नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से 10 जून को किया जाएगा एक्सिओम-4 मिशन का प्रक्षेपण

प्रतिष्ठित ‘एक्सिओम-4’ मिशन को भारतीय समयानुसार कल मंगलवार शाम 5:52 बजे नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा। यह ऐतिहासिक मिशन अमेरिका, भारत, पोलैंड और हंगरी के चार अंतरिक्ष यात्रियों को लो अर्थ ऑर्बिट में 14-दिवसीय वैज्ञानिक मिशन के लिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) ले जाएगा।  

एक्सिओम-4 मिशन नासा, इसरो और अन्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच साझेदारी को करेगा और गहरा  

अंतरिक्ष यान के अगले दिन बुधवार को रात 10 बजे के आसपास अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचने की उम्मीद है। अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष स्टेशन पर लगभग दो सप्ताह बिताएंगे और इस दौरान माइक्रोग्रैविटी अनुसंधान, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन और आउटरीच कार्यक्रम आयोजित करेंगे। एक्सिओम-4 मिशन नासा, इसरो और अन्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच साझेदारी को और गहरा करेगा। इससे भविष्य में अंतरिक्ष अन्वेषण का मार्ग प्रशस्त होगा। 

मिशन में भारत के शुभांशु शुक्ला भी हैं शामिल

बताना चाहेंगे एक्सिओम-4 मिशन में भारत के शुभांशु शुक्ला, पोलैंड के स्लावोस उज़्नान्स्की, हंगरी के टिबोर कापू और अमेरिका की पैगी व्हिटसन सहित चार अंतरिक्ष यात्री हैं। नासा के व्हिटसन मिशन कमांडर की भूमिका में है। राकेश शर्मा के 1984 के मिशन के बाद शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री बनने जा रहे हैं। उज़्नान्स्की और कापू का यह अपने-अपने देशों का दूसरा मानव अंतरिक्ष यान मिशन है।

आईएसएस पर जाने वाले पहले भारतीय बनेंगे ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला

लखनऊ में जन्मे 39 वर्षीय शुभांशु शुक्ला को जून 2006 में भारतीय वायुसेना में कमीशन मिला था। उन्होंने अब तक 2,000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव हासिल किया है और सुखोई-30 एमके 1, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डॉर्नियर और एएन-32 जैसे कई विमानों को उड़ाया और परीक्षण किया है।

साल 2020 में शुभांशु शुक्ला को इसरो के गगनयान मिशन के लिए चुना गया था

साल 2020 में उन्हें इसरो के गगनयान मिशन के लिए चुना गया था। यह भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान परियोजना है। चार साल बाद, उनकी अंतरिक्ष यात्रा ने एक नया मोड़ लिया है।शुक्ला ने कहा, “भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री विंग कमांडर राकेश शर्मा 1984 में अंतरिक्ष गए थे। मैं उनके बारे में स्कूल की किताबों में पढ़ता था और उनके अनुभवों को सुनकर बहुत प्रभावित होता था।”अपनी इस यात्रा को लेकर उन्होंने कहा, “शुरुआत में मेरा सपना सिर्फ उड़ान भरना था। लेकिन अंतरिक्ष यात्री बनने की राह बाद में खुली। मैं खुद को बेहद भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे जीवन भर उड़ान भरने का अवसर मिला और फिर मुझे अंतरिक्ष यात्री बनने का आवेदन करने का मौका मिला। और आज मैं यहां हूं।”

 

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