भारत, जापान, चीन और सिंगापुर जैसे देश मेडिकल टेक्नोलॉजी इनोवेशन के नए केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। बेन एंड कंपनी की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया-पैसिफिक क्षेत्र 2030 तक मेडिकल टेक्नोलॉजी (मेडटेक) इनोवेशन का प्रमुख ग्लोबल हब बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़े
– 2030 तक बाजार आकार: 132 बिलियन अमेरिकी डॉलर
– CAGR (वार्षिक वृद्धि दर): 6.9% (ग्लोबल औसत 5.5% से अधिक)
– वर्तमान बाजार हिस्सेदारी: ग्लोबल मेडिकल डिवाइस मार्केट में 16% (लगभग 94 बिलियन डॉलर)
रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में मेडटेक इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव आ रहा है। पहले मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग बेस के रूप में जाना जाने वाला यह क्षेत्र अब ओरिजिनल मेडिकल टेक्नोलॉजी के विकास, वैलिडेशन और निर्यात की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
सकारात्मक विकास
– ग्लोबल मेडिकल डिवाइस रिसर्च में एशिया-पैसिफिक की हिस्सेदारी 2012 के 29% से बढ़कर 2022 में 36% हो गई।
– 2023 में ग्लोबल पेटेंट फाइलिंग में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी दो-तिहाई से अधिक रही।
– चीन, भारत, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
मुख्य चुनौतियां
बेन एंड कंपनी ने पांच प्रमुख बाधाओं की पहचान की है:
– शुरुआती चरण में फंडिंग की कमी
– रेगुलेटरी और क्लिनिकल टैलेंट की कमी
– इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी रणनीतियों में देरी
– कमर्शियलाइजेशन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी
– धीमी रीइंबर्समेंट प्रक्रियाएं
भविष्य की उम्मीद
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले 12-24 महीने निर्णायक साबित होंगे। यदि सरकारें, निवेशक और कंपनियां इन स्ट्रक्चरल कमियों को दूर करने में सफल हुईं तो 2030 तक एशिया-पैसिफिक की मेडटेक कंपनियां अपनी अधिकांश आय विदेशी बाजारों से कमाएंगी।
क्षेत्र न सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन बल्कि दुनिया भर में अपनाई जाने वाली मेडिकल टेक्नोलॉजी का प्रमुख स्रोत बनने की ओर अग्रसर है। टैलेंट विकास, क्लिनिकल रिसर्च, मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और अंतरराष्ट्रीय पार्टनरशिप में निवेश इस क्षेत्र की ग्लोबल सफलता तय करेगा। (इनपुट-एजेंसी)


