AI को पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर किया जाना चाहिए डिजाइन: अमिताभ कांत

नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026’ के दौरान पूर्व नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की तरह डिजाइन और संचालित किया जाना चाहिए, ताकि इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

“एआई फॉर द नेक्स्ट बिलियन” सत्र में बोलते हुए उन्होंने कहा कि एआई सुलभ, किफायती, बहुभाषी और जवाबदेह होना चाहिए। उनका मानना है कि यदि एआई केवल सीमित वर्ग तक ही पहुंचता है, तो उसका उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।

कांत ने जोर देकर कहा कि तकनीक तभी सार्थक है जब वह कम आय वाले लोगों, कम इंटरनेट सुविधा वाले क्षेत्रों, गैर-अंग्रेजी भाषी नागरिकों, महिलाओं, किसानों, एमएसएमई और फ्रंटलाइन कर्मियों के लिए उपयोगी हो। यदि एआई इन वर्गों की जरूरतों को पूरा नहीं करता, तो उसे सफल तकनीक नहीं माना जा सकता।

उन्होंने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तकनीक को बड़े पैमाने और समावेशी दृष्टिकोण से तैयार किया जाता है, तो वह समाज में व्यापक बदलाव ला सकती है।

कांत के अनुसार, यदि एआई को भरोसे के साथ संचालित किया जाए और बड़े पैमाने पर लागू किया जाए, तो यह आने वाली पीढ़ी के लिए सबसे प्रभावी समावेशन उपकरण बन सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पास दुनिया के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करने का अवसर है। भारत ऐसी एआई प्रणाली विकसित कर सकता है जो लोगों के केंद्र में हो और वैश्विक स्तर पर एक मानक स्थापित करे।

कुल मिलाकर, कांत ने स्पष्ट किया कि एआई क्रांति का लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे देश के करोड़ों नागरिकों तक पहुंचाना ही असली लक्ष्य होना चाहिए।

-(इनपुटःएजेंसी)