बांग्लादेश: अवामी लीग ने यूनुस की अंतरिम सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघनों का लगाया गंभीर आरोप 

बांग्लादेश की पूर्व सत्तारूढ़ पार्टी अवामी लीग ने देश में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर गहरी चिंता जताई और मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर “डर के ज़रिए शासन करने” का गंभीर आरोप लगाया।

अवामी लीग ने सोमवार को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस पर “डर के ज़रिए शासन करने” का आरोप लगाते हुए कहा कि नवंबर 2025 देश के इतिहास में मानवाधिकारों के सबसे खराब दौर के रूप में दर्ज होगा।

पार्टी की ओर से जारी विस्तृत बयान में दावा किया गया है कि अंतरिम सरकार बनने के बाद से:
 
-एक महीने में दर्जनों लोग मारे जा चुके हैं 
-सैकड़ों लोगों को सोशल मीडिया पोस्ट के लिए हिरासत में लिया गया 
-300 से अधिक घरों पर बिना वारंट छापे मारे गए 
-भीड़ हिंसा में 16 लोगों की मौत और 11 घायल हुए 
-दूर-दराज के इलाकों में संदिग्ध हालात में लाशें मिलने की घटनाएं तेजी से बढ़ीं

इस पर पार्टी ने सवाल किया कि अगर एक महीने में दर्जनों लोग मारे जा सकते हैं, कई लोगों को फेसबुक पोस्ट के लिए हिरासत में लिया जा सकता है, और सैकड़ों लोगों को रेड में डराया जा सकता है, तो देश के भविष्य के लिए इसका क्या मतलब है।

अवामी लीग ने आरोप लगाया कि पुलिस, खुफिया एजेंसियां और अन्य सरकारी संस्थाएं अब “नियंत्रण के हथियार” बन चुकी हैं और बिना जवाबदेही के काम कर रही हैं। अवामी लीग ने कहा, “ये उल्लंघन कोई रैंडम घटनाएं नहीं हैं। ये असहमति को दबाने और पावर को मजबूत करने की एक सोची-समझी और सिस्टमैटिक कोशिश का हिस्सा हैं। सबूत बताते हैं कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जानलेवा ताकत का इस्तेमाल करने की इजाज़त दी गई है, जिससे पता चलता है कि सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा और अधिकारों से ऊपर पावर को रखना चाहती है।”

बयान में कहा गया, “नवंबर ने बांग्लादेश की कड़वी सच्चाई उजागर की है – जहां छात्र, पत्रकार, राजनीतिक कार्यकर्ता और आम नागरिक अब लगातार डर में जी रहे हैं। बोलने, प्रदर्शन करने या ऑनलाइन राय देने पर गिरफ्तारी, उत्पीड़न या उससे भी बुरा हो सकता है।”

पार्टी ने चेतावनी दी कि जब अंतरिम सरकार नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के बजाय डर फैलाती है, तो लोकतंत्र और नागरिक जीवन की नींव ही खतरे में पड़ जाती है। वहीं अंतरिम सरकार की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस तरह के आरोपों को सरकार “कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम” बताती रही है।

मानवाधिकार संगठन भी पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश में मनमानी गिरफ्तारियों, जबरन गायब करने और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमलों की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जता चुके हैं। (इनपुट-एजेंसी) 

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