वैश्विक चुनौतियों और आर्थिक उथल-पुथल के बीच भारत 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की तैयारी में जुटा है। विदेश मामलों के जाने-माने विशेषज्ञ और जेएनयू के प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली ने भारत की अगुवाई की तारीफ करते हुए कहा है कि नई दिल्ली समूह को विकेंद्रीकृत और व्यावहारिक विकास एजेंडे की ओर ले जा रही है।
नया फॉर्मेट: सिर्फ शिखर सम्मेलन नहीं, बिजनेस और सिविल सोसाइटी तक जुड़ाव
प्रोफेसर कोंडापल्ली ने बताया कि यह भारत की ब्रिक्स मेजबानी का चौथा अवसर है। इस बार कृषि, स्टार्टअप, जलवायु वित्तपोषण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर खास ध्यान दिया जा रहा है, ताकि ग्लोबल साउथ की अर्थव्यवस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय झटकों से बचाया जा सके। उन्होंने कहा, “यह एक नया फॉर्मेट है जिसे भारत अपनाने की कोशिश कर रहा है—कई केंद्रीकृत पहलों की तुलना में एक विकेंद्रीकरण प्रक्रिया।” नई दिल्ली सहयोग को शीर्ष नेतृत्व वाले शिखर सम्मेलनों से आगे बढ़ाकर बिजनेस-टू-बिजनेस और सिविल सोसाइटी स्तर तक ले जा रही है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत की पिछली अध्यक्षता के दौरान 2016 में न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) की स्थापना जैसी ठोस उपलब्धियां हासिल हुई थीं।
वैश्विक संकटों के बीच विकास दर बनाए रखने का फोकस
संघर्षों और सप्लाई चेन व्यवधानों के कारण उभरते बाजारों तथा विकासशील देशों को व्यापार में गिरावट और वित्तीय झटकों का सामना करना पड़ रहा है। प्रोफेसर कोंडापल्ली के अनुसार, भारत का एजेंडा व्यापार मजबूती, कृषि क्षेत्र को मजबूत करने, स्टार्टअप निवेश फंड और जलवायु वित्त जैसे क्षेत्रों पर जोर देकर इन चुनौतियों के बीच विकास दर बनाए रखने पर केंद्रित है।
विस्तार और तालमेल के बीच संतुलन जरूरी
समूह के तेजी से विस्तार पर चर्चा करते हुए कोंडापल्ली ने कहा कि ब्रिक्स में बढ़ती दिलचस्पी इसके आकर्षण को दर्शाती है। 2009 में दक्षिण अफ्रीका शामिल हुआ, 2024 के जोहान्सबर्ग सम्मेलन में छह देशों को आमंत्रित किया गया जिनमें से पांच शामिल हुए, और पिछले साल इंडोनेशिया जुड़ने से सदस्यों की संख्या करीब 11 हो गई है। इसके अलावा 10 पार्टनर देश भी हैं। करीब तीन साल पहले रूस के विदेश मंत्री ने बताया था कि 41 देश सदस्यता के लिए आवेदन कर रहे थे, इसलिए और करीब 30 देश कतार में हो सकते हैं।
हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि बिना सोच-समझ के विस्तार से आम सहमति और संस्थागत मजबूती मुश्किल हो सकती है। अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कुछ सहयोगी देशों पर उनके विकासशील स्वरूप और क्षेत्रीय महत्व को देखते हुए विचार किया जा सकता है।
अंतर-महाद्वीपीय संगठन के रूप में ब्रिक्स की अनोखी पहचान
प्रोफेसर कोंडापल्ली ने कहा कि पिछले दो दशकों में ब्रिक्स ने खुद को संयुक्त राष्ट्र के अलावा एकमात्र अंतर-महाद्वीपीय संगठन के रूप में स्थापित किया है, जिसमें दक्षिण अमेरिका, एशिया, अफ्रीका और यूरोप के सदस्य शामिल हैं। समूह का महत्व ग्लोबल साउथ पर फोकस के साथ स्वास्थ्य, साक्षरता और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में प्रयासों में भी निहित है। न्यू डेवलपमेंट बैंक और कंटिंजेंसी रिजर्व फंड इसकी प्रमुख संस्थागत उपलब्धियां हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे की जरूरतों के लिए और अधिक वित्तपोषण की आवश्यकता होगी।
2026 की थीम: मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता
भारत की इस अध्यक्षता की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है, जो लोगों पर केंद्रित और मानवता को प्राथमिकता देने वाले दृष्टिकोण को दर्शाती है। प्रोफेसर कोंडापल्ली का मानना है कि नई दिल्ली शिखर सम्मेलन विकासशील दुनिया में संस्थागत मजबूती और व्यावहारिक क्षमता निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक बनेगा। (इनपुट-एजेंसी)


