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गुवाहाटी में ब्रिक्स एंटी-ड्रग सम्मेलन शुरू, सदस्य देशों ने ड्रग तस्करी के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई पर दिया जोर

भारत अपनी ‘ब्रिक्स’ अध्यक्षता के तहत 6-7 जुलाई को गुवाहाटी में ‘ब्रिक्स’ देशों की मादक पदार्थ निरोधक एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक की मेजबानी कर रहा है। इसमें ‘ब्रिक्स’ सदस्य देशों की मादक पदार्थ निरोधक एजेंसियों के प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी भाग ले रहे हैं।

इस मौके पर वरिष्ठ इथियोपियाई राजनयिक नेबियू टेडला, रूस के एंटी-ड्रग प्रमुख इवान गोरबुनोव, भारतीय नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के डायरेक्टर जनरल अनुराग गर्ग और ब्राजील के विदेश मंत्रालय के लुकास बारबोसा ने न्यूज एजेंसी के साथ खास बातचीत की।ब्राजील के विदेश मंत्रालय के लुकास बारबोसा ने कहा, “मैं असम, गुवाहाटी में आकर बहुत खुश हूं। यहां की मेहमाननवाजी के लिए मैं भारतीय चेयरपर्सन का बहुत शुक्रगुजार हूं। ब्रिक्स में एंटी-ड्रग वर्किंग ग्रुप का सहयोग का एक लंबा और पारंपरिक इतिहास रहा है। हम इसे बनाए रखना चाहते हैं और कानून लागू करने और इंटेलिजेंस में भी सहयोग बढ़ाना चाहते हैं, क्योंकि यह एक ट्रांसनेशनल खतरा है जिससे सभी सदस्यों को मिलकर काम करने की जरूरत है। इसीलिए हम यहां हैं और हम इसे आगे बढ़ाना चाहते हैं। इस मीटिंग को लेकर हमारी बहुत अच्छी उम्मीदें हैं।”

रूस के एंटी-ड्रग चीफ इवान गोरबुनोव ने कहा, “सबसे पहले, हम इस इवेंट के आयोजक को धन्यवाद देना चाहेंगे। हम बहुत प्रभावित हुए हैं। हमें यकीन है कि अनुभव साझा करना हमारी गतिविधियों का एक जरूरी हिस्सा है। हम अपना अनुभव भी साझा करना चाहेंगे और अपने देश में ड्रग्स की स्थिति पर चर्चा करना चाहेंगे। हम ब्रिक्स देशों के अनुभव भी सुनना चाहते हैं तो हमारा एक कॉमन मकसद है और एंटी-ड्रग फील्ड में हमारा काफी अनुभव भी है। हमें यकीन है कि यह कार्यक्रम हमारे और हमारे साझेदारों के लिए फायदेमंद होगा।”

नई दिल्ली में इथियोपिया के मामलों के इंचार्ज राजदूत नेबियू टेडला ने कहा, “हम अपने भारतीय साथियों को कुवैत के खूबसूरत शहर में हमारे आने के बाद से उनकी चेयरमैनशिप और मेजबानी के लिए धन्यवाद देना चाहते हैं। आज का ब्रिक्स सत्र, जैसा कि आपने कहा, ब्रिक्स कलेक्शन के प्लेटफॉर्म पर किए गए एंटी-ड्रग कामों पर फोकस करेगा। ड्रग्स की समस्या सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक समस्या है। इसलिए ब्रिक्स जैसे प्लेटफॉर्म मिलकर काम करने, जानकारी शेयर करने और समस्या को हल करने के लिए मिलकर बेहतर कोशिश करने का मौका देंगे। इसलिए हमारा मानना ​​है कि आज की बातचीत हमें उस मिलकर किए गए लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करेगी।”

