फुटबॉल के मैदान से दिल जीतने की कोशिश : बंगाल के युवाओं के दिल को छूने के लिए भाजपा का ‘नरेंद्र कप’ मास्टर स्ट्रोक

पश्चिम बंगाल में चल रही राजनैतिक उठापटक के बीच जहां टीएमसी बंगाली भाषा आंदोलन को ढाल बना रही है तो वहीं भाजपा ने युवाओं के हृदय तक पहुंचने का रास्ता ढूंढ लिया है। भाजपा युवाओं की धड़कन माने जाने वाले फुटबॉल को आधार बनाकर एक बड़े सांस्कृतिक और राजनीतिक कार्यक्रम की शुरुआत करने जा रही है।

भाजपा ने राज्यव्यापी फुटबॉल टूर्नामेंट आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिसका नाम  “नरेंद्र कप” रखा गया है। खास बात यह है कि यह कप न केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से जुड़ा है बल्कि बंगाल के महान संत स्वामी विवेकानंद के नाम से भी, जिनका वास्तविक नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। यह दोहरा संदर्भ सीधे बंगाल की भावनाओं से जुड़ता है, एक तरफ राष्ट्र की आत्मा को जगाने वाले स्वामी विवेकानंद और दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी, जिन्हें भाजपा युवाओं का मार्गदर्शक बताती है।

इस कप का शुभारंभ 11 सितम्बर को जगह-जगह पर किया गया। यह वही दिन है जब 1893 में शिकागो के विश्व धर्म महासभा में स्वामी विवेकानंद ने ऐतिहासिक भाषण दिया था। यानी आयोजन की तारीख भी बंगाल की अस्मिता और गौरव से गहराई से जुड़ी हुई है। भाजपा की योजना है कि राज्य के 1,344 मंडलों से एक-एक टीम बने और लगभग 20,000 युवा खिलाड़ी (18 से 35 वर्ष आयु वर्ग) इस प्रतियोगिता में हिस्सा लें। इसका संचालन भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) के अध्यक्ष व भाजपा नेता कल्याण चौबे की देखरेख में होगा ताकि पूरे आयोजन को तकनीकी और पेशेवर रूप दिया जा सके।

भाजपा की रणनीति बेहद दिलचस्प है। पार्टी ने तय किया है कि इस प्रतियोगिता को सीधे अपने राजनीतिक बैनर तले नहीं दिखाया जाएगा, बल्कि इसे खेल और संस्कृति का उत्सव बनाकर पेश किया जाएगा। खिलाड़ियों के चयन में केवल प्रतिभा को प्राथमिकता दी जाएगी, राजनीति को नहीं। लेकिन बंगाल के संवेदनशील राजनीतिक माहौल में यह सभी जानते हैं कि इस आयोजन का संदेश किस ओर इशारा करता है।

तृणमूल कांग्रेस ने इस कदम पर व्यंग्य किया है। टीएमसी प्रवक्ता कृष्णानु मित्रा ने कहा-“भाजपा को स्वामी विवेकानंद में भी सिर्फ ‘नरेन्द्र’ नाम दिखता है। यह उनका एक और पीआर स्टंट है।’’ लेकिन भाजपा का मानना है कि यह आयोजन बंगाल के युवाओं को जोड़ने और बंगाली अस्मिता पर हो रहे हमलों के आरोपों का जवाब देने का सबसे सशक्त तरीका है।

फुटबॉल बंगाल की धड़कन है। यह खेल राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक सीमाओं से परे जाकर हर तबके को जोड़ता है। हाल ही में ईस्ट बंगाल और मोहुन बागान के मैचों में राजनीतिक नारों और तिरंगे पोस्टरों के जरिए विरोध भी देखने को मिला। ऐसे में भाजपा का ‘नरेंद्र कप’ केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रतिघोषणा भी है।

स्पष्ट है कि भाजपा ने बंगाल के युवाओं के दिल को छूने के लिए यह मास्टर स्ट्रोक चला है। अब देखना होगा कि स्वामी विवेकानंद और प्रधानमंत्री मोदी दोनों के नाम से जुड़े इस कप से भाजपा बंगाल की सियासत में कितना बड़ा गोल दाग पाती है।

-(लेखिका आशिका सिंह का पत्रकारिता जगत में 18 वर्षों का अनुभव है, वर्तमान में वे प्रसार भारती न्यूज सर्विस के साथ जुड़ी हैं)

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