रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य में युद्ध भले ही अत्याधुनिक हथियारों और तकनीकों से लड़े जाएंगे, लेकिन सड़क, पुल, सुरंग, बंदरगाह और एयरफील्ड जैसे बुनियादी ढांचे की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
नई दिल्ली में आयोजित बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव में रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी भी सैन्य अभियान की सफलता के लिए मजबूत आधारभूत ढांचा बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कई बार युद्ध का पहला मोर्चा सीमा पर नहीं बल्कि उस सड़क पर होता है, जो सैनिकों को सीमा तक पहुंचाती है। इसलिए ऐसी सड़कों का निर्माण करने वाले लोग भी राष्ट्रीय सुरक्षा के उतने ही महत्वपूर्ण प्रहरी हैं जितने सीमा पर तैनात जवान।
BRO ने बदली रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर की तस्वीर
राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले साढ़े छह दशकों में BRO एक सामान्य सड़क निर्माण एजेंसी से बदलकर दुनिया के प्रमुख रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर संगठनों में शामिल हो गया है।
उन्होंने अटल टनल, उमलिंग ला पास और सेला टनल जैसी परियोजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि ये BRO की तकनीकी क्षमता और कठिन परिस्थितियों में काम करने की प्रतिबद्धता को दिखाती हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि BRO आधुनिक तकनीकों को अपनाकर विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है और यह भारत को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
नई तकनीकों से तेज हो रहा निर्माण कार्य
राजनाथ सिंह ने BRO द्वारा अपनाई जा रही टनल निर्माण तकनीक की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि यह तकनीक शहरों में मेट्रो निर्माण से लेकर पहाड़ी क्षेत्रों में हाईवे विकास तक क्रांतिकारी बदलाव ला रही है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में BRO जिस गति से सड़क और अन्य परियोजनाएं पूरी कर रहा है, वह मानव क्षमता और आधुनिक तकनीक के मेल का उदाहरण है।
दूरदराज क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर
रक्षा मंत्री ने कहा कि कनेक्टिविटी सभ्यता के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी के माध्यम से दूरदराज क्षेत्रों को जोड़ने का काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि अब सीमा के गांवों को अंतिम गांव नहीं बल्कि देश के पहले गांव के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत काम किया जा रहा है।
तकनीक, रिसर्च और इनोवेशन पर जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें उद्योग, वैज्ञानिक संस्थान, इंजीनियर और प्रशासन सभी की भूमिका जरूरी है।
उन्होंने उद्योगों से नई तकनीकों में निवेश करने, शिक्षण संस्थानों से शोध बढ़ाने और इंजीनियरों से बेहतर समाधान विकसित करने का आह्वान किया।
BRO के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने कहा कि आधुनिक समय में रणनीतिक क्षमता केवल निर्माण से नहीं बल्कि बेहतर योजना, तेज क्रियान्वयन, प्रभावी निगरानी और टिकाऊ रखरखाव से तय होती है।
उन्होंने बताया कि BRO डिजिटल प्लानिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आधुनिक निर्माण तकनीक और उद्योग-अकादमिक सहयोग के जरिए भविष्य के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और प्रकाशनों की शुरुआत
कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने BRO की बेहतर परियोजना प्रबंधन और भर्ती प्रक्रिया के लिए दो डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए।
उन्होंने BRO की उपलब्धियों और इंजीनियरिंग नवाचारों पर आधारित तीन प्रकाशन भी जारी किए, जिनके नाम हैं:
- पथ प्रदर्शक
- ऊंची सड़कें
- पथ विकास
इस अवसर पर BRO कर्मियों के समर्पण और सेवा भावना को सम्मान देने के लिए BRO एंथम भी जारी किया गया।
रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर के भविष्य पर चर्चा
दो दिवसीय BRO स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव में उभरती तकनीकों, डिजिटल बदलाव, आधुनिक निर्माण पद्धतियों और सीमा क्षेत्रों में तेज विकास पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में सैन्य अधिकारी, नीति निर्माता, इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि और तकनीकी साझेदार शामिल हुए। इसका उद्देश्य तकनीक, नवाचार और बेहतर क्रियान्वयन के जरिए भारत के भविष्य के रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना है।
(इनपुट: PIB)


