अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 25% टैरिफ और 27 अगस्त से अतिरिक्त 25% टैरिफ की योजना पर दिग्गज अमेरिकी निवेशक जिम रोजर्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। रोजर्स ने कहा कि ट्रंप को न तो विश्व की समझ है और न ही भारत और एशिया में हो रहे बदलावों की जानकारी।

भारत की आर्थिक प्रगति पर जोर

रोजर्स ने कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को टैरिफ लगाकर भारत-अमेरिका व्यापार और निवेश संबंधों को नुकसान पहुंचाने के बजाय, नई दिल्ली के साथ व्यापार बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, “ट्रंप सुबह टीवी देखकर फैसले लेते हैं। उन्हें भारत और एशिया में हो रहे बदलावों की समझ नहीं है।”

2030 तक 500 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

रोजर्स ने कहा कि यदि ट्रंप भारत और अमेरिका को करीब लाने के लिए प्रयास करें, तो 2030 तक आपसी व्यापार 500 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जैसा कि पीएम नरेंद्र मोदी और ट्रंप ने कल्पना की। उन्होंने भारत में आर्थिक सोच के बदलाव की सराहना की, जहां समृद्धि और सफलता को अब सकारात्मक माना जा रहा है। रोजर्स ने कहा, “भारत एक रोमांचक अर्थव्यवस्था बन सकता है, जो भविष्य में चीन से भी बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।”

मुक्त व्यापार समझौतों की वकालत

रोजर्स ने मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) को भारत और विश्व के लिए फायदेमंद बताया। भारत ने 13 एफटीए पर हस्ताक्षर किए हैं और भारत-यूरोपीय संघ, भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईसीए, भारत-पेरू, भारत-श्रीलंका ईटीसीए, और भारत-ओमान एफटीए पर बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा, “मुक्त व्यापार विदेशी निवेशकों के लिए रोमांचक होगा।”

टैरिफ का विवाद और भारत की स्थिति

ट्रंप ने रूसी तेल आयात और उच्च व्यापारिक बाधाओं के लिए भारत पर 50% टैरिफ लगाया है, जिसे भारत ने “अनुचित” बताया। भारत का कहना है कि रूसी तेल आयात उसकी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा जरूरतों के लिए जरूरी है, जो 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद शुरू हुआ। विपक्षी नेता राहुल गांधी ने इसे “आर्थिक ब्लैकमेल” करार दिया। भारत ने कुछ अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क कम किए, लेकिन कृषि और डेयरी क्षेत्र में रियायत देने से इनकार किया है।

भारत की जवाबी रणनीति

विश्लेषकों का मानना है कि भारत डब्ल्यूटीओ में जवाबी शुल्क प्रस्तावित कर सकता है। रोजर्स की टिप्पणियां भारत की आर्थिक संभावनाओं और मुक्त व्यापार की वकालत करती हैं, जबकि टैरिफ को गलत नीति बताती हैं। भारत रणनीतिक रूप से अपनी आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को बनाए रखने की दिशा में काम कर रहा है। (इनपुट-एजेंसी)