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भारतीय चिकित्सा पद्धति में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए NRDC और NCISM के बीच समझौता

राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (NRDC) और भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) ने भारतीय चिकित्सा प्रणाली में नवाचार, बौद्धिक संपदा (आईपी) प्रबंधन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और अनुसंधान के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह समझौता NRDC के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कमोडोर (सेवानिवृत्त) अमित रस्तोगी और NCISM की अध्यक्ष डॉ. मनीषा कोठेकर के बीच हुआ। इस अवसर पर आयुर्वेद बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. अल्लमप्रभु गुड्डा, यूनानी, सिद्ध एवं सोवा-रिग्पा बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. असीम अली खान, आयुर्वेद बोर्ड के सदस्य डॉ. अतुल बाबू वार्ष्णेय तथा दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

समझौते के तहत NCISM से संबद्ध संस्थानों और भारतीय चिकित्सा पद्धति के पंजीकृत चिकित्सकों द्वारा विकसित नवाचारों और बौद्धिक संपदा की पहचान, संरक्षण, विकास और व्यावसायीकरण के लिए एक व्यापक सहयोग तंत्र तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में अनुसंधान को उद्योग और बाजार से जोड़कर नवाचार आधारित विकास को बढ़ावा देना है।

इस साझेदारी के तहत NRDC पेटेंट और ट्रेडमार्क पंजीकरण, बौद्धिक संपदा संरक्षण, प्रौद्योगिकी मूल्यांकन, लाइसेंसिंग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, उद्योगों से साझेदारी और नई तकनीकों के व्यावसायीकरण में अपनी विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा। साथ ही नवाचारकर्ताओं को मार्गदर्शन, इनक्यूबेशन सहायता, उद्योग-प्रायोजित अनुसंधान तथा प्रभावी आईपी प्रबंधन और व्यावसायीकरण रणनीति तैयार करने में सहयोग देगा।

वहीं NCISM अपने अधीन संस्थानों, रिसर्च, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट (RIED) सेल और देशभर के पंजीकृत चिकित्सकों के साथ NRDC के समन्वय को बढ़ावा देगा। संस्थान-विशिष्ट तकनीकी, व्यावसायिक और वित्तीय सहयोग संबंधित संस्थानों तथा नवाचारकर्ताओं के साथ सीधे किया जाएगा।

यह सहयोग बौद्धिक संपदा की पहचान और संरक्षण, पेटेंट एवं ट्रेडमार्क आवेदन, नवाचार परामर्श, उद्यमिता विकास, संस्थागत आईपी नीति निर्माण, क्षमता निर्माण कार्यक्रम, नवाचार जागरूकता अभियान, आइडियाथॉन, हैकाथॉन, प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी, उद्योग संवाद और सफल अनुसंधान कार्यों के प्रसार जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करेगा।

इसके अलावा शैक्षणिक और नैदानिक अनुसंधान को प्रमाणित उत्पादों, तकनीकों और स्वास्थ्य सेवाओं में बदलने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि स्वास्थ्य क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के साथ भारतीय चिकित्सा प्रणाली में नवाचार आधारित पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया जा सके।

इस अवसर पर कमोडोर (सेवानिवृत्त) अमित रस्तोगी ने कहा कि यह साझेदारी भारतीय चिकित्सा प्रणाली में कार्यरत शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं के लिए मजबूत सहयोग तंत्र तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि NRDC की बौद्धिक संपदा प्रबंधन और प्रौद्योगिकी व्यावसायीकरण संबंधी विशेषज्ञता अनुसंधान को उपयोगी तकनीकों में बदलने में मदद करेगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती देगी।

वहीं डॉ. मनीषा कोठेकर ने कहा कि यह समझौता NCISM से संबद्ध संस्थानों में अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा देगा। वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार प्रबंधन और व्यावसायीकरण सहायता के समन्वय से शोधकर्ताओं, शिक्षकों और चिकित्सकों को भारत की पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान पर आधारित प्रमाण-आधारित स्वास्थ्य समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

-(इनपुटःएजेंसी)

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