उन्होंने आगे कहा कि इथियोपिया, किसी भी दूसरे देश की तरह, इस मामले में एक चुनौती है। हम ड्रग्स के फैलाव के खिलाफ लड़ाई और देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर इसके असर से निपटने में अपने अनुभव को लाएंगे और दिखाएंगे। हम यहां अपने साथियों से सीखने के लिए भी आए हैं। हमारा मानना ​​है कि इस सत्र में हर प्रतिनिधिमंडल से बेस्ट प्रैक्टिस सामने आएंगी, जिससे हम एक-दूसरे से सीख सकते हैं।

वहीं भारत के नेतृत्व को लेकर उन्होंने कहा, “भारत की चेयरमैनशिप अब तक बहुत बढ़िया रही है। हम इस बात की सराहना करते हैं कि भारतीय चेयरमैनशिप अब तक हमारी बातचीत पर जिस तरह से चर्चा कर रही है। भारत सभी सत्र को सफल बना रहा है और हर जगह आम सहमति का माहौल बना रहा है और हम इसके लिए बहुत सराहना करते हैं।”

इंडियन नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के डायरेक्टर जनरल अनुराग गर्ग ने कहा, मुझे बहुत खुशी है कि मीडिया इस इवेंट को कवर कर रहा है। यह ब्रिक्स, हेड्स ऑफ एंटी-ड्रग एजेंसी की कॉन्फ्रेंस है जो दो दिनों के लिए गुवाहाटी में हो रही है। ड्रग्स एक इंटरनेशनल समस्या बन गई है। हमारे युवा ड्रग्स में शामिल हो रहे हैं। यह एक ऐसी समस्या है जिससे हमें मिलकर लड़ना होगा। अलग-अलग देशों को, इस समस्या से लड़ने के लिए एक साथ आना होगा। यह एक कोशिश है, यह एक पहल है जो भारत ने गुवाहाटी में ब्रिक्स देशों की एंटी-ड्रग एजेंसियों के प्रमुखों की पहली बार इस मीटिंग को होस्ट करने के लिए की है। दो दिनों की इन बातचीत में हम कई जरूरी मुद्दों पर चर्चा करेंगे जो आज दुनिया के लिए चिंता का विषय हैं। एक है डार्कनेट मार्केट का इस्तेमाल और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल, फिर समुद्री रास्तों से ड्रग्स की आवाजाही आदि।

उन्होंने आगे कहा कि म्यांमार भारत में आने वाले मेथामफेटामाइन और हेरोइन दोनों का सोर्स है और यह हमारी वार्षिक रिपोर्ट में भी दिखा है, जिसे हमने कुछ दिन पहले पब्लिश किया था और हमें इस प्रॉब्लम के बारे में पता है और हम इसे कई तरह से सुलझा रहे हैं। हम असल में राज्यों को उनकी एंटी-ड्रग टास्क फोर्स बनाने में सपोर्ट कर रहे हैं। वे फ्रंटलाइन वॉरियर्स हैं जो राज्य स्तर पर इस खतरे से लड़ेंगे। हम राज्यों पर यह असर डालने की कोशिश कर रहे हैं कि वे अपने राज्यों में एक असरदार एंटी-ड्रग फोर्स बनाएं। यह एक बात है। दूसरा, हम अपनी कैपेसिटी बना रहे हैं। आपको पता होगा कि एनसीबी ने पिछले दो सालों में यहां जोनल ऑफिस खोले हैं। हमने यहां गुवाहाटी में एक रीजनल ऑफिस भी खोला है जिसे एक आईजी स्तर का ऑफिसर हेड करता है। और इससे ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई को बहुत बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में इन ऑफिस के बनने और इनके चालू होने के साथ, जैसा कि आपने लोकल मीडिया में देखा होगा, पकड़ भी बढ़ गई है। हमने कुछ खास किंगपिन की भी पहचान की है जो इस ट्रांसनेशनल ट्रैफिकिंग में शामिल हैं। (इनपुट-आईएएनएस)

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