भारत–रूस व्यापार सहयोग से ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और विनिर्माण क्षेत्रों को मिलेगा बड़ा लाभ

भारत सरकार के अनुसार, रूस के साथ बढ़ते व्यापारिक सहयोग से उपभोक्ता वस्तुएं, खाद्य और कृषि, फार्मा और मेडिकल सप्लाई, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक पुर्जे और कुशल प्रतिभा के आदान-प्रदान सहित कई क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुल रही हैं।

भारत-रूस व्यापार पिछले वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है और अब लगभग 70 अरब डॉलर के स्तर पर पहुँच चुका है, हालांकि इसके आगे अपार संभावनाएं अब भी मौजूद हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के बीच आयोजित एक कार्यक्रम में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों देशों का साझा लक्ष्य व्यापार को अधिक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी बनाना है, ताकि 2030 तक इसे 100 अरब डॉलर से अधिक तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि 70 अरब डॉलर तक पहुँचना महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन वर्तमान व्यापार संरचना को और संतुलित होने की आवश्यकता है।

मंत्री ने कहा कि भारत के पास रूसी बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यापक उत्पाद श्रेणियाँ हैं, जबकि रूस की कई क्षमताएँ भी भारत के लिए लाभकारी हो सकती हैं। भारत आने वाले दशकों में तेज़ी से बढ़ने की ओर अग्रसर है और अनुमान है कि 2047 तक अर्थव्यवस्था 4 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 30–35 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच सकती है।

रूस में औद्योगिक और उपभोक्ता उत्पादों की बड़ी मांग है, जिससे भारतीय उद्योगों को महत्वपूर्ण अवसर मिल सकते हैं। मंत्री ने कहा कि ऑटोमोबाइल, ट्रैक्टर, भारी व्यावसायिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टफोन, डेटा-प्रोसेसिंग उपकरण, भारी मशीनरी, औद्योगिक घटक, वस्त्र और खाद्य उत्पाद जैसे क्षेत्रों में भारत अपनी उपस्थिति को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकता है।

गोयल ने भारत के उद्यमी पारिस्थितिकी तंत्र की भी प्रशंसा की और कहा कि भारत आज विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। उन्होंने बताया कि भारत का युवा और कुशल कार्यबल रूस में अनुमानित तीन मिलियन पेशेवरों की कमी को पूरा करने में भूमिका निभा सकता है। भारत में हर साल 2.4 मिलियन STEM स्नातक तैयार होते हैं, जिनकी विशेषज्ञता डिजाइन, एनालिटिक्स और अनुसंधान के क्षेत्रों में रूस की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ा सकती है।

एनंत गोयंका, अध्यक्ष FICCI, के अनुसार, भारत-रूस साझेदारी का भविष्य उच्च-विकास और उच्च-नवाचार वाले क्षेत्रों में है—डिजिटल परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकियाँ, हरित ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, वित्तीय नवाचार और स्टार्टअप क्षेत्र।

-(इनपुटःएजेंसी)

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