एआई, परमाणु, अंतरिक्ष और क्वांटम प्रौद्योगिकियां तय करेंगी भविष्य के विकास की दिशा : डॉ. जितेंद्र सिंह

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), परमाणु, अंतरिक्ष और क्वांटम प्रौद्योगिकियां भविष्य के विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की रूपरेखा तय करेंगी। उन्होंने कहा कि भारत इन अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में तेजी से अग्रणी देशों की कतार में शामिल हो रहा है।

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन ने समय से पहले हासिल की बड़ी उपलब्धियां

एक प्रमुख समाचार चैनल द्वारा आयोजित मीडिया सम्मेलन के दौरान अनौपचारिक बातचीत में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2023 में शुरू किए गए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (एनक्यूएम) ने तीन वर्षों के भीतर अपने निर्धारित लक्ष्यों में से आधे से अधिक हासिल कर लिए हैं। उन्होंने कहा कि भारत क्वांटम-सुरक्षित संचार, क्वांटम कंप्यूटिंग और संबंधित अनुसंधान क्षेत्रों में तेज गति से आगे बढ़ रहा है। क्वांटम-सुरक्षित संचार रक्षा, रणनीतिक संचार, साइबर सुरक्षा और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।

भविष्य की वैश्विक व्यवस्था में होगी निर्णायक भूमिका

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष, परमाणु और क्वांटम प्रौद्योगिकियां भविष्य की वैश्विक व्यवस्था, आर्थिक विकास, रणनीतिक शक्ति और भू-राजनीतिक स्थिति को प्रभावित करेंगी। उनका कहना था कि जो देश इन क्षेत्रों में पीछे रह जाएंगे, उन्हें विकास और सुरक्षा दोनों मोर्चों पर नुकसान उठाना पड़ सकता है।

हर क्षेत्र में जरूरी उपकरण बन रही है एआई

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर बोलते हुए मंत्री ने कहा कि एआई शासन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, अनुसंधान और सार्वजनिक सेवा वितरण सहित लगभग हर क्षेत्र में एक आवश्यक उपकरण बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत डिजिटल अवसंरचना, कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा संसाधनों और भरोसेमंद ऊर्जा प्रणालियों को मजबूत करने के लिए लगातार निवेश कर रहा है।

अंतरिक्ष और परमाणु क्षेत्र में सुधारों से बढ़े अवसर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किए गए नीतिगत सुधारों ने नवाचार, उद्यमिता और वैज्ञानिक प्रगति को नई गति दी है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने से स्टार्टअप ईकोसिस्टम को बढ़ावा मिला है, जबकि परमाणु क्षेत्र में हाल की नीतिगत पहलों से निवेश, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण को मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि देश की बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और डेटा केंद्रों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में परमाणु ऊर्जा की भूमिका लगातार बढ़ेगी।

एनईपी 2020 ने शिक्षा और अनुसंधान को दी नई दिशा

शिक्षा सुधारों पर बोलते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को परिवर्तनकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस नीति ने छात्रों को बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। इससे नवप्रवर्तकों, उद्यमियों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार होगी और देश का अनुसंधान ईकोसिस्टम और मजबूत बनेगा।

2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को मिलेगी मजबूती

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत सरकार अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में सरकार, शिक्षा जगत, उद्योग और स्टार्टअप के बीच सहयोगात्मक ईकोसिस्टम विकसित कर रही है। उन्होंने युवाओं से वैज्ञानिक सोच अपनाने और भारत के तकनीकी परिवर्तन में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उनका कहना था कि शिक्षा, अनुसंधान, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और उभरती प्रौद्योगिकियों में किए जा रहे सुधार 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र और दुनिया की अग्रणी नवाचार-संचालित अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने की मजबूत नींव तैयार करेंगे। (इनपुट: पीआईबी)

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