प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने हिन्दी सहित सभी भारतीय भाषाओं के प्रसार, संरक्षण और आधुनिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अनेक दूरगामी कदम उठाए हैं। हिंदी को प्रशासन, शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय संवाद का प्रभावी माध्यम बनाने की दिशा में योजनाएं लागू की गई हैं। हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए हिंदी विभाग, केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो, वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग, तथा विविध केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा समय-समय पर अभियान चलाए गए हैं। डिजिटल प्लेटफाॅर्म पर हिंदी सामग्री को बढ़ावा देने के लिए ‘हिंदी ई-लाइब्रेरी’, ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान के तहत हिंदी पोर्टल, मोबाइल ऐप और ई-गवर्नेंस सेवाएं विकसित की गई हैं। सरकारी वेबसाइटों, ई-फॉर्म, सार्वजनिक संचार और प्रशासनिक आदेशों में हिंदी के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिन्दी में संबोधन कर इसे वैश्विक पहचान दिलाई है। ‘अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन’ को नई ऊर्जा मिली है। साथ ही, नई शिक्षा नीति 2020 में त्रिभाषा सूत्र के माध्यम से भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी को प्राथमिकता देने की नीति अपनाई गई। विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों में हिंदी में अध्ययन और शोध को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इस प्रकार सरकार का प्रयास है कि हिंदी आधुनिक युग में ज्ञान-विज्ञान, व्यापार और तकनीकी संवाद की भाषा बने और भारतीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान करे।
भारत एक प्राचीन सभ्यता वाला देश है, जहां विविध भाषाएं, अलग-अलग संस्कृतियां और अनेक परंपराएं मिलकर हमारी असली पहचान बनाती हैं। लेकिन केवल भौगोलिक सीमाएं किसी राष्ट्र को महान नहीं बनातीं। राष्ट्र की असली शक्ति उसकी भाषा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों में निहित होती है, जिस पर हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का विशेष जोर है। यदि हम अपनी भाषाओं का सम्मान करें, संस्कृति को अपनाएं और नैतिकता को जीवन में उतारें, तो हम एक मजबूत, आत्मनिर्भर और प्रगतिशील भारत का निर्माण कर सकते हैं।
भाषा-विचारों की अभिव्यक्ति और अवसरों की कुंजी
भाषा मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत है। भाषा से ही हम अपने विचार, अनुभव और भावनाएं दूसरों तक पहुंचाते हैं। भारत में हिंदी एवं कई क्षेत्रीय भाषाएं बोली जाती हैं। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, विज्ञान, तकनीक और व्यापार में भी विकास का द्वार है। आज वैश्विक स्तर पर अंग्रेजी का प्रभाव बढ़ा है, फिर भी मातृभाषा और हिन्दी का महत्व कम नहीं हुआ है। हमारी भाषाओं में ज्ञान, लोक अनुभव, कला और साहित्य का खजाना छिपा है। यदि हम भाषा को सही तरीके से प्रयोग करें, उसे समृद्ध करें और त्रिभाषा सूत्र के तहत बच्चों को बहुभाषी बनाएं, तो वे न केवल शिक्षित होंगे, बल्कि आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी भी बनेंगे।
संस्कृति-पहचान का आधार
संस्कृति हमारी जड़ों से जुड़ने का माध्यम है। यह हमें बताती है कि हम कौन हैं, हमारी परंपराएं क्या हैं, और हमारे जीवन मूल्य क्या हैं। त्योहारों, लोकगीतों, नृत्यों, कला रूपों और खान-पान के साथ हमारी संस्कृति हमें जोड़ती है। जब हम अपनी संस्कृति को अपनाते हैं, तब हमें गर्व और आत्मीयता का अनुभव होता है। साथ ही, यह हमें विविधता का सम्मान करना सिखाती है। एक ऐसा भारत जहां प्रत्येक भाषा और संस्कृति को समान अवसर और सम्मान दिया जाए, वहीं सशक्त भारत का निर्माण संभव है। सांस्कृतिक संवाद से आपसी समझ बढ़ती है और समाज में भाईचारा स्थापित होता है।
नैतिकता-समाज की रीढ़
नैतिकता समाज का वह आधार है, जिस पर विश्वास और सहयोग की इमारत खड़ी होती है। यदि समाज में सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, करुणा, सेवा भाव और अनुशासन का विकास होगा, तभी एक स्वस्थ और संतुलित समाज बन सकता है। भाषा और संस्कृति तभी फलती-फूलती है जब समाज में नैतिकता का पालन होता है। शिक्षा में चरित्र निर्माण को प्राथमिकता देना, परिवार में बच्चों को अच्छे संस्कार देना और सामाजिक जीवन में आपसी सम्मान को बढ़ावा देना ये सब नैतिकता को मजबूत करते हैं।
भाषा, संस्कृति और नैतिकता-तीनों का समन्वय
जब भाषा हमें विचार व्यक्त करना सिखाती है, संस्कृति हमें पहचान देती है और नैतिकता हमें सही दिशा देती है, तब एक संतुलित और विकसित समाज का निर्माण होता है। त्रिभाषा सूत्र के माध्यम से बहुभाषी समाज बनेगा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान से विविधता का सम्मान होगा और नैतिक शिक्षा से समाज में विश्वास बढ़ेगा। यही मेरी प्रेरणा है – “आजीविका के लिए भाषा, पहचान के लिए हमारी संस्कृति और समाज के लिए नैतिकता।” हम सब मिलकर इसे जीवन में उतारें।
संकल्प
आइए हम संकल्प लें कि अपनी मातृभाषा और हिन्दी का सम्मान करेंगे, भाषा की गुणवत्ता बढ़ाएंगे, अपनी संस्कृति को संरक्षित करेंगे और नैतिक मूल्यों को अपने व्यवहार में अपनाएंगे। इससे न केवल हमारा व्यक्तिगत जीवन बेहतर होगा, बल्कि भारत विश्व में एक मजबूत, शिक्षित, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और नैतिक राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा।
हमारे भारत की महानता और बढ़ेगी , जब हम भाषा से विचारों को ताकत देंगे, संस्कृति से पहचान को संवारेंगे और नैतिकता से समाज को दिशा देंगे। आइए, इस पथ पर चलें और मिलकर एक उज्ज्वल भारत का निर्माण करें। आइए, हिंदी में संवाद करें।
-(लेखक डॉ. बीरबल झा हिंदी एवं अंग्रेजी के प्रसिद्ध साहित्यकार हैं)


