती का खामियाजा भुगतने वाला है। बांग्लादेश को करीब 6581 करोड़ रुपये यानी लगभग 9,367 करोड़ बांग्लादेशी टका का नुकसान होने वाला है। भारत ने बांग्लादेश के कई सामानों के लिए भारतीय लैंड पोर्ट्स को बैन कर दिया है। इस फैसले के बाद बांग्लादेश लैंड पोर्ट के बजाय सी पोर्ट के जरिए ही एक्सपोर्ट कर पाएगा। इससे उसकी एक्सपोर्ट कॉस्ट बढ़ेगी यानी बांग्लादेश पर सीधी आर्थिक चोट होगी।

भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का करारा जवाब

ये तो महज कुछ उदाहरण हैं इसके अलावा भी कई स्तरों पर तुर्किए और अजरबैजान को भारत की ओर से झटके मिल रहे हैं। इन घटनाओं से साफ हो गया है कि भारत अब अपनी साख पर कोई समझौता नहीं करेगा। 140 करोड़ लोगों की एकता जब एक संकल्प ले लेती है, तो वह किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और डिप्लोमैसी को हिला सकती है। भारत अब न केवल आर्थिक शक्ति है, बल्कि यह ‘नए भारत’ की वो तस्वीर है जो अपने स्वाभिमान पर किसी भी कीमत पर आंच नहीं आने देता।


-(वरिष्ठ पत्रकार अमित शर्मा की राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राजनीतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ है।)

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