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बिहार चुनाव से पहले विपक्ष ने एक बार फिर दोहराई आत्मघाती ‘भूल’?

सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाज़ी, नीतियों पर बहस और आलोचना राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा मानी जाती हैं लेकिन जब यह असहमति व्यक्तिगत हमलों तक जा पहुंचे, तब लोकतंत्र की मर्यादा सवालों के घेरे में आ जाती है। बिहार के दरभंगा में हाल ही में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान विपक्षी मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत मां पर की गई अपमानजनक टिप्पणी इसी तरह का उदाहरण है। इस घटना ने न केवल सामाजिक और नैतिक मूल्यों पर चोट की है बल्कि चुनावी परिदृश्य में कांग्रेस और आरजेडी जैसे दलों की राजनीतिक चूक को भी उजागर कर दिया है।

लोकतंत्र में सवाल उठाना स्वाभाविक है लेकिन किसी की दिवंगत मां पर टिप्पणी करना जनता को स्वीकार नहीं हो सकता

यह घटना उस ऐतिहासिक सिलसिले का नया अध्याय है जिसमें विपक्ष बार-बार पीएम मोदी पर व्यक्तिगत हमले करता है और हर बार यह रणनीति उसे ही महंगी पड़ जाती है। लोकतंत्र में सवाल उठाना स्वाभाविक है लेकिन किसी की दिवंगत मां पर टिप्पणी करना जनता को स्वीकार नहीं हो सकता। यही वजह है कि इस मुद्दे ने बिहार चुनाव से पहले राजनीतिक बहस की दिशा बदल दी है।

मां का अपमान और भारतीय समाज की संवेदनशीलता

भारतीय संस्कृति में मां केवल परिवार का आधार नहीं बल्कि समाज और सभ्यता की नैतिक धुरी होती है। ‘मां’ शब्द भारतीय मानस में श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है। जब प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि ‘मेरी मां का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था, उनका अपमान हर मां, बहन और बेटी का अपमान है’ तो यह केवल एक भावुक वक्तव्य नहीं, यह भारतीय समाज की सामूहिक चेतना से सीधा संवाद है।

पीएम मोदी के शब्दों ने करोड़ों भारतीय परिवारों की भावनाओं को झकझोर दिया

पीएम मोदी के शब्दों ने करोड़ों भारतीय परिवारों की भावनाओं को झकझोर दिया। विशेषकर महिलाएं जो हमेशा से समाज में मर्यादा और सम्मान की रक्षक रही हैं, उन्होंने इस टिप्पणी को व्यक्तिगत तौर पर महसूस किया। अब यह केवल राजनीतिक विवाद नहीं रहा बल्कि भारतीय स्त्री अस्मिता पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। यही कारण है कि इस घटना ने आम जनमानस में गहरी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है और विपक्ष की मंशा सवालों के घेरे में आ गई।

विपक्ष की बार-बार की वही गलती

अगर पिछले दो दशकों के राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर डालें तो यह साफ दिखाई देता है कि पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष ने बार-बार व्यक्तिगत हमलों का सहारा लिया और हर बार यह रणनीति उलटी साबित हुई। 2007 में सोनिया गांधी का ‘मौत का सौदागर’ बयान गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी के पक्ष में गया। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले ‘चायवाला’ को लेकर की गई टिप्पणियों ने मोदी को आम जनता के और करीब कर दिया। 2019 में ‘चौकीदार चोर है’ का नारा भी कांग्रेस पर उलटा पड़ा।

प्रधानमंत्री की मां पर की गई टिप्पणी को भारतीय समाज व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों पर आघात मानते हैं

दरभंगा की घटना उसी सिलसिले की अगली कड़ी है। विपक्ष यह भूल जाता है कि भारतीय समाज व्यक्तिगत जीवन और परिवार पर हमले को कभी बर्दाश्त नहीं करता। जब कोई राजनीतिक दल प्रधानमंत्री की मां पर टिप्पणी करता है तो जनता उसे केवल व्यक्तिगत हमला नहीं मानती बल्कि अपने सांस्कृतिक मूल्यों पर आघात के रूप में देखती है। यही कारण है कि कांग्रेस और आरजेडी की यह गलती उनके लिए आत्मघाती साबित हो रही है।

जनता का विश्वास किसके साथ?

