भाषिनी ने हरियाणा विधानसभा के लिए आयोजित की बहुभाषी एआई कार्यशाला, डिजिटल विधायी शासन को मिलेगा बढ़ावा

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के तहत डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (डीआईसी) के डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन (डीआईबीडी) ने हरियाणा विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों के लिए बहुभाषी एआई कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का उद्देश्य एआई आधारित भाषा प्रौद्योगिकियों के जरिए भाषा-प्रधान विधायी शासन को मजबूत करना, बहुभाषी विधायी कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना और नागरिकों के लिए विधायी प्रक्रियाओं को अधिक समावेशी एवं सुलभ बनाना था।

बहुभाषी एआई के उपयोग पर हुआ मंथन

कार्यशाला में विधानसभा सदस्यों, सचिवालय के अधिकारियों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया। इसमें इस बात पर चर्चा हुई कि बहुभाषी एआई किस प्रकार विधायी कार्यप्रवाह को अधिक कुशल बना सकता है, विभिन्न भाषाओं में संचार को आसान कर सकता है और नागरिकों की विधायी जानकारी तक पहुंच को बेहतर बना सकता है। सत्र में भाषिनी के भाषा-प्रथम डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) के दृष्टिकोण को भी प्रस्तुत किया गया।

एआई आधारित भाषा तकनीकों का प्रदर्शन

कार्यशाला में भाषिनी के स्वचालित वाक् पहचान (एएसआर), न्यूरल मशीन ट्रांसलेशन (एनएमटी), टेक्स्ट-टू-स्पीच (टीटीएस), ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (ओसीआर), लिप्यंतरण और बहुभाषी एपीआई जैसी तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। अधिकारियों को बताया गया कि इन तकनीकों को सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म और नागरिक सेवाओं से जोड़कर विधायी प्रक्रियाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाया जा सकता है।

लाइव डेमो में दिखाए गए एआई समाधान

भाषिनी टीम ने बहुभाषी वाक् पहचान, अनुवाद, प्रतिलेखन और दस्तावेज़ प्रबंधन से जुड़े एआई समाधानों का लाइव प्रदर्शन किया। इसमें दिखाया गया कि ये तकनीकें विधायी दस्तावेज़ तैयार करने, बहुभाषी संवाद, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन और नागरिक सहभागिता को बेहतर बनाने में किस प्रकार सहायक हो सकती हैं।

विधायी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता पर जोर

कार्यशाला में आधिकारिक दस्तावेजों तक बहुभाषी पहुंच, आवाज आधारित संवाद और नागरिकों को उनकी भाषा में विधायी जानकारी उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने इस बात पर विचार साझा किए कि एआई आधारित भाषा तकनीकें विधायी संस्थानों में पारदर्शिता, दक्षता और जनभागीदारी को कैसे बढ़ा सकती हैं।

शासन में बदलाव लाने में स्वदेशी भाषा तकनीक की भूमिका

डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन के सीईओ अमिताभ नाग ने कहा कि बहुभाषी एआई आधारित भाषा-प्रधान डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना शासन में बड़ा बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि भाषिनी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर नागरिक अपनी पसंदीदा भाषा में डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सके। उन्होंने सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।

मानव विशेषज्ञता बनी रहेगी अहम

हरियाणा विधानसभा के सचिव राजीव प्रसाद ने कहा कि एआई आधारित उपकरण प्रतिलेखन, अनुवाद और दस्तावेज़ीकरण को सरल बना सकते हैं, लेकिन विधायी अभिलेखों की सटीकता और प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए मानवीय विशेषज्ञता और सत्यापन हमेशा आवश्यक रहेगा।

विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उद्देश्य मानवीय बुद्धिमत्ता को सशक्त बनाना होना चाहिए, उसका स्थान लेना नहीं। वहीं, अध्यक्ष के सलाहकार राम नारायण यादव ने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही के प्रतिलेखन और दस्तावेजों के अनुवाद में भाषिनी एआई उपयोगी साबित हो सकती है, हालांकि भाषा और तथ्यों की सटीकता सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।

800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को सेवाएं दे रही है भाषिनी

डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन ने बताया कि भाषिनी वर्तमान में 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को भाषा सेवाएं प्रदान कर रही है। यह अब तक 8 अरब से अधिक एआई अनुरोधों को संसाधित कर चुकी है और प्रतिदिन 2 करोड़ से अधिक एआई अनुरोधों का संचालन करती है। प्लेटफॉर्म 36 भारतीय पाठ भाषाओं, 23 भारतीय वॉयस भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का समर्थन करता है। (इनपुट: पीआईबी)