2014 में भाजपा ने लोकसभा चुनाव में 282 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। 2019 में यह संख्या बढ़कर 303 हो गई। 2024 में तीसरी बार लगातार केंद्र में सरकार बनाना भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में अभूतपूर्व उपलब्धि है। यह आंकड़े बताते हैं कि जनता का विश्वास किसके साथ है। आर्थिक मोर्चे पर भारत आज विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। विदेशी निवेश रिकॉर्ड स्तर पर है, डिजिटल इंडिया ने गांव-गांव तक इंटरनेट पहुंचाया है और मेक इन इंडिया ने उत्पादन को नई गति दी है। गरीब कल्याण योजनाओं जैसे उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना ने करोड़ों परिवारों तक सीधा लाभ पहुंचाया है। ऐसे ठोस कार्य जनता के मन में विश्वास जगाते हैं न कि व्यक्ति आरोप-प्रत्यारोप शायद कांग्रेस और आरजेडी इस बार भी यह समझने में चूक कर रहे हैं।

बिहार चुनाव और महिला मतदाताओं की भूमिका

बिहार की राजनीति हमेशा से सामाजिक समीकरणों और भावनात्मक मुद्दों से प्रभावित रही है। यहां महिला मतदाता चुनावी गणित में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। शराबबंदी कानून, पंचायत चुनावों में महिलाओं की भागीदारी और हालिया वर्षों में बढ़ती महिला साक्षरता ने इस वर्ग को राजनीति का अहम केंद्र बना दिया है।

पीएम मोदी कहते हैं, उनकी मां का अपमान सभी माताओं-बहनों का अपमान है, तो यह संदेश महिला मतदाताओं के दिल तक सीधे पहुंचता है

ऐसे में जब प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं कि उनकी मां का अपमान दरअसल सभी माताओं और बहनों का अपमान है तो यह बात महिला मतदाताओं के दिल तक सीधे पहुंचती है। भाजपा ने इस संवेदनशील मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए महिला मोर्चा के नेतृत्व में बंद और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए हैं। यह स्पष्ट संदेश है कि भाजपा इस लड़ाई को केवल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता तक सीमित नहीं मानती बल्कि इसे महिला अस्मिता और सामाजिक सम्मान का मुद्दा मानती है।

विपक्ष के पास सकारात्मक एजेंडा नहीं?

कांग्रेस और आरजेडी पहले ही अपनी विश्वसनीयता के संकट से जूझ रहे हैं। कांग्रेस पिछले दो लोकसभा चुनावों में लगातार ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुकी है। आरजेडी बिहार की सत्ता से लंबे समय से बाहर है और भ्रष्टाचार के आरोपों से उसकी छवि लगातार धूमिल हुई है। ऐसे समय में विपक्ष से अपेक्षा थी कि वह जनता को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास जैसे मुद्दों पर कोई ठोस विकल्प दे लेकिन इसके बजाय विपक्ष व्यक्तिगत हमलों में उलझा हुआ दिखाई देता है। यह रणनीति जनता को यह संदेश देती है कि विपक्ष के पास सकारात्मक एजेंडा नहीं है। वह केवल मोदी विरोध को ही अपनी राजनीति का आधार मान चुका है। जब राजनीति केवल विरोध तक सिमट जाती है और विकास के वैकल्पिक रास्ते नहीं दिखाती, तो जनता का विश्वास स्वाभाविक रूप से उस नेतृत्व की ओर चला जाता है जो ठोस काम और दृष्टि प्रस्तुत करता है।

राजनीतिक असर और पीएम मोदी की भावनात्मक अपील

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दरभंगा की यह घटना बिहार चुनाव की दिशा और धारा बदल सकती है। विपक्ष ने यह सोचकर हमला किया कि इससे पीएम मोदी की छवि को नुकसान होगा लेकिन परिणाम इसके विपरीत हुआ। भाजपा को भावनात्मक आधार मिला है और प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया ने जनता के दिलों को छू लिया है।

पूर्व में भी जब-जब पीएम मोदी पर व्यक्तिगत हमले किए गए विपक्ष काे भारी नुकसान उठाना पड़ा

पीएम मोदी का यह कहना कि ‘मैं उन्हें माफ कर सकता हूं, पर बिहार की जनता नहीं करेगी’ अपने आप में बड़ा संदेश है। इससे वे स्वयं उदार और सहनशील नेता के रूप में प्रस्तुत होते हैं, जबकि जनता का गुस्सा स्वाभाविक रूप से विपक्ष के खिलाफ मुड़ जाता है। यह संतुलित प्रतिक्रिया ही पीएम मोदी की सबसे बड़ी ताकत है, जिसने उन्हें बार-बार चुनावी मैदान में विजेता बनाया है। पूर्व में भी जब-जब पीएम मोदी पर व्यक्तिगत हमले किए गए विपक्ष काे भारी नुकसान उठाना पड़ा। इससे जाहिर होता है कि कांग्रेस-आरजेडी ने एक बार फिर सेल्फगोल कर लिया है जो उनका चुनावी गणित बिगाड़ सकता है। 

-(वरिष्ठ पत्रकार अमित शर्मा की राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राजनीतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ है। वर्तमान में वे प्रसार भारती न्यूज सर्विस के साथ जुड़े हैं।)